अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक नीतियां और टैरिफ धमकियां से पारंपरिक मित्र देश दूर हो रहे, ग्लोबल ऑर्डर में परिवर्तन की लहर शुरू

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी 2025 को शुरू हुए दूसरे कार्यकाल में उनकी नीतियों ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहरा प्रभावित किया है। ट्रंप ने वैश्विक व्यापार

Jan 31, 2026 - 08:58
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक नीतियां और टैरिफ धमकियां से पारंपरिक मित्र देश दूर हो रहे, ग्लोबल ऑर्डर में परिवर्तन की लहर शुरू
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक नीतियां और टैरिफ धमकियां से पारंपरिक मित्र देश दूर हो रहे, ग्लोबल ऑर्डर में परिवर्तन की लहर शुरू
  • ट्रंप के टैरिफ और विवादास्पद फैसलों से सहयोगी देशों का अमेरिका से मोहभंग, वैश्विक व्यवस्था में आ रहे तेज बदलाव, नई साझेदारियां बनने लगीं
  • ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में टैरिफ और एकतरफा कार्रवाइयों से यूरोपीय और एशियाई सहयोगी अमेरिका का साथ छोड़ रहे, वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उनके विवादास्पद फैसलों, आक्रामक टैरिफ नीतियों और एकतरफा विदेश नीति कार्रवाइयों ने वैश्विक गठबंधनों को हिला दिया है। पारंपरिक सहयोगी देश अब अमेरिका से दूरी बनाने लगे हैं, जिससे वैश्विक व्यवस्था में तेज बदलाव आ रहा है। ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने व्यापार, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अमेरिकी भूमिका को पुनर्परिभाषित किया है, जिसके परिणामस्वरूप सहयोगी देश चीन और अन्य शक्तियों की ओर मुड़ रहे हैं। आने वाले समय में और अधिक परिवर्तन संभावित हैं, क्योंकि मध्यम शक्तियां नए गठबंधन बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 20 जनवरी 2025 को शुरू हुए दूसरे कार्यकाल में उनकी नीतियों ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहरा प्रभावित किया है। ट्रंप ने वैश्विक व्यापार पर 10 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए हैं, जो सभी व्यापारिक साझेदारों पर लागू हैं। इन टैरिफों का उद्देश्य अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करना और अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देना बताया गया है, लेकिन इनसे सहयोगी देशों में गहरा असंतोष फैला है। कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों पर लगाए गए टैरिफों ने इन देशों को अमेरिका से दूरी बनाने के लिए मजबूर किया है। ट्रंप ने कनाडा पर 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी है यदि वह चीन के साथ कोई व्यापार समझौता करता है। इसी तरह, ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों पर भी टैरिफ बढ़ाए गए हैं, जिससे इन देशों ने चीन के साथ नए व्यापार समझौते करने शुरू कर दिए हैं।

ट्रंप की नीतियों में अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका का अलगाव भी शामिल है। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को बाहर किया है। इन फैसलों का कारण अमेरिकी प्रशासन ने इन संगठनों में चीन का प्रभाव और अमेरिका के योगदान की तुलना में कम लाभ बताया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से निकलने का फैसला कोविड-19 महामारी के प्रबंधन में कथित कमियों के आधार पर लिया गया, जबकि मानवाधिकार परिषद से निकलने का कारण इजरायल विरोधी पूर्वाग्रह और मानवाधिकार उल्लंघनकर्ता देशों की सदस्यता बताई गई है। पेरिस समझौते से निकलने का आधार अमेरिकी उद्योगों पर अनुचित बोझ और चीन तथा भारत को मिली छूट को रखा गया है। इन निकासी से वैश्विक शासन व्यवस्था कमजोर हुई है, जिससे स्वास्थ्य, मानवाधिकार और जलवायु नीतियों में समन्वय प्रभावित हो रहा है।

ट्रंप की विदेश नीति में सैन्य कार्रवाइयां भी प्रमुख हैं। उन्होंने वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाकर निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया, जिसे मादक पदार्थों की तस्करी रोकने और वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करने के रूप में देखा गया है। इसी तरह, यमन और ईरान में हमले किए गए, जिसमें ईरानी परमाणु स्थलों पर बमबारी शामिल है। गाजा में नाजुक युद्धविराम कराने में भी ट्रंप की भूमिका रही है। यूरोपीय देशों से रक्षा व्यय बढ़ाने की मांग की गई है, जबकि ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दी गई है। ट्रंप ने डेनमार्क से ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसे अस्वीकार करने पर सैन्य बल की धमकी भी दी गई, लेकिन बाद में बल प्रयोग से इनकार किया। इन कार्रवाइयों से नाटो में तनाव बढ़ा है, और सहयोगी देश अमेरिका को एक खतरे के रूप में देखने लगे हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने मध्यम शक्तियों को एकजुट होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था टूट रही है, और कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया तथा मलेशिया जैसे देशों को नए आर्थिक और रक्षा गठबंधन बनाने चाहिए। कार्नी ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर यह भाषण दिया, जहां ट्रंप के ग्रीनलैंड दावे पर चर्चा हो रही थी। कनाडा ने चीन के साथ व्यापार समझौता करने की दिशा में कदम बढ़ाया, जिस पर ट्रंप ने 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी चीन के साथ यात्रा की और व्यापार समझौते किए, जो अमेरिकी टैरिफों से कुछ ब्रिटिश निर्यातों को छूट देते हैं। स्टार्मर ने ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत की, लेकिन यूरोपीय संघ के साथ भी नए समझौते किए।

ट्रंप ने ब्राजील पर भी टैरिफ की धमकी दी है, यदि वह कुछ शर्तें पूरी नहीं करता। ब्राजील के वित्त मंत्री फर्नांडो हद्दाद ने कहा कि ट्रंप के टैरिफ खतरे आर्थिक रूप से समझ से परे हैं। ब्राजील ने बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था में निवेश किया है, लेकिन अमेरिका इसे कमजोर कर रहा है। ट्रंप ने पनामा नहर पर भी दावा किया, लेकिन इसे सिर्फ धमकी के रूप में देखा गया। इन धमकियों से लातिन अमेरिकी देश भी अमेरिका से दूरी बनाने लगे हैं।

यूरोपीय परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश यूरोपीय अमेरिका को विश्वसनीय सहयोगी नहीं मानते। केवल 16 प्रतिशत यूरोपीय अमेरिका को सहयोगी मानते हैं, जबकि 20 प्रतिशत इसे प्रतिद्वंद्वी या दुश्मन के रूप में देखते हैं। यह सर्वेक्षण नवंबर 2025 में 21 देशों में किया गया। यूरोपीय देशों में अमेरिका के प्रति विश्वास कम होने से वे पुनर्रक्षा की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ट्रंप की नीतियां अमेरिका को एक शिकारी हेजेमॉन के रूप में पेश कर रही हैं, जो वैश्विक व्यवस्था को तोड़ रही हैं।

ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम और व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 का उपयोग करके टैरिफ लगाए हैं। इनमें कनाडा, मैक्सिको और चीन पर विशेष टैरिफ शामिल हैं, जो अवैध अप्रवास और व्यापार घाटे के आधार पर लगाए गए। अदालतों ने कुछ मामलों में इनकी वैधता पर सवाल उठाए, लेकिन टैरिफ लागू हैं। ट्रंप ने अप्रैल 2025 में 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की घोषणा की, जिसे 'लिबरेशन डे' कहा गया। इसके बाद देश-विशेष टैरिफ 49 प्रतिशत तक बढ़ाए गए। इनसे आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुईं, और सहयोगी देशों ने प्रतिकारी टैरिफ लगाए।

ट्रंप की नीतियां एशियाई सहयोगी देशों को भी प्रभावित कर रही हैं। जापान और दक्षिण कोरिया से सैन्य खर्च बढ़ाने की मांग की गई है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अमेरिका से दूरी बनाने पर विचार किया है। 'फाइव आईज' खुफिया साझेदारी प्रभावित हो रही है। ट्रंप ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों को उलट दिया, जिससे मध्यम शक्तियां द्विपक्षीय समझौते करने लगीं। इंडोनेशिया, सऊदी अरब, तुर्की और वियतनाम ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल हुए, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को कमजोर करने का प्रयास है।

ट्रंप की कार्रवाइयों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलाव आ रहा है। अमेरिका वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका छोड़ रहा है, जिससे नया अव्यवस्थित ऑर्डर बन रहा है। सहयोगी देशों का अमेरिका से अलगाव वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल रहा है। आने वाले दिनों में मध्यम शक्तियों के नए गठबंधन और चीन की बढ़ती भूमिका से और परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप ने ईरान पर अतिरिक्त हमलों की संभावना जताई है, जबकि यूरोपीय देश स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने लगे हैं। ट्रंप की नीतियां पोस्ट-वेस्टर्न विश्व में अमेरिका को एक महाशक्ति के रूप में पेश कर रही हैं, लेकिन इससे सहयोगी देशों का विश्वास टूट रहा है। वैश्विक शासन में कमी से स्वास्थ्य, जलवायु और सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय प्रभावित हो रहा है। ट्रंप के फैसलों से वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है, और नई साझेदारियां बन रही हैं।

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