CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर संसद की स्थायी समिति सख्त, शिक्षा सचिव और बोर्ड अध्यक्ष को किया तलब।

देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संचालन संस्था, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन

Jun 2, 2026 - 12:37
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CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर संसद की स्थायी समिति सख्त, शिक्षा सचिव और बोर्ड अध्यक्ष को किया तलब।
CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर संसद की स्थायी समिति सख्त, शिक्षा सचिव और बोर्ड अध्यक्ष को किया तलब।
  • डिजिटल मूल्यांकन में भारी विसंगतियों और पोर्टल क्रैश होने के बाद बढ़ा विवाद, छात्रों की शिकायतों पर संसदीय पैनल करेगा सीधी सुनवाई
  • तकनीकी खामियों और सुरक्षा दावों की जांच के लिए कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के महानिदेशक भी बैठक में बुलाए गए

देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संचालन संस्था, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 12वीं की परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए पहली बार बड़े पैमाने पर लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली गंभीर प्रशासनिक और विधायी जांच के घेरे में आ गई है। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद से ही देश भर के लाखों छात्रों और अभिभावकों द्वारा डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों, अंक गणना में त्रुटियों और उत्तर पुस्तिकाओं के कथित घालमेल को लेकर लगातार विरोध दर्ज कराया जा रहा था। इस राष्ट्रीय महत्व के विषय और छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे का संज्ञान लेते हुए संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। समिति ने इस पूरी व्यवस्था की खामियों की समीक्षा करने और जवाबदेही तय करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है।

संसदीय कार्यप्रणाली के तहत राज्यसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली इस स्थायी समिति ने जून 2026 के पहले सप्ताह में होने वाली इस विशेष बैठक में केंद्रीय स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष राहुल सिंह को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया है। इसके साथ ही, इस पूरी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तकनीकी बुनियादी ढांचे और सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच करने के लिए देश की मुख्य साइबर सुरक्षा एजेंसी, कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) के महानिदेशक को भी इस बैठक में अनिवार्य रूप से बुलाया गया है। यह कदम यह स्पष्ट करता है कि संसद इस मामले को केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक बड़े तकनीकी और प्रणालियों के ढहने (Systems Collapse) के रूप में देख रही है।

इस बार के परीक्षा परिणामों के बाद देश भर के 17 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के घरों में उस समय हड़कंप मच गया था, जब डिजिटल माध्यम से जांची गई कॉपियों के अंक सामने आए। पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं के तहत जब छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया, तो तकनीकी मोर्चे पर कई चौंकाने वाली और गंभीर खामियां सामने आईं। कई छात्रों ने यह साक्ष्य प्रस्तुत किए कि उनके नाम और रोल नंबर वाले डिजिटल लॉगिन पोर्टल पर जो उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड की गई थीं, वे उनके हस्तलेख (Handwriting) से बिल्कुल मेल नहीं खा रही थीं, यानी एक छात्र की कॉपी किसी दूसरे के खाते में ट्रांसफर हो गई थी। इसके अलावा, बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के गलत मूल्यांकन और कई मुख्य प्रश्नों के उत्तरों को बिना जांचे ही छोड़ दिए जाने जैसी बुनियादी गलतियों ने पूरी ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली की विश्वसनीयता को गंभीर संकट में डाल दिया था। इस सत्र में देश भर से कक्षा 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए करीब 17 लाख छात्रों की कुल 98 लाख से अधिक मुख्य उत्तर पुस्तिकाएं थीं। यदि प्रत्येक उत्तर पुस्तिका को औसतन 40 पन्नों का माना जाए, तो लगभग 40 करोड़ पन्नों का बड़े पैमाने पर डिजिटल स्कैनिंग कार्य किया गया था। इस विशाल डेटा को स्कैन करने और सर्वर पर अपलोड करने के दौरान बरती गई जल्दबाजी और गुणवत्ता नियंत्रण की कमी ही इस पूरे विवाद की सबसे मुख्य और केंद्रीय वजह बनकर सामने आई है।

डिजिटल स्तर पर उपजी इन विसंगतियों के अलावा, परिणाम जारी होने के बाद अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए बनाए गए आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के भी पूरी तरह से क्रैश हो जाने के कारण छात्रों की मानसिक परेशानियां और अधिक बढ़ गई थीं। सर्वर पर अत्यधिक लोड और खराब कोडिंग के कारण यह पोर्टल लगातार डाउन रहा, जिसके चलते हजारों छात्र समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने से वंचित रह गए। इतना ही नहीं, भुगतान प्रणालियों में आई तकनीकी खराबी के कारण कई छात्रों के खातों से प्रति विषय हजारों रुपये की अवैध और अत्यधिक फीस कटने की शिकायतें भी सामने आईं। इस अभूतपूर्व अराजकता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और देश के दो शीर्ष तकनीकी संस्थानों, आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों की एक विशेष तकनीकी फायरफाइटर टीम को पोर्टल को स्थिर करने और डेटाबेस को सुरक्षित करने के काम में तैनात किया गया।

संसदीय समिति की इस महत्वपूर्ण सुनवाई की एक और सबसे अनूठी और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इस चर्चा के दौरान इतिहास में पहली बार पीड़ित छात्र प्रतिनिधियों को भी अपनी बात सीधे सांसदों के सामने रखने का अवसर दिया जा रहा है। समिति के सदस्यों का मानना है कि अधिकारियों के तकनीकी तर्कों को सुनने से पहले उन जमीनी हकीकतों और मानसिक प्रताड़ना को समझना बेहद जरूरी है, जिससे देश के मेधावी छात्र इस परीक्षा परिणाम के बाद गुजर रहे हैं। इसके साथ ही, इस बैठक के एजेंडे में केवल ऑन-स्क्रीन मार्किंग का मुद्दा ही शामिल नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षाओं में लागू की जा रही 'त्रि-भाषा फॉर्मूला' की प्रगति और क्षेत्रीय स्तर पर इसके क्रियान्वयन को लेकर हो रहे प्रशासनिक विरोधों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी।

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