मेरठ में दर्दनाक हादसा- लिफ्ट में फंसने से स्पोर्ट्स कारोबारी हरविंदर सिंह की मौत, सीसीटीवी से खुला भयावह सच। 

Meerut News: मेरठ के सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट में 26 जुलाई 2025 की शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। इंडियन स्पोर्ट्स हाउस के मालिक, 63 वर्षीय...

Jul 28, 2025 - 14:34
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मेरठ में दर्दनाक हादसा- लिफ्ट में फंसने से स्पोर्ट्स कारोबारी हरविंदर सिंह की मौत, सीसीटीवी से खुला भयावह सच। 
मेरठ में दर्दनाक हादसा- लिफ्ट में फंसने से स्पोर्ट्स कारोबारी हरविंदर सिंह की मौत, सीसीटीवी से खुला भयावह सच। 

मेरठ के सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट में 26 जुलाई 2025 की शाम एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ। इंडियन स्पोर्ट्स हाउस के मालिक, 63 वर्षीय हरविंदर सिंह उर्फ पिंटू की अपनी ही फैक्ट्री की लिफ्ट में फंसने से दर्दनाक मृत्यु हो गई। यह हादसा तब हुआ, जब हरविंदर अपनी दुकान की माल ढुलाई वाली ओपन लिफ्ट से दूसरी मंजिल पर जा रहे थे। अचानक बिजली चली गई, जिससे लिफ्ट रुक गई। हरविंदर ने बाहर झांकने के लिए अपनी गर्दन लिफ्ट से बाहर निकाली, तभी बिजली वापस आ गई और लिफ्ट अचानक ऊपर की ओर चल पड़ी। इस दौरान उनकी गर्दन लिफ्ट और लिंटर के बीच फंस गई, जिसके कारण उनका सिर धड़ से अलग हो गया। लगभग आधे घंटे बाद कर्मचारियों ने सीसीटीवी फुटेज में यह भयावह दृश्य देखा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और स्थानीय लोगों ने लिफ्ट सुरक्षा नियमों की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। इस घटना ने पूरे मेरठ में शोक की लहर पैदा कर दी है।

26 जुलाई 2025 की शाम करीब 5:30 बजे, मेरठ के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट में यह दुखद घटना घटी। हरविंदर सिंह, जो शहर के जाने-माने स्पोर्ट्स कारोबारी थे, अपनी फैक्ट्री में माल ढुलाई के लिए लगी ओपन लिफ्ट से दूसरी मंजिल पर जा रहे थे। यह लिफ्ट भारी खेल उपकरण और जिम सामान ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई थी। बताया जाता है कि लिफ्ट में कोई सुरक्षा गेट या आपातकालीन ब्रेक सिस्टम नहीं था।

हादसे के समय बिजली अचानक चली गई, जिसके कारण लिफ्ट बीच में रुक गई। हरविंदर ने यह देखने के लिए कि लिफ्ट क्यों रुकी, अपनी गर्दन बाहर निकाली। तभी बिजली वापस आ गई, और लिफ्ट तेजी से ऊपर की ओर बढ़ी। इस दौरान उनकी गर्दन लिफ्ट और दूसरी मंजिल के लिंटर के बीच फंस गई। हादसा इतना भयानक था कि उनका सिर धड़ से अलग हो गया, और शरीर लिफ्ट के अंदर ही रह गया।

लगभग आधे घंटे तक इस हादसे का किसी को पता नहीं चला। शोरूम के ग्राउंड फ्लोर पर बैठे कर्मचारियों की नजर सीसीटीवी स्क्रीन पर पड़ी, जहां उन्होंने हरविंदर को लिफ्ट में फंसा देखा। कर्मचारियों ने तुरंत शोर मचाया, और पड़ोसी कारोबारी भी मौके पर पहुंचे। दृश्य रोंगटे खड़े करने वाला था—हरविंदर की गर्दन लिफ्ट के बाहर फंसी थी, और चारों ओर खून बिखरा हुआ था।

कर्मचारियों और पड़ोसी कारोबारियों ने लिफ्ट को पीछे धकेलकर हरविंदर के शरीर को बाहर निकालने की कोशिश की। स्थानीय कारोबारी अनुज ने बताया कि उन्होंने लिफ्ट सर्विस और इलेक्ट्रॉनिक कटर सर्विस को बुलाया, लेकिन इंतजार किए बिना उन्होंने खुद लिफ्ट को धकेलकर शव निकाला। इसके बाद हरविंदर को गढ़ रोड स्थित न्यूटिमा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस और सीओ अभिषेक तिवारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में लिफ्ट की तकनीकी खराबी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हादसे का कारण माना जा रहा है। सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि परिवार ने अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, लेकिन पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। जांच में सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की मदद ली जा रही है।

हरविंदर सिंह की मृत्यु से उनके परिवार और सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट के कारोबारियों में शोक की लहर छा गई। हरविंदर अपने पीछे पत्नी, दो बेटों और एक बेटी का परिवार छोड़ गए हैं। उनके भांजे, जो सेना में ब्रिगेडियर हैं, उस दिन उनसे मिलने के लिए जवाहर क्वार्टर स्थित उनके घर पर आए थे। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन इस हादसे ने सब कुछ उजाड़ दिया। हरविंदर के बड़े भाई सुखविंदर सिंह, जो पूर्व रणजी खिलाड़ी और स्पोर्ट्स कारोबारी हैं, ने बताया कि हादसे की खबर ने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

सूरजकुंड स्पोर्ट्स गुड्स व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज सिंघल ने बताया कि हरविंदर एसोसिएशन के मंत्री थे और सभी के बीच सम्मानित थे। उनके निधन के शोक में 27 जुलाई को सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट बंद रहा, और उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों कारोबारी शामिल हुए।

  • लिफ्ट सुरक्षा पर सवाल

इस हादसे ने उत्तर प्रदेश में लिफ्ट सुरक्षा नियमों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई व्यावसायिक भवनों और फैक्ट्रियों में लागत बचाने के लिए स्थानीय तकनीशियनों को लिफ्ट रखरखाव का काम सौंपा जाता है, जो अक्सर अप्रशिक्षित होते हैं। इस मामले में भी जांच से पता चला कि लिफ्ट महज 10 दिन पहले लगाई गई थी, और इसमें कोई आपातकालीन ब्रेक या सुरक्षा गेट नहीं था।

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में लिफ्ट हादसों की कई घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, सितंबर 2023 में ग्रेटर नोएडा के आम्रपाली ड्रीम वैली में एक निर्माणाधीन इमारत में लिफ्ट गिरने से आठ मजदूरों की मृत्यु हो गई थी। उस हादसे में भी लिफ्ट के तार टूटने और रखरखाव में लापरवाही सामने आई थी।

  • सुरक्षा उपायों की आवश्यकता

इस हादसे ने लिफ्ट सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

नियमित जांच: सभी व्यावसायिक भवनों में लिफ्टों की नियमित जांच और रखरखाव अनिवार्य होना चाहिए।

सुरक्षा उपकरण: लिफ्टों में आपातकालीन ब्रेक और सुरक्षा गेट जैसे उपकरण अनिवार्य होने चाहिए।

प्रशिक्षित तकनीशियन: लिफ्ट रखरखाव के लिए केवल प्रशिक्षित और प्रमाणित तकनीशियनों को काम पर रखा जाना चाहिए।

जागरूकता अभियान: कर्मचारियों और मालिकों को लिफ्ट सुरक्षा के बारे में प्रशिक्षण देना चाहिए।

हरविंदर सिंह की मृत्यु एक दुखद और टालने योग्य हादसा है, जिसने मेरठ के व्यापारिक समुदाय को झकझोर कर रख दिया। यह घटना लिफ्ट सुरक्षा नियमों की अनदेखी और तकनीकी खराबी का दुखद परिणाम है। पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज से इस हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है, लेकिन यह घटना हमें याद दिलाती है कि सुरक्षा मानकों का पालन कितना जरूरी है।

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