शॉर्ट सर्किट से होटलनुमा इमारत में फैले धुएं का गुबार के बीच दमकल और पुलिस के पहुंचने से पहले ही मसीहा बनकर उभरे वसीम राजा और शोएब।

राजधानी दिल्ली का बेहद व्यस्त और घनी आबादी वाला इलाका मालवीय नगर सुबह के समय एक भयानक त्रासदी का गवाह

Jun 4, 2026 - 11:43
Jun 4, 2026 - 11:45
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शॉर्ट सर्किट से होटलनुमा इमारत में फैले धुएं का गुबार के बीच दमकल और पुलिस के पहुंचने से पहले ही मसीहा बनकर उभरे वसीम राजा और शोएब।
शॉर्ट सर्किट से होटलनुमा इमारत में फैले धुएं का गुबार के बीच दमकल और पुलिस के पहुंचने से पहले ही मसीहा बनकर उभरे वसीम राजा और शोएब।
  • दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में भड़की थी भीषण आग, स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाई दर्जनों मासूम जिंदगियां।
  • संकरी गलियों के बीच धधकती लपटों से घिरे विदेशी नागरिकों और स्थानीय लोगों को कटर से ताले काटकर और सीपीआर देकर निकाला सुरक्षित बाहर।

राजधानी दिल्ली का बेहद व्यस्त और घनी आबादी वाला इलाका मालवीय नगर सुबह के समय एक भयानक त्रासदी का गवाह बना, जब वहां स्थित एक बहुमंजिला होटलनुमा इमारत (बेड एंड ब्रेकफास्ट फैसिलिटी) में अचानक भीषण आग लग गई। सुबह करीब पौने नौ बजे जब लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तब हौज रानी इलाके की इस इमारत से अचानक धुएं के काले और घने गुबार उठने लगे। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे अंदर ठहरे मेहमानों और कर्मचारियों के बीच चीख-पुकार मच गई। चूंकि यह इलाका काफी तंग और संकरा है, इसलिए आग की लपटें तेजी से ऊपरी मंजिलों की तरफ बढ़ने लगीं और सीढ़ियों का रास्ता पूरी तरह से जहरीले धुएं से ब्लॉक हो गया। इमारत के अंदर फंसे लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से हाथ हिलाकर मदद की गुहार लगाने लगे।

इस भीषण और डरावने मंजर के बीच जब प्रशासनिक मदद और दमकल की गाड़ियां संकरी गलियों के ट्रैफिक को पार करते हुए मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, तब स्थानीय स्तर पर कुछ असाधारण वीरों का उदय हुआ। पास ही रहने वाले वसीम राजा और उनके साथी मोहम्मद शोएब ने बिना एक पल गंवाए घटना की गंभीरता को समझा और अपनी जान की परवाह न करते हुए जलती हुई इमारत की तरफ दौड़ पड़े। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि कोई भी सामान्य व्यक्ति उस इमारत के पास जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, लेकिन इन दोनों युवाओं ने इंसानियत का फर्ज सबसे ऊपर रखा। उन्होंने मौके पर मौजूद अन्य स्थानीय दुकानदारों और निवासियों को एकजुट किया और तुरंत एक सुरक्षा घेरा तैयार करने में जुट गए, जिसने बाद में एक बड़े जीवन रक्षक अभियान का रूप ले लिया।

जलती हुई इमारत की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे, दम घुटने और झुलसने के डर से खिड़कियों से नीचे कूदने की तैयारी कर रहे थे। स्थिति को भांपते हुए वसीम राजा ने तुरंत पास ही मौजूद गद्दों की एक दुकान से सारे गद्दे और बिस्तर बाहर निकलवाए और उन्हें नीचे सड़क पर एक के बाद एक बिछा दिया। उन्होंने ऊपर फंसे लोगों को हौसला दिया और चिल्लाकर कहा कि वे नीचे बिछे गद्दों पर कूदें ताकि उनकी जान बच सके। देखते ही देखते लगभग नौ लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए उन खिड़कियों से नीचे छलांग लगाई, जिन्हें नीचे मौजूद स्थानीय युवाओं ने सुरक्षित रूप से संभाल लिया। कांच के टूटे टुकड़ों और मलबे के बीच काम करते हुए वसीम और उनके साथियों के पैरों में चोटें भी आईं, लेकिन उनका हौसला डिगा नहीं। राहत और बचाव कार्य के दौरान जब स्वयंसेवक इमारत के अंदर दाखिल हुए, तो अंदर का नजारा देखकर सबकी रूह कांप गई। पूरी इमारत के कमरों में केवल राख और सुलगता हुआ मलबा दिखाई दे रहा था। इस आपदा के दौरान सबसे दर्दनाक दृश्य तब देखने को मिला जब एक कमरे के वाशरूम में एक विदेशी दंपत्ति मृत अवस्था में पाया गया, जहां पति अपनी पत्नी को सुरक्षित रखने की कोशिश में उसे गले लगाए हुए अंतिम सांस ले चुका था।

इसी बचाव अभियान के समानांतर मोहम्मद शोएब, जिनके पास पहले से ही अग्नि सुरक्षा आपातकालीन प्रशिक्षण का अनुभव था, ने एक और मोर्चे पर कमान संभाल रखी थी। जब आग पर आंशिक रूप से काबू पाया गया और इमारत के पिछले हिस्से के कुछ रास्तों से अंदर जाने का मौका मिला, तो शोएब सुरक्षा उपकरणों के बिना ही धुएं से भरे कमरों में दाखिल हो गए। उन्होंने देखा कि कई लोग बेहोश पड़े थे और उनकी सांसें रुकने की कगार पर थीं। शोएब ने सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल मौके पर ही लगभग आठ लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिलेशन (सीपीआर) देना शुरू किया। उनके इस त्वरित प्रयास और प्राथमिक चिकित्सा के कारण तीन लोगों की धड़कनें वापस लौट आईं और उन्हें तुरंत पास के अस्पताल में एम्बुलेंस के जरिए भेजा गया।

जैसे ही इस हादसे की सूचना मिली, दमकल विभाग की करीब तीन दर्जन से अधिक गाड़ियां और स्थानीय पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गए और एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। चूंकि इमारत के मुख्य दरवाजों और आपातकालीन द्वारों पर ताले लटके हुए थे, इसलिए वसीम राजा और दमकलकर्मियों ने लोहे के कटर का इस्तेमाल करके तालों को काटा और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के रास्ते बनाए। पूरी इमारत के सभी शीशे और खिड़कियां पूरी तरह सील थीं, जिसकी वजह से वेंटिलेशन न के बराबर था और अंदर जहरीली गैसें भर चुकी थीं। बचाव दल ने बेहद मुस्तैदी से काम करते हुए हर कमरे और यहां तक कि बेसमेंट की भी सघन तलाशी ली, जहां से कुल 37 लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया।

इस पूरी घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की टीमें दुर्घटना के मुख्य कारणों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जांच में गहराई से जुट गई हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह हादसा संभवतः भूतल पर सीढ़ियों के पास हुए शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ, जहां भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री अवैध रूप से स्टोर की गई थी। इसके साथ ही यह भी पता चला है कि इमारत के मालिकों के पास आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं था और वे स्वीकृत नियमों से कहीं अधिक क्षमता में इसका व्यावसायिक संचालन कर रहे थे। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित संपत्ति के सह-मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य दोषियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की हैं।

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