बागपत में 'आई लव मुहम्मद' बाइक स्टिकर पर चालान विवाद: ट्रैफिक नियमों का हवाला देते हुए पुलिस ने की कार्रवाई, सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश। 

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक मुस्लिम युवक को उसकी बाइक पर 'आई लव मुहम्मद' स्टिकर लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने चालान काट दिया। यह घटना 6 अक्टूबर 2025 को हुई, जब

Oct 8, 2025 - 13:40
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बागपत में 'आई लव मुहम्मद' बाइक स्टिकर पर चालान विवाद: ट्रैफिक नियमों का हवाला देते हुए पुलिस ने की कार्रवाई, सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश। 
बागपत में 'आई लव मुहम्मद' बाइक स्टिकर पर चालान विवाद: ट्रैफिक नियमों का हवाला देते हुए पुलिस ने की कार्रवाई, सोशल मीडिया पर भड़का आक्रोश। 

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक मुस्लिम युवक को उसकी बाइक पर 'आई लव मुहम्मद' स्टिकर लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने चालान काट दिया। यह घटना 6 अक्टूबर 2025 को हुई, जब युवक अपनी बाइक चला रहा था। पुलिस ने स्टिकर को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की, लेकिन बाद में स्पष्ट किया कि चालान ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के कारण था। युवक ने पूरा वाकया मोबाइल पर रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो तेजी से वायरल हो गया, जिससे धार्मिक संवेदनशीलता और पुलिस की निष्पक्षता पर बहस छिड़ गई।

घटना बागपत शहर के एक व्यस्त चौराहे पर घटी। युवक, जिसका नाम अब्दुल बताया जा रहा है, अपनी बाइक नंबर यूपी17डब्ल्यू3098 पर सवार था। ट्रैफिक पुलिस ने उसे रोका और स्टिकर की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह शब्द आपत्तिजनक है। वीडियो में पुलिसकर्मी साफ सुनाई दे रहा है, 'यह शब्द आपत्तिजनक है। जो चाहे वीडियो दिखा दे।' युवक ने इसका विरोध किया और पूछा कि क्या गाड़ियों पर 'जय श्री राम' जैसे स्टिकर पर कोई कार्रवाई होती है। लेकिन पुलिस ने चालान जारी कर दिया, जिसमें 7500 रुपये का जुर्माना लगाया गया। युवक ने वीडियो में कहा कि वह पैगंबर मुहम्मद के प्रति अपना सम्मान जताने के लिए स्टिकर लगाए थे, न कि किसी विवाद के लिए।

वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड होते ही हजारों व्यूज बटोर लिया। कई यूजर्स ने इसे धार्मिक भेदभाव का मामला बताते हुए पुलिस की आलोचना की। एक पोस्ट में लिखा गया कि हिंदू धार्मिक स्टिकरों पर कोई सवाल नहीं उठता, लेकिन मुस्लिम भावनाओं को दबाया जा रहा है। दूसरे यूजर्स ने कहा कि ट्रैफिक नियम सबके लिए समान होने चाहिए। कुछ ने तो मुख्यमंत्री कार्यालय और यूपी पुलिस को टैग कर न्याय की मांग की। हैशटैग जैसे आईलवमुहम्मद और बागपतपुलिस ट्रेंड करने लगे। विपक्षी दलों ने भी इसे उठाया, कहा कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव दर्शाता है।

बागपत पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद स्पष्टीकरण जारी किया। एसएसपी के अनुसार, चालान स्टिकर की वजह से नहीं, बल्कि तीन ट्रैफिक उल्लंघनों के कारण काटा गया। पहला, मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 179(1) के तहत ट्रैफिक नियम तोड़ना। दूसरा, धारा 122/126 के साथ 177 के तहत गलत जगह पार्किंग। तीसरा, धारा 192 और सीएमवी नियम 1989 के नियम 51 के तहत नंबर प्लेट ठीक से न लगाना। पुलिस ने कहा कि वीडियो की जांच चल रही है और संबंधित अधिकारी की ड्यूटी की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि कोई धार्मिक भेदभाव नहीं है, बल्कि नियमों का पालन कराया जा रहा है।

यह घटना 'आई लव मुहम्मद' कैंपेन के संदर्भ में और संवेदनशील हो जाती है। यह कैंपेन सितंबर 2025 में शुरू हुआ, जब कुछ मुस्लिम संगठनों ने पैगंबर मुहम्मद के प्रति प्रेम व्यक्त करने के लिए पोस्टर और स्टिकर लगाए। लेकिन कई जगहों पर इससे तनाव फैला। यूपी में ही बरेली, मऊ, उन्नाव, कौशांबी और बागपत जैसे जिलों में हिंसा हुई। एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में 21 एफआईआर दर्ज हुईं, जिनमें 1324 मुसलमान नामजद। यूपी में 16 एफआईआर, 1000 से ज्यादा आरोपी और 38 गिरफ्तारियां। बागपत में ही 150 आरोपी और दो गिरफ्तार। उन्नाव में आठ मामले, 85 आरोपी और पांच गिरफ्तार। कौशांबी में 24 आरोपी और तीन गिरफ्तार।

कैंपेन के खिलाफ हिंदू संगठनों ने 'आई लव महादेव' और 'आई लव महाकाल' जैसे बैनर लगाए, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ा। बरेली में पथराव और लाठीचार्ज हुआ। मऊ में भी झड़पें। गांधीनगर में भी तनाव। मुंबई के कुर्ला में तो अज्ञात लोगों ने जबरन गाड़ियों पर स्टिकर चिपकाए, जिसका वीडियो वायरल हुआ। मुस्लिम संगठनों जैसे रजा अकादमी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर यूपी की कार्रवाइयों को भेदभावपूर्ण बताया। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सभी धर्मों के प्रति सम्मान जरूरी है।

ट्रैफिक नियमों के लिहाज से, मोटर व्हीकल एक्ट में धारा 177 के तहत सामान्य उल्लंघन पर 500 रुपये तक जुर्माना। लेकिन धारा 192 में नंबर प्लेट संबंधी गलती पर 5000 रुपये। यूपी में ई-चालान सिस्टम से जुर्माना ऑनलाइन चुकाया जा सकता है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अगस्त 2025 में 2300 चालान कटे, जिनमें जाति-धर्म वाले स्टिकर भी शामिल। लेकिन बागपत मामले में स्टिकर को आपत्तिजनक कहना विवाद का कारण बना। विशेषज्ञ कहते हैं कि सार्वजनिक जगहों पर धार्मिक संदेशों से तनाव बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी।

यह घटना समाज में धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी समानता पर सवाल उठाती है। एक ओर जहां संविधान अनुच्छेद 25 धार्मिक अभिव्यक्ति की गारंटी देता है, वहीं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी। युवा अब्दुल ने कहा कि वह सिर्फ अपना विश्वास जता रहे थे, न कि किसी को ठेस पहुंचा रहे। लेकिन पुलिस का रुख सख्त था। सोशल मीडिया पर बहस जारी है। कुछ इसे पुलिस की सतर्कता बता रहे, तो कुछ भेदभाव। विपक्ष ने विधानसभा में मामला उठाने की बात कही।

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