PM Modi at IIT Delhi: 'इस दौर में जो सीखेगा, वही जीतेगा' - दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी का छात्रों को मंत्र
PM Modi at IIT Delhi: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस दौर में जो सीखेगा, वही जीतेगा।

- 'इस दौर में जो सीखेगा, वही जीतेगा'- IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में पीएम मोदी का छात्रों को मूलमंत्र
- IIT Delhi Convocation: आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में बोले पीएम मोदी, 'तकनीकी क्रांति के दौर में निरंतर सीखना जरूरी'
- "जो सीखेगा, वही जीतेगा": आईआईटी दिल्ली में बोले पीएम मोदी, युवाओं को दिया सफलता का बड़ा गुरुमंत्र
- PM Modi Speech at IIT Delhi: निरंतर सीखने की क्षमता ही सफलता की कुंजी है, आईआईटी दिल्ली में बोले प्रधानमंत्री मोदी
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के दीक्षांत समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिग्री प्राप्त करने वाले देश के प्रतिभाशाली युवाओं से सीधा संवाद किया। शनिवार, 8 अगस्त 2026 को आयोजित इस विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को बदलती दुनिया के अनुरूप खुद को निरंतर ढालने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "इस दौर में जो सीखेगा, वही जीतेगा," क्योंकि आज के तकनीकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में केवल डिग्री काफी नहीं है, बल्कि अनवरत सीखने की ललक ही व्यक्ति और राष्ट्र को आगे ले जाती है। प्रधानमंत्री का यह संबोधन देश के युवाओं को अनुसंधान, नवाचार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में शामिल आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न संकायों के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अपने ओजस्वी भाषण में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य का है। ऐसे समय में परंपरागत ज्ञान के साथ-साथ नई तकनीकों को अपनाने और लगातार नया सीखने का कौशल ही किसी व्यक्ति की वास्तविक ताकत बनता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि संस्थान से निकलने के बाद भी सीखने की प्रक्रिया रुकनी नहीं चाहिए।
आईआईटी दिल्ली परिसर में आयोजित इस समारोह की शुरुआत परंपरागत और गरिमामय माहौल में हुई। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों, संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, निदेशक, शिक्षकों और देश-विदेश से आए विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों की मौजूदगी में कार्यक्रम आगे बढ़ा।
दीक्षांत भाषण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान और नवाचार की सदी है। आज के दौर में ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस जैसी प्रौद्योगिकियों ने काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में जो युवा खुद को अपग्रेड करते रहेंगे और नई स्किल्स सीखते रहेंगे, वे ही वैश्विक मंच पर नेतृत्व करेंगे। प्रधानमंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में आईआईटी के पूर्व छात्रों (Alumni) के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत आज स्टार्ट-अप इकोसिस्टम में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है, और इसमें आईआईटी के युवाओं का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने छात्रों को रिस्क लेने और 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब क्रिएटर' बनने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुख्य संदेश: "आज की तेजी से बदलती दुनिया में आपकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कितना नया सीखते हैं। याद रखिए, इस दौर में जो लगातार सीखेगा, वही आगे बढ़ेगा और जीतेगा।"
दीक्षांत समारोह के दौरान संस्थान के निदेशक ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए आईआईटी दिल्ली द्वारा किए जा रहे शोध और वैश्विक साझेदारियों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण देश के तकनीकी संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रेरणा देता है।
वहीं डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों और उनके परिजनों ने प्रधानमंत्री के संबोधन पर अत्यधिक उत्साह व्यक्त किया। छात्रों का कहना था कि 'निरंतर सीखने' का संदेश उनके आगामी पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत का काम करेगा। शिक्षाविदों ने भी पीएम के इस बयान की सराहना करते हुए कहा कि बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था में यह सोच युवाओं को हर चुनौती के लिए तैयार करेगी। प्रधानमंत्री के इस संबोधन का असर केवल आईआईटी दिल्ली के परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों और युवाओं के बीच एक नया विमर्श शुरू करेगा। 'लाइफलॉन्ग लर्निंग' (जीवनपर्यंत सीखने) की अवधारणा को बल मिलने से युवा स्किलिंग और री-स्किलिंग पर अधिक ध्यान देंगे।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा इनोवेशन और रिसर्च पर दिए गए जोर से देश के स्टार्ट-अप कल्चर को और अधिक बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तकनीकी रूप से सक्षम युवा जब देश की स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए तकनीक विकसित करेंगे, तो इससे 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को भी मजबूती मिलेगी। दीक्षांत समारोह के संपन्न होने के बाद, उपाधि प्राप्त करने वाले युवा अब उद्योग, अनुसंधान और उद्यमिता के नए क्षेत्रों में कदम रखेंगे। संस्थान स्तर पर भी प्रधानमंत्री के दिए गए सुझावों के अनुरूप पाठ्यक्रम में अत्याधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक कौशल को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार की ओर से अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराई जा रही राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन जैसी पहलों के माध्यम से युवाओं को देश में ही अत्याधुनिक शोध के अवसर मिलते रहेंगे। आने वाले समय में यह देखना होगा कि ये युवा अपने सीखे गए ज्ञान का उपयोग किस प्रकार वैश्विक और राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में करते हैं।
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