उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला: AC से कूलिंग न मिलने पर फुजित्सु जनरल इंडिया को पूरी रकम वापस करने का आदेश
पूर्वी दिल्ली के पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण
- कंपनी को लगा तगड़ा झटका: सेवा में कमी पाए जाने पर रिफंड के साथ-साथ देना होगा भारी-भरकम मुआवजा
- गर्मी में नहीं मिली राहत: बार-बार शिकायत के बाद भी खराबी दूर न करने पर उपभोक्ता अदालत ने कड़ा रुख अपनाया
पूर्वी दिल्ली के पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने एयर कंडीशनर बनाने वाली जानी-मानी कंपनी फुजित्सु जनरल इंडिया को सेवा में गंभीर लापरवाही और कमी का दोषी करार दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित उपभोक्ता को एयर कंडीशनर की खरीद पर खर्च की गई पूरी की पूरी रकम तुरंत वापस करे। उपभोक्ता अदालतों द्वारा इस तरह के कड़े फैसले उन कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश हैं जो महंगे उत्पाद बेचने के बाद ग्राहकों को बेहतर बिक्री बाद सेवाएं (आफ्टर सेल्स सर्विस) देने में आनाकानी करती हैं या तकनीकी खामियों को समय पर दूर करने में पूरी तरह नाकाम साबित होती हैं।
यह पूरा विवाद वैभव सिंह नामक एक उपभोक्ता से जुड़ा हुआ है, जिन्होंने भीषण गर्मी के मौसम से राहत पाने की उम्मीद में एक बेहद महंगा और उच्च क्षमता वाला एयर कंडीशनर खरीदने का फैसला किया था। उन्होंने सत्रह फरवरी दो हजार पच्चीस को कंपनी के एक अधिकृत डीलर के पास जाकर एक लाख चौदह हजार रुपये की मोटी रकम का भुगतान किया और तीन टन का एक स्प्लिट AC खरीदा। इतनी बड़ी धनराशि खर्च करने के पीछे उपभोक्ता का मुख्य उद्देश्य यह था कि उन्हें और उनके परिवार को आने वाले गर्मियों के महीनों में किसी भी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े और उन्हें एक प्रीमियम कूलिंग का अनुभव मिल सके। लेकिन उत्पाद की डिलीवरी होने के बाद से ही उपभोक्ता की परेशानियां शुरू हो गईं और जिसे एक आरामदायक अनुभव होना चाहिए था, वह एक मानसिक प्रताड़ना में बदल गया।
AC की खरीदारी के बाद जब कंपनी के तकनीशियन इसे घर में लगाने यानी इंस्टालेशन के लिए पहुंचे, तो उन्होंने उपभोक्ता के सामने एक नई और अप्रत्याशित समस्या खड़ी कर दी। इंस्टालेशन टीम ने उपभोक्ता को सूचित किया कि इस विशेष तीन टन के भारी-भरकम स्प्लिट AC को घर की किसी सामान्य दीवार पर सीधे तौर पर स्थापित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि दीवार इसका वजन या कंपन झेलने में सक्षम नहीं हो सकती है। इस तकनीकी कारण का हवाला देते हुए कंपनी के कर्मचारियों ने उपभोक्ता को इसे एक अलग और विशेष रूप से तैयार किए गए स्टैंड पर लगाने की सलाह दी। इस अप्रत्याशित परिस्थिति के कारण उपभोक्ता को न चाहते हुए भी अपनी जेब से अतिरिक्त धनराशि खर्च करनी पड़ी, जिसके बाद ही AC को किसी तरह घर में स्थापित किया जा सका। इंस्टालेशन के समय मौसम में काफी ठंडक थी, जिसके कारण उस दौरान एयर कंडीशनर के कूलिंग स्तर और उसकी वास्तविक कार्यप्रणाली की सही तरीके से जांच कर पाना उपभोक्ता के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। यही वजह रही कि शुरुआती दौर में इस उत्पाद के भीतर छिपी हुई तकनीकी खराबी या कूलिंग की अक्षमता पूरी तरह से पकड़ में नहीं आ सकी।
सर्दियों और शुरुआती वसंत का मौसम बीतने के बाद जब मई के महीने में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू किया, तब जाकर इस एयर कंडीशनर की असल हकीकत सामने आई। ग्यारह मई दो हजार पच्चीस को जब उपभोक्ता ने पहली बार इस भारी-भरकम और महंगे AC को चालू किया, तो वह कमरे को पर्याप्त रूप से ठंडा करने में पूरी तरह से विफल रहा। तीन टन की क्षमता होने के बावजूद यह उपकरण एक सामान्य कमरे को भी ठंडी हवा देने में नाकाम साबित हो रहा था। इसके तुरंत बाद उपभोक्ता ने कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर और शिकायत निवारण तंत्र से संपर्क साधा और अठारह मई से लेकर इक्कीस मई के बीच कूलिंग न होने की इस गंभीर समस्या को लेकर लगातार कई बार अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।
उपभोक्ता द्वारा अपनी शिकायत के निवारण के लिए किए गए प्रयासों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कंपनी के हेल्पलाइन नंबरों पर बार-बार फोन किया। उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, सिर्फ अठारह मई को ही उपभोक्ता द्वारा कंपनी को कुल पांच बार फोन किया गया था, और इसके अगले ही दिन यानी उन्नीस मई को उन्होंने समस्या का समाधान न होते देख रिकॉर्ड ग्यारह बार कॉल करके कंपनी को अपनी परेशानी से अवगत कराया। इतनी बड़ी संख्या में संपर्क किए जाने और लगातार मिन्नतें करने के बावजूद कंपनी के सेवा नेटवर्क ने इस खराबी को दूर करने में कोई तत्परता नहीं दिखाई। कंपनी के तकनीशियन आए जरूर, लेकिन वे इस तकनीकी खराबी को पूरी तरह से ठीक करने या AC से सामान्य कूलिंग सुनिश्चित कराने में नाकाम रहे।
जब कंपनी स्तर पर बार-बार प्रयास करने के बाद भी कोई ठोस परिणाम नहीं निकला और उपभोक्ता को तपती गर्मी में बिना AC के रहने पर मजबूर होना पड़ा, तो उन्होंने न्याय के लिए पूर्वी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामले की पूरी और विस्तृत सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि यह एयर कंडीशनर अपने सबसे बुनियादी और मूल उद्देश्य, यानी कमरे को कूलिंग प्रदान करने में ही पूरी तरह विफल रहा है। आयोग ने इस बात पर विशेष रूप से ध्यान दिया कि उपभोक्ता द्वारा कई बार शिकायत दर्ज कराने और कंपनी के मैकेनिकों द्वारा बार-बार सर्विसिंग या जांच के नाम पर औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रही, जो कि कानूनन सेवा में गंभीर कमी के दायरे में आता है।
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