Trending News: 'हिंदू शरणार्थी नोटिस से न डरें, CAA के तहत करें आवेदन, मिलेगी नागरिकता', पश्चिम बंगाल में अमित शाह का संबोधन। 

केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित....

Jun 2, 2025 - 11:39
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Trending News: 'हिंदू शरणार्थी नोटिस से न डरें, CAA के तहत करें आवेदन, मिलेगी नागरिकता', पश्चिम बंगाल में अमित शाह का संबोधन। 

कोलकाता : केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने रविवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आयोजित ‘विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन’ में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर घुसपैठ, भ्रष्टाचार, चुनावी हिंसा, और तुष्टीकरण की नीतियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शाह ने हिंदू शरणार्थियों को आश्वस्त करते हुए कहा, “मुझे बताया गया है कि बंगाल में हिंदू शरणार्थियों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है। ऐसे शरणार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है। बस CAA का आवेदन करें, और हम सुनिश्चित करेंगे कि आपको भारतीय नागरिकता मिले।” यह बयान नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत पश्चिम बंगाल में रह रहे हिंदू शरणार्थियों, खासकर बांग्लादेश से आए मतुआ और नामशूद्र समुदायों, के लिए एक बड़ा आश्वासन माना जा रहा है।

  • कोलकाता में विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन

अमित शाह का यह बयान कोलकाता में आयोजित बीजेपी के ‘विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन’ के दौरान आया, जो पश्चिम बंगाल में पार्टी की रणनीति को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में शाह ने टीएमसी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने मां, माटी, मानुष का नारा देकर सत्ता हासिल की, लेकिन आज बंगाल को घुसपैठ, भ्रष्टाचार, स्त्रियों पर अत्याचार, अपराध, बम धमाकों, और हिंदुओं के साथ दुराचार का केंद्र बना दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में हिंदुओं का पलायन रोकना, घुसपैठ पर नियंत्रण करना, और भ्रष्टाचार को खत्म करना बीजेपी की प्राथमिकता है। शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, “वोट बैंक के लिए ममता बनर्जी ने पतन की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। हिम्मत हो तो हिंसा के बगैर चुनाव कराकर देखें, आपकी जमानत जब्त हो जाएगी।” उन्होंने दावा किया कि बीजेपी बंगाल में एक मजबूत सरकार बनाएगी, जो घुसपैठ और भ्रष्टाचार को रोकेगी।

  • CAA और हिंदू शरणार्थियों का मुद्दा

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), जिसे दिसंबर 2019 में संसद ने पारित किया और 11 मार्च 2024 को अधिसूचित किया गया, भारत में रह रहे गैर-मुस्लिम शरणार्थियों, खासकर पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, और ईसाई समुदायों के लोगों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है। इस कानून के तहत 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए इन समुदायों के शरणार्थी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां शरणार्थी अपने दस्तावेज जमा कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी, खासकर मतुआ और नामशूद्र समुदाय, इस कानून के प्रमुख लाभार्थी माने जा रहे हैं। ये समुदाय दशकों से बंगाल में रह रहे हैं, लेकिन कई को अभी तक पूर्ण नागरिकता का दर्जा नहीं मिला है। शाह ने अपने भाषण में इन शरणार्थियों को नोटिस मिलने की बात का जिक्र किया और कहा कि ममता बनर्जी सरकार उन्हें वोटर लिस्ट से हटाने की धमकी दे रही है। उन्होंने आश्वासन दिया, “CAA के तहत हर हिंदू शरणार्थी को नागरिकता मिलेगी। नोटिस से डरने की जरूरत नहीं है। बस आवेदन करें, बीजेपी आपकी मदद करेगी।”

  • ममता बनर्जी और टीएमसी का विरोध

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने CAA का शुरू से ही विरोध किया है। ममता ने इसे “चुनावी हथकंडा” और “संविधान के खिलाफ” करार दिया है। उन्होंने कई बार कहा है कि वह बंगाल में CAA और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लागू नहीं होने देंगी। 2024 में CAA के अधिसूचित होने के बाद, ममता ने इसे “जाल” बताया और दावा किया कि जो लोग इसके तहत आवेदन करेंगे, वे “अवैध अप्रवासी” घोषित हो सकते हैं, जिससे उनकी संपत्ति और नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। ममता ने यह भी कहा कि अगर CAA के जरिए किसी की नागरिकता छीनी गई, तो उनकी सरकार इसका कड़ा विरोध करेगी। उन्होंने बंगाल की जनता को आश्वासन दिया कि वह किसी को भी नागरिकता से वंचित नहीं होने देंगी। ममता का यह रुख बंगाल की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि बीजेपी इस मुद्दे को हिंदू शरणार्थियों, खासकर मतुआ समुदाय, के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।

CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 200 से अधिक याचिकाएं दायर हैं, जिनमें इसे असंवैधानिक और धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया गया है। हालांकि, 21 अक्टूबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने CAA के तहत किसी भी कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, केंद्र सरकार ने CAA के तहत आवेदन प्रक्रिया को जारी रखा है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में CAA के प्रावधानों का हवाला देते हुए एक हिंदू शरणार्थी, हरिनंद दत्ता, को राहत दी थी, जिनकी नौकरी पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी नागरिकता पर सवाल उठाकर छीन ली थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दत्ता को उनकी नौकरी से मिलने वाले सभी लाभ प्रदान किए जाएं। यह फैसला CAA के महत्व को रेखांकित करता है और हिंदू शरणार्थियों के लिए इसके लाभ को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों की एक बड़ी आबादी रहती है, जिनमें से कई 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत आए थे। मतुआ समुदाय, जो नामशूद्र समुदाय का हिस्सा है, ने 2019 और 2021 के चुनावों में CAA के समर्थन में बीजेपी को वोट दिया था। यह समुदाय बंगाल की कई लोकसभा और विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। हालांकि, ममता बनर्जी सरकार का दावा है कि उसने पहले ही इन शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान कर दी है, और CAA का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ लेना है। ममता ने बीएसएफ द्वारा जारी पहचान पत्रों को स्वीकार न करने की सलाह दी है, यह कहते हुए कि यह NRC का हिस्सा हो सकता है।

शाह के बयान के बाद सोशल मीडिया, खासकर एक्स पर, इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने शाह के बयान का स्वागत किया और इसे हिंदू शरणार्थियों के लिए राहत भरा कदम बताया। एक यूजर ने लिखा, “अमित शाह ने बंगाल में हिंदू शरणार्थियों को नया जीवन दिया। CAA के जरिए उनकी नागरिकता सुनिश्चित होगी।” दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने इसे बीजेपी का “चुनावी स्टंट” करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ वोट बैंक  की राजनीति है। बंगाल में हिंदुओं को डराने का काम बीजेपी खुद कर रही है।”

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CAA पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों और आगामी विधानसभा चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। बीजेपी इसे हिंदू शरणार्थियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि टीएमसी इसे धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बता रही है। शाह का यह बयान बंगाल की राजनीति को और गर्मा सकता है, क्योंकि यह मतुआ और नामशूद्र समुदायों को सीधे तौर पर संबोधित करता है। अमित शाह का कोलकाता में दिया गया भाषण न केवल हिंदू शरणार्थियों के लिए एक आश्वासन है, बल्कि यह बंगाल की राजनीति में बीजेपी की रणनीति को भी दर्शाता है। CAA के तहत नागरिकता का वादा और ममता बनर्जी सरकार पर घुसपैठ, भ्रष्टाचार, और तुष्टीकरण के आरोप लगाकर शाह ने बंगाल में बीजेपी की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की है।

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