ईमेल स्पूफिंग से बचाव के लिए जानें असली और नकली ईमेल की पहचान के प्रमुख तरीके और संकेत।
ईमेल स्पूफिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें साइबर अपराधी किसी विश्वसनीय व्यक्ति, कंपनी या संस्थान के नाम से फर्जी ईमेल भेजते हैं। इसमें
- स्पूफिंग ईमेल को पहचानने का सबसे आसान तरीका, प्रेषक पता और हेडर जांच से बचें साइबर धोखाधड़ी से
- फिशिंग और स्पूफिंग ईमेल की पहचान कैसे करें, 2026 में इन संकेतों से तुरंत समझें नकली मैसेज
ईमेल स्पूफिंग एक ऐसी तकनीक है जिसमें साइबर अपराधी किसी विश्वसनीय व्यक्ति, कंपनी या संस्थान के नाम से फर्जी ईमेल भेजते हैं। इसमें प्रेषक का पता और हेडर बदल दिया जाता है ताकि ईमेल असली लगे। यह मुख्य रूप से फिशिंग हमलों का हिस्सा होता है जहां प्राप्तकर्ता को लिंक पर क्लिक करने, जानकारी देने या अटैचमेंट खोलने के लिए उकसाया जाता है। स्पूफिंग से व्यक्तिगत जानकारी, पैसे या पहुंच चुराई जा सकती है। ईमेल स्पूफिंग की पहचान के लिए कई संकेत और तरीके हैं जिनका पालन करके नकली ईमेल को आसानी से अलग किया जा सकता है।
सबसे पहले प्रेषक के ईमेल पते की जांच करें। ईमेल में दिखने वाला नाम या डिस्प्ले नेम असली लग सकता है लेकिन वास्तविक ईमेल पता अलग होता है। उदाहरण के लिए कोई ईमेल अमेजन सपोर्ट के नाम से आता है लेकिन पता amazon-support@gmail.com होता है जबकि असली अमेजन का पता support@amazon.com होता है। डिस्प्ले नेम को कोई भी सेट कर सकता है लेकिन असली पता जांचना जरूरी है। प्रेषक के नाम पर होवर करके या क्लिक करके पूरा पता देखें। यदि पता कंपनी के आधिकारिक डोमेन से मेल नहीं खाता तो यह संदिग्ध है।
ईमेल पता में छोटी-छोटी गलतियां या बदलाव आम होते हैं। जैसे micros0ft.com जहां o की जगह 0 है या rnicrosoft.com जहां m की जगह rn है। ये टाइपोस्क्वाटिंग कहलाते हैं। वैध कंपनी के डोमेन को ध्यान से पढ़ें और ज्ञात आधिकारिक पता से तुलना करें। यदि पता Gmail, Yahoo या अन्य फ्री सर्विस से है जबकि कंपनी का अपना डोमेन है तो यह फर्जी हो सकता है।
ईमेल में सामान्य अभिवादन जैसे प्रिय ग्राहक, डियर सर/मैडम या हैलो यूजर होना संदिग्ध है। असली कंपनियां आमतौर पर प्राप्तकर्ता के नाम से संबोधित करती हैं। यदि ईमेल में नाम नहीं है तो सावधान रहें।
ईमेल में तत्काल कार्रवाई की मांग या धमकी जैसे आपका खाता सस्पेंड हो जाएगा, तुरंत क्लिक करें या जानकारी अपडेट करें होना एक बड़ा संकेत है। फिशिंग ईमेल डर या जल्दबाजी पैदा करते हैं ताकि प्राप्तकर्ता बिना सोचे कार्रवाई करे। असली कंपनियां ऐसी भाषा का उपयोग नहीं करतीं।
ईमेल में अप्रत्याशित लिंक या अटैचमेंट होना भी संकेत है। लिंक पर होवर करके देखें कि डेस्टिनेशन पता क्या है। यदि लिंक कंपनी के आधिकारिक साइट से अलग है या छोटा URL है तो क्लिक न करें। अटैचमेंट खोलने से पहले पुष्टि करें।
ईमेल की भाषा में व्याकरण की गलतियां, स्पेलिंग मिस्टेक्स या अनप्रोफेशनल तरीका होना आम है। असली संस्थान पेशेवर भाषा का उपयोग करते हैं।
ईमेल हेडर की जांच सबसे विश्वसनीय तरीका है। ईमेल क्लाइंट में शो ओरिजिनल या व्यू सोर्स ऑप्शन से हेडर देखें। हेडर में Received लाइन्स चेक करें कि ईमेल कहां से आया है। असली ईमेल में IP और सर्वर मैच करते हैं।
SPF, DKIM और DMARC ऑथेंटिकेशन चेक करें। हेडर में SPF: Pass होना चाहिए। यदि Fail या Softfail है तो स्पूफिंग की संभावना है। DKIM सिग्नेचर वेरिफाई होता है और DMARC पॉलिसी बताती है। यदि ये फेल हैं तो ईमेल फर्जी है।
कुछ ईमेल क्लाइंट जैसे आउटलुक में यदि सेंडर वेरिफाई नहीं हो पाता तो बैनर दिखाता है। ऐसे ईमेल पर सतर्क रहें। यदि ईमेल किसी ज्ञात संपर्क से है लेकिन संदिग्ध लगे तो अलग चैनल से जैसे फोन या पुराना पता से पुष्टि करें। ईमेल में दिए नंबर पर कॉल न करें। अप्रत्याशित ईमेल जैसे बिलिंग समस्या, अकाउंट होल्ड या अपडेट पेमेंट डिटेल्स के लिए लिंक होना संदिग्ध है। असली कंपनियां पेमेंट जानकारी अपडेट के लिए ईमेल लिंक नहीं भेजतीं।
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