‘चुन्नू-मुन्नू अफसर नहीं हूं मैं’, गुरुग्राम के शराब ठेके पर डीटीपी का वीडियो वायरल, सरकारी रसूख और बदसलूकी पर मचा भारी बवाल

हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासनिक गरिमा को तार-तार करने वाला मामला सामने

Jun 10, 2026 - 12:42
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‘चुन्नू-मुन्नू अफसर नहीं हूं मैं’, गुरुग्राम के शराब ठेके पर डीटीपी का वीडियो वायरल, सरकारी रसूख और बदसलूकी पर मचा भारी बवाल
‘चुन्नू-मुन्नू अफसर नहीं हूं मैं’, गुरुग्राम के शराब ठेके पर डीटीपी का वीडियो वायरल, सरकारी रसूख और बदसलूकी पर मचा भारी बवाल
  • शराब दुकान के कारिंदों को सरेआम धमकाते नजर आए नगर योजनाकार, वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में मची खलबली, जांच के आदेश
  • गुरुग्राम में अधिकारी की दबंगई का मामला गरमाया, नियमों का हवाला देकर ठेका बंद कराने की धमकी देने वाले अफसर की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम से एक बेहद चौंकाने वाला और प्रशासनिक गरिमा को तार-तार करने वाला मामला सामने आया है। यहां के जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) का एक वीडियो सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसने पूरे शहर के प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है। इस वीडियो में सरकारी पद पर बैठे अधिकारी एक शराब के ठेके पर जाकर वहां मौजूद कर्मचारियों के साथ बेहद आक्रामक और अमर्यादित भाषा में बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो के सामने आते ही स्थानीय निवासियों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक में इस बात को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठे लोक सेवक का ऐसा आचरण न्यायसंगत ठहराया जा सकता है। इस पूरे प्रकरण ने सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनके बातचीत के तौर-तरीकों को एक बार फिर से विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है।

इस वायरल वीडियो की पृष्ठभूमि गुरुग्राम के एक नामचीन इलाके में स्थित शराब के ठेके से जुड़ी बताई जा रही है, जहां जिला नगर योजनाकार अचानक अपने कुछ सहयोगियों के साथ निरीक्षण करने या किसी शिकायत के सिलसिले में पहुंचे थे। वीडियो की शुरुआत में ही अधिकारी का पारा बेहद चढ़ा हुआ नजर आता है और वे वहां काउंटर पर तैनात कर्मचारियों पर चिल्लाते हुए दिखाई देते हैं। वे कर्मचारियों को सीधे तौर पर यह कहते सुने जा रहे हैं कि वे कोई 'चुन्नू-मुन्नू' स्तर के छोटे-मोटे अधिकारी नहीं हैं, बल्कि पूरे जिले के नगर नियोजन की कमान संभालने वाले डीटीपी हैं। उनके इस बयान और बात करने के लहजे से साफ झलक रहा था कि वे अपने पद और प्रशासनिक ताकत का प्रभाव दिखाकर वहां मौजूद कर्मचारियों को डराने और दबाने का प्रयास कर रहे थे।

वीडियो के अगले हिस्से में विवाद और ज्यादा बढ़ता हुआ दिखाई देता है जब अधिकारी शराब ठेके के संचालकों और कर्मचारियों को सीधे तौर पर दुकान बंद कराने की धमकी देने लगते हैं। वे वहां मौजूद दस्तावेजों और लाइसेंस की वैधता पर सवाल उठाते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। अधिकारी का कहना था कि नियमों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जिस तरह से वे अपनी बात रख रहे थे, उसमें कानून के अनुपालन से ज्यादा व्यक्तिगत अहंकार और धौंस जमाने की कोशिश साफ नजर आ रही थी। शराब दुकान के कर्मचारी बेहद सहमे हुए और हाथ जोड़कर अधिकारी को शांत करने का प्रयास करते दिख रहे हैं, लेकिन अधिकारी का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था।

प्रशासनिक शिष्टाचार और मर्यादा का सवाल

किसी भी लोक सेवक से यह अपेक्षा की जाती है कि वह संकट या विवाद की स्थिति में भी संयम और शालीनता का परिचय दे। कानून का पालन कराने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं, न कि सरेआम किसी को धमकाना या अपने पद का रौब गालिब करना। यह घटना प्रशासनिक शिष्टाचार के पतन का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने चुपके से इस पूरी बहस और बदसलूकी का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जिसके बाद इसे विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर साझा कर दिया गया। देखते ही देखते यह वीडियो जंगल की आग की तरह फैल गया और शहर के हर हिस्से में इसी बात की चर्चा होने लगी। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने इस वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि अगर कोई अवैध निर्माण या नियमों का उल्लंघन था भी, तो उसके लिए आधिकारिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए था या कानून के दायरे में रहकर सीलिंग की कार्रवाई की जानी चाहिए थी। इस तरह सरेआम सड़क पर खड़े होकर 'चुन्नू-मुन्नू अफसर नहीं हूं मैं' जैसी भाषा का प्रयोग करना किसी भी तरह से एक वरिष्ठ श्रेणी के अधिकारी को शोभा नहीं देता है।

मामले के तूल पकड़ने और चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद गुरुग्राम के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन के उच्च सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले की अंदरूनी जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित डीटीपी से इस अमर्यादित व्यवहार को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि अधिकारी वहां किस आधिकारिक शिकायत या आदेश के तहत गए थे और क्या उनके पास वहां इस तरह की कार्रवाई करने का कोई लिखित अधिकार था। इस घटना ने जिला प्रशासन की छवि को भी काफी नुकसान पहुंचाया है, जिसके कारण उच्च अधिकारी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दे रहे हैं।

शराब ठेके के प्रबंधन और संचालकों की तरफ से भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी गई है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनके पास आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज और अनुमतियां मौजूद हैं। उनका कहना है कि अधिकारी बिना किसी पूर्व नोटिस या लिखित आदेश के उनकी दुकान पर आए और आते ही गाली-गलौज और धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करने लगे। दुकानदारों का आरोप है कि इस तरह के व्यवहार से उनके व्यापार को नुकसान पहुंचता है और कर्मचारियों के मन में डर का माहौल पैदा होता है। उन्होंने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य के गृह मंत्री तक भेजने की बात कही है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।

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