135 फर्जी कंपनियों से 734 करोड़ का GST घोटाला: ED ने जब्त की 15.41 करोड़ की 10 संपत्तियां
यह घोटाला 2023 में शुरू हुआ जब जीएसटी खुफिया महानिदेशालय जमशेदपुर ने कई शिकायतें दर्ज कीं। इन शिकायतों में शिव कुमार देवड़ा, अमित गुप्ता, सुमित गुप्ता और अमित अग्रवाल उर्फ विक्की
भारत में कर प्रणाली को कमजोर करने वाले बड़े घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने एक विशाल जीएसटी धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में 135 फर्जी कंपनियों के जरिए 734 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट तैयार किया गया। एजेंसी ने कोलकाता और हावड़ा में स्थित 10 अचल संपत्तियों को जब्त कर लिया, जिनकी कीमत 15.41 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई। घोटाले के मुख्य आरोपी अमित गुप्ता और उसके साथी हैं। जांच से पता चला कि यह गिरोह झारखंड, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में सक्रिय था। बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई के फर्जी बिल जारी करके कर चोरी की गई। यह मामला जीएसटी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। केंद्र सरकार ने ऐसे अपराधों पर सख्ती बढ़ा दी है।
यह घोटाला 2023 में शुरू हुआ जब जीएसटी खुफिया महानिदेशालय जमशेदपुर ने कई शिकायतें दर्ज कीं। इन शिकायतों में शिव कुमार देवड़ा, अमित गुप्ता, सुमित गुप्ता और अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया के नाम आए। इन लोगों ने एक सुनियोजित गिरोह बनाया। उन्होंने कागजों पर 135 शेल कंपनियां खड़ी कीं। ये कंपनियां वास्तव में अस्तित्व में नहीं थीं। इनके नाम पर 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के फर्जी जीएसटी इनवॉइस जारी किए गए। इन इनवॉइस के आधार पर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी का दावा किया गया। कुल 734 करोड़ रुपये का यह आईटीसी अवैध था। गिरोह ने इस फर्जी क्रेडिट को कमीशन पर दूसरे व्यापारियों को बेचा। वे अपनी जीएसटी देनदारी से बचने के लिए इसका इस्तेमाल करते। गिरोह को 67 करोड़ रुपये का कमीशन मिला। इस पैसे से कोलकाता और हावड़ा में संपत्तियां खरीदी गईं।
प्रवर्तन निदेशालय ने मई 2025 में पहली बार छापे मारे। रांची, जमशेदपुर और कोलकाता में तलाशी ली गई। जांच में फर्जी दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत मिले। जुलाई 2025 में एजेंसी ने झारखंड की एक विशेष अदालत में चारों मुख्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दायर की। अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। अगस्त 2025 में झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 12 जगहों पर नई तलाशी हुई। इन छापों से और सबूत जुटाए गए। 29 सितंबर 2025 को एजेंसी ने अमित गुप्ता की 10 संपत्तियां जब्त कीं। ये संपत्तियां फ्लैट और प्लॉट हैं। पहले ही शिव कुमार देवड़ा की 5.29 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच हो चुकी हैं। नकदी में 8.98 लाख रुपये जब्त हुए और 62.90 लाख रुपये के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए। कुल मिलाकर घोटाले की राशि का बड़ा हिस्सा पकड़ा जा चुका है।
घोटाले का तरीका बेहद चालाकी भरा था। फर्जी कंपनियों के निदेशक भी कागजों पर ही बनाए गए थे। असल में कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं होती थी। इनवॉइस जारी करने के बाद पैसा बैंक खातों में घुमाया जाता। लेयरिंग के जरिए काले धन को सफेद किया जाता। दूसरे व्यापारी फर्जी आईटीसी खरीदकर कर बचाते। इससे सरकार को भारी नुकसान हुआ। जीएसटी से सालाना 7 लाख करोड़ रुपये का राजस्व आता है। ऐसे घोटाले इसे कमजोर करते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए आधार-लिंक्ड सत्यापन जरूरी है। एजेंसी का कहना है कि यह गिरोह मल्टीनेशनल कंपनियों तक पहुंच चुका था। जांच जारी है। और आरोपी सामने आ सकते हैं।
इस मामले ने पूरे देश में हलचल मचा दी। सोशल मीडिया पर लोग सरकार की तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि एड ने सही समय पर कार्रवाई की। दूसरे ने कहा कि जीएसटी सिस्टम को और मजबूत बनाना चाहिए। व्यापारियों के संगठन चिंतित हैं। वे कहते हैं कि ईमानदार कारोबारियों को परेशानी न हो। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि फर्जीवाड़ा रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग बढ़े। केंद्र सरकार ने जीएसटी नेटवर्क को अपग्रेड करने का ऐलान किया। अब फर्जी इनवॉइस की तुरंत पहचान होगी। झारखंड सरकार ने भी सहयोग का वादा किया। राज्य में ऐसे कई छोटे घोटाले पकड़े गए हैं। लेकिन यह मामला सबसे बड़ा है।
आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई। शिव कुमार देवड़ा को पहले ही अरेस्ट किया गया। अमित गुप्ता फरार है। लेकिन उसकी संपत्तियां जब्त होने से दबाव बढ़ेगा। सुमित गुप्ता और विक्की भालोटिया की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी ने कहा कि गिरोह ने असुरक्षित वित्तीय चैनलों का इस्तेमाल किया। पैसा हवाला और क्रिप्टो के जरिए भी घुमाया गया। रांची जोनल ऑफिस इस केस को लीड कर रहा। जमशेदपुर डीजीजीआई ने शुरुआती शिकायत दर्ज की। अब पीएमएलए के तहत आगे कार्रवाई होगी। अदालत में चार्जशीट दाखिल हो चुकी। ट्रायल जल्द शुरू होगा।
यह घोटाला जीएसटी लागू होने के बाद के बड़े मामलों में शुमार है। 2017 से अब तक कई ऐसे स्कैम सामने आए। कानपुर, पंजाब और ओडिशा में छोटे स्तर के फर्जीवाड़े पकड़े गए। लेकिन 734 करोड़ का यह स्केल नया है। इससे अर्थव्यवस्था को झटका लगा। सरकार का राजस्व कम हुआ। ईमानदार करदाताओं पर बोझ बढ़ा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से इनवॉइस चेकिंग होनी चाहिए। एजेंसी ने 2025 में 200 से ज्यादा ऐसे केस दर्ज किए। संपत्ति जब्ती से 1000 करोड़ से ऊपर की रिकवरी हुई। यह सकारात्मक कदम है। लेकिन रोकथाम जरूरी।
फिलहाल, जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। और सबूत जुटाए जा रहे। गिरोह के नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश हो रही। अगर सफल रहे तो अन्य राज्यों में भी छापे पड़ सकते। जनता को सलाह दी जा रही कि फर्जी इनवॉइस से सावधान रहें। जीएसटी पोर्टल पर वेरीफाई करें। यह मामला देश की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा। सरकार ने वादा किया कि दोषियों को सजा मिलेगी। उम्मीद है कि इससे जीएसटी सिस्टम मजबूत बनेगा। व्यापार सुगम होगा। कर चोरी रुकेगी।
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