Munger News: मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रसाद खाने के बाद बिगड़ी 35 से अधिक छात्रों की तबीयत, 11 और अस्पताल में भर्ती

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में फूड पॉइजनिंग से 35 से अधिक छात्र बीमार हो गए हैं। ताजा मामले में 11 और छात्रों को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा है।

Sep 19, 2026 - 14:20
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Munger News: मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रसाद खाने के बाद बिगड़ी 35 से अधिक छात्रों की तबीयत, 11 और अस्पताल में भर्ती
  • मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप: बीमार छात्रों की संख्या बढ़ी, स्वास्थ्य विभाग कराएगा प्रसाद के सैंपल की जांच
  • Bihar News: मुंगेर में हॉस्टल छात्रों की तबीयत बिगड़ने से मचा हड़कंप, सदर अस्पताल पहुंचे बीमार छात्र; जांच टीम गठित
  • मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज फूड पॉइजनिंग मामला: विश्वकर्मा पूजा के प्रसाद पर संदेह, प्रशासन ने शुरू की जांच

मुंगेर। बिहार के मुंगेर स्थित राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के चलते छात्र-छात्राओं के बीमार पड़ने का सिलसिला जारी है। ताजा घटनाक्रम में शनिवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद 11 और छात्रों को आनन-फानन में मुंगेर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके साथ ही इस पूरे प्रकरण में बीमार होने वाले कुल विद्यार्थियों की संख्या 35 से अधिक पहुंच चुकी है। अस्पताल में दाखिल अधिकांश छात्रों की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन लगातार नए मामले सामने आने से कॉलेज प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के बीच हड़कंप मच गया है।

प्राथमिक जांच और विद्यार्थियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह समस्या परिसर में आयोजित विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर बांटे गए प्रसाद के सेवन के बाद शुरू हुई। प्रसाद खाने के कुछ ही घंटों के भीतर छात्रों को पेट में तेज मरोड़, जी मिचलाने और निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) जैसी परेशानियां होने लगीं। शुरुआत में कुछ छात्रों ने स्थानीय स्तर पर दवाएं लीं, लेकिन जब तबीयत में सुधार नहीं हुआ और अन्य छात्र भी इसी लक्षण की चपेट में आने लगे, तब उन्हें एंबुलेंस और निजी वाहनों के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया।

  • अस्पताल में आपातकालीन इंतजाम, चिकित्सकों की विशेष टीम तैनात

मुंगेर सदर अस्पताल प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकालीन वार्ड में अतिरिक्त बिस्तरों और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की है। अस्पताल के उपाधीक्षक और वरिष्ठ चिकित्सकों की देखरेख में बीमार छात्रों को लगातार ड्रिप (आईवी फ्लूइड) और एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।

सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि सभी छात्रों में तीव्र गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Acute Gastroenteritis) यानी फूड पॉइजनिंग के स्पष्ट लक्षण मिले हैं। अत्यधिक उल्टी और दस्त के कारण कई छात्रों के शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की भारी कमी हो गई थी। हालांकि, समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप मिलने के कारण किसी भी छात्र की हालत नाजुक नहीं है और वे डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से रिकवर कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एहतियात के तौर पर छात्रों को 24 से 48 घंटे तक निगरानी में रखा जा रहा है।

  • खाद्य सुरक्षा विभाग करेगा प्रसाद और भोजन के नमूनों की जांच

लगातार छात्रों के बीमार पड़ने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त टीम इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास और मेस परिसर का निरीक्षण करने पहुंची है। अधिकारियों ने विश्वकर्मा पूजा के दौरान तैयार किए गए प्रसाद, प्रयुक्त कच्ची सामग्री, मेस के पके हुए भोजन और परिसर में पीने के पानी के स्रोतों के नमूने (सैंपल) एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इन सभी नमूनों को सील कर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में रासायनिक और माइक्रोबायोलॉजिकल जांच के लिए भेजा जाएगा। इस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संक्रमण का मुख्य स्रोत क्या था, क्या प्रसाद में इस्तेमाल किए गए मावे, मेवे या तेल-घी में कोई मिलावट या बासीपन था, या फिर भोजन पकाने और पानी के रखरखाव में कोई स्वच्छता संबंधी भारी चूक हुई थी।

  • हॉस्टल में स्वच्छता और पेयजल को लेकर छात्रों में रोष

इस घटना के बाद कॉलेज के छात्रावासों में रह रहे विद्यार्थियों के बीच गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि कॉलेज परिसर और छात्रावासों में पेयजल व्यवस्था और मेस की स्वच्छता पर लंबे समय से अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा था। कई बार शिकायत के बावजूद पानी की टंकियों की नियमित सफाई नहीं कराई जाती है।

छात्रों का कहना है कि पूजा के दिन वितरित प्रसाद के अलावा मेस में बने भोजन की गुणवत्ता भी संदेह के घेरे में है। कई छात्रों का मानना है कि केवल प्रसाद ही नहीं, बल्कि उस दिन इस्तेमाल किया गया दूषित पेयजल भी संक्रमण फैलने का एक बड़ा कारण हो सकता है। छात्रों ने मांग की है कि कॉलेज प्रशासन हॉस्टल के वाटर प्यूरीफायर और किचन की कार्यप्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • कॉलेज प्रबंधन का पक्ष

कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर उपचाराधीन छात्रों का हालचाल जाना। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के उपचार का पूरा खर्च और व्यवस्था संस्थान द्वारा देखी जा रही है। इसके साथ ही कॉलेज परिसर में भी एक मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है, ताकि यदि किसी अन्य छात्र को हल्का भी संक्रमण महसूस हो तो उसे तुरंत प्राथमिक दवाइयां दी जा सकें।

जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने इंजीनियरिंग कॉलेज के आसपास के क्षेत्रों में भी एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए हैं। सिविल सर्जन कार्यालय ने कहा है कि जब तक प्रयोगशाला की आधिकारिक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं होगा। फिलहाल प्राथमिक ध्यान सभी बीमार विद्यार्थियों के पूर्ण स्वस्थ होने और परिसर में स्वच्छता मानकों को कड़ाई से लागू कराने पर केंद्रित है।

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