पर्सनल लोन अब मजबूरी नहीं, स्मार्ट फाइनेंशियल चॉइस बन गया है, FD की बजाय पर्सनल लोन ले रहे लोग, जानें इसका कारण।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पर्सनल लोन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां यह मुख्य रूप से आर्थिक मजबूरी या इमरजेंसी के लिए लिया

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पर्सनल लोन का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां यह मुख्य रूप से आर्थिक मजबूरी या इमरजेंसी के लिए लिया जाता था, अब अमीर और मास एफ्लुएंट क्लास के लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। वे अपनी लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, स्टॉक्स या फिक्स्ड डिपॉजिट्स को इंटैक्ट रखने के लिए पर्सनल लोन चुन रहे हैं। यह ट्रेंड इसलिए मजबूत हो रहा है क्योंकि इंस्टेंट पर्सनल लोन की सुविधा और तुरंत फंड्स मिलने से लोग अपनी बचत को कंपाउंडिंग के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं। बैंक भी अब रिस्क मैनेजमेंट के लिए केवल पुराने ग्राहकों, अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले और रिलेशनशिप वाले कस्टमर्स को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे ग्राहकों को कम इंटरेस्ट रेट्स और फास्ट अप्रूवल मिल रहा है जिससे यह ट्रेंड और बढ़ रहा है।
यह बदलाव मुख्य रूप से फाइनेंशियल स्ट्रैटेजी से जुड़ा है। एफ्लुएंट बॉरोअर्स जानते हैं कि FD या म्यूचुअल फंड्स तोड़ने से कंपाउंडिंग का फायदा खो जाता है और टैक्स इम्प्लिकेशंस भी आ सकते हैं। इसके बजाय पर्सनल लोन लेकर जरूरत पूरी करने से वे इन्वेस्टमेंट्स को ग्रोथ के लिए छोड़ देते हैं। उदाहरण के लिए इंटरनेशनल ट्रैवल, होम रेनोवेशन या फैमिली इवेंट्स जैसे खर्चों के लिए लोन लिया जा रहा है। डेटा से पता चलता है कि 2025 में पर्सनल लोन का उपयोग लाइफस्टाइल और एस्पिरेशनल स्पेंडिंग में काफी बढ़ा है जहां ट्रैवल और वेडिंग्स प्रमुख कारण बने हैं। बैंकिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार मास एफ्लुएंट और एफ्लुएंट कैटेगरी में बॉरोइंग शिफ्ट हो रही है क्योंकि ये ग्राहक हाई वैल्यू लोन लेते हैं और रेपेमेंट में डिसिप्लिन्ड रहते हैं।
बैंकों की साइड से भी स्ट्रैटेजी बदली है। अनसिक्योर्ड लेंडिंग में रिस्क बढ़ने के बाद कई बैंक टाइट अंडरराइटिंग कर रहे हैं। वे न्यू-टू-क्रेडिट या लो क्रेडिट स्कोर वाले कस्टमर्स से दूर रह रहे हैं और पुराने, ट्रस्टेड ग्राहकों पर फोकस कर रहे हैं। ऐसे ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड लोन, लोअर इंटरेस्ट रेट्स और डिजिटल प्रोसेस ऑफर किए जा रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर बैंक जैसे कोटक महिंद्रा ने स्पेशल प्रोग्राम लॉन्च किए हैं जहां रिलेशनशिप वैल्यू हाई होने पर एफ्लुएंट कस्टमर्स को टारगेट किया जा रहा है। यह अप्रोच रिस्क कम करती है और बैलेंस शीट को मजबूत रखती है। रिजर्व बैंक के डेटा से भी पता चलता है कि रिटेल क्रेडिट ग्रोथ में पर्सनल लोन का योगदान बढ़ा है लेकिन सेलेक्टिव तरीके से।
इनसेट: 2025 के पहले हाफ में पर्सनल लोन का 27 प्रतिशत हिस्सा ट्रैवल के लिए इस्तेमाल हुआ जो अब तक का सबसे बड़ा कारण बन गया। इसके अलावा 47.8 प्रतिशत लोन लाइफस्टाइल नीड्स जैसे रेंट, शॉपिंग, होम रेनोवेशन और गिफ्टिंग के लिए गए। वेडिंग्स और फैमिली इवेंट्स के लिए भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा जहां टियर 1 सिटीज में 14 प्रतिशत लोन ऐसे खर्चों के लिए थे।
पर्सनल लोन की यह नई लोकप्रियता डिजिटल लेंडिंग और फिनटेक के कारण भी बढ़ी है। इंस्टेंट अप्रूवल, मिनिमल डॉक्यूमेंटेशन और मोबाइल ऐप्स से लोन कुछ मिनटों में मिल जाता है। एफ्लुएंट ग्राहकों के लिए यह सुविधा आकर्षक है क्योंकि वे इमरजेंसी फंड्स या लिक्विड सेविंग्स को छूना नहीं चाहते। कई मामलों में लोन इंटरेस्ट रेट्स FD इंटरेस्ट से ज्यादा होते हैं लेकिन ओवरऑल कंपाउंडिंग बेनिफिट ज्यादा होने से यह फायदेमंद साबित होता है। बैंक भी ऐसे ग्राहकों को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि उनके पास स्टेबल इनकम और हाई क्रेडिट स्कोर होता है जिससे डिफॉल्ट रिस्क कम रहता है। यह ट्रेंड 2026 में और मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि रिटेल क्रेडिट ग्रोथ जारी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि हाई इनकम ग्रुप में लाइफस्टाइल चेंजेस, ट्रैवल और फैमिली इवेंट्स के लिए लोन लेना आम हो जाएगा। हालांकि बैंक रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस रखेंगे और केवल लो-रिस्क, ट्रस्टेड बॉरोअर्स को ही बड़े अमाउंट्स देंगे। यह बदलाव दिखाता है कि पर्सनल लोन अब केवल जरूरत का साधन नहीं बल्कि स्मार्ट फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा बन गया है।
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