Politics News: प्रियंका गांधी ने गाजा संकट पर फिर उठाई आवाज: 'मानवीय स्तर पर हो रही है भयावह अन्याय'।
कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बार फिर गाजा में चल रहे मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की....
वायनाड : कांग्रेस महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बार फिर गाजा में चल रहे मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शनिवार को अपनी लोकसभा सीट वायनाड के दौरे के दौरान उन्होंने कहा, "मैंने गाजा के बारे में अपनी राय कई बार व्यक्त की है। वहां जो हो रहा है, वह मानवीय स्तर पर और हर स्तर पर बहुत गलत है। मैंने इसे बार-बार कहा है और आज भी यही सोचती हूं।" प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी तब आई जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में गाजा में तत्काल और स्थायी युद्धविराम के लिए प्रस्ताव पर मतदान से खुद को अलग रखा।
- प्रियंका गांधी का बयान
प्रियंका गांधी ने वायनाड में मंन्थवादी नगरपालिका के नए भवन की आधारशिला रखने के दौरान पत्रकारों से बातचीत में गाजा संकट पर अपनी राय दोहराई। उन्होंने कहा, "गाजा में जो हो रहा है, वह न केवल मानवीय दृष्टिकोण से गलत है, बल्कि यह हर नैतिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।" उनकी यह टिप्पणी भारत के संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में स्पेन द्वारा प्रस्तुत एक प्रस्ताव पर मतदान से गैरहाजिर रहने के फैसले के बाद आई। इस प्रस्ताव में गाजा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग की गई थी, जिसे 149 देशों ने समर्थन दिया, 12 ने विरोध किया, और भारत सहित 19 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। प्रियंका ने इस फैसले को "शर्मनाक और निराशाजनक" करार देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, "हमारा देश अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों पर बना है। यह शर्मनाक है कि हम 60,000 लोगों की मौत, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं, और गाजा की पूरी आबादी को कैद और भुखमरी की ओर धकेलने वाले संकट पर चुप हैं।" उन्होंने भारत की औपनिवेशिक-विरोधी विरासत का हवाला देते हुए कहा कि यह फैसला उस विरासत को उलटने वाला है।
- गाजा में मानवीय संकट की स्थिति
गाजा में मानवीय संकट 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजरायल पर हमले के बाद शुरू हुए इजरायली सैन्य अभियान से और गहरा गया। हमास के हमले में 1,200 से अधिक लोग मारे गए और लगभग 250 लोग बंधक बनाए गए। इसके जवाब में इजरायल ने गाजा पर व्यापक हवाई और जमीनी हमले शुरू किए, जिसके परिणामस्वरूप गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 60,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 40% से अधिक बच्चे और महिलाएं हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गाजा की 85% आबादी विस्थापित हो चुकी है, और वहां भोजन, स्वच्छ पानी, दवाइयों और बिजली की भारी कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बताया कि गाजा के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, और कई स्वास्थ्यकर्मी मारे गए हैं। नवंबर 2023 में, अल-शिफा अस्पताल में समय से पहले जन्मे शिशुओं को ऑक्सीजन की कमी के कारण इन्क्यूबेटर से हटाना पड़ा, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि गाजा में 7,00,000 से अधिक बच्चे विस्थापित हैं, और स्वच्छ पानी की कमी के कारण गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गाजा को "बच्चों का कब्रिस्तान" करार दिया है।
- प्रियंका गांधी की लगातार मुखरता
प्रियंका गांधी ने गाजा संकट पर कई बार अपनी आवाज बुलंद की है। दिसंबर 2023 में, उन्होंने गाजा में "निर्दय बमबारी" की निंदा करते हुए कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य के रूप में सही के लिए खड़ा होना चाहिए। उन्होंने 16,000 नागरिकों की मौत, जिसमें 10,000 बच्चे शामिल थे, का हवाला दिया और युद्धविराम की मांग की। फरवरी 2024 में, प्रियंका ने इजरायली कार्रवाइयों को "नरसंहार" करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी की आलोचना की। उन्होंने अस्पतालों पर बमबारी और चिकित्सकों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों का जिक्र किया। मार्च 2025 में, उन्होंने इजरायल के हालिया हवाई हमलों को "ठंडे खून की हत्या" बताया, जिसमें 400 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 130 बच्चे शामिल थे। दिसंबर 2024 में, प्रियंका ने संसद में "फिलिस्तीन" लिखा हुआ एक बैग ले जाकर अपनी एकजुटता दिखाई, जिसने व्यापक चर्चा को जन्म दिया। उन्होंने इसे मानवीय मुद्दा बताया और कहा, "कोई नहीं तय करेगा कि मैं क्या पहनूं।"
- भारत की स्थिति और कांग्रेस की आलोचना
भारत ने गाजा संकट पर संतुलित रुख अपनाया है। उसने हमास के आतंकी हमले की निंदा की है, लेकिन साथ ही इजरायल से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का पालन करने की अपील की है। भारत ने गाजा के लिए 38.5 टन सहायता सामग्री भेजी और दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है। हालांकि, यूएन में भारत का बार-बार मतदान से गैरहाजिर रहना विपक्ष के निशाने पर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "भारत की गैर-संरेखण और नैतिक कूटनीति की परंपरा रही है। 60,000 लोगों की मौत और भयावह मानवीय संकट के बावजूद हमारी चुप्पी निराशाजनक है।" कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने अक्टूबर 2023 में फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन करते हुए युद्धविराम की मांग की थी। गाजा संकट पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया मिश्रित रही है। दक्षिण अफ्रीका ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में इजरायल पर "नरसंहार" का आरोप लगाया, जिसके जवाब में आईसीजे ने इजरायल को नरसंहार रोकने के लिए हर संभव उपाय करने और मानवीय सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। हालांकि, तत्काल युद्धविराम का आदेश नहीं दिया गया। संयुक्त राष्ट्र के कई संगठनों, जैसे यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ, ने गाजा में मानवीय सहायता की कमी पर चेतावनी दी है। जनवरी 2024 में, 15 देशों ने यूएनआरडब्ल्यूए के लिए फंडिंग रोक दी, जिससे सहायता कार्य प्रभावित हुए।
प्रियंका गांधी की टिप्पणियों ने भारत में गाजा संकट पर चर्चा को फिर से जीवंत कर दिया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी मुखरता की सराहना की। ‘एक्स’ पर एक यूजर ने लिखा, "प्रियंका गांधी का साहस प्रेरणादायक है। वह मानवता के लिए खड़ी हैं।" हालांकि, कुछ ने उनकी आलोचना करते हुए इसे "चुनिंदा सक्रियता" करार दिया। उनके बयानों ने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का संतुलित रुख मध्य पूर्व में उसके रणनीतिक हितों को बनाए रखने की कोशिश है, लेकिन यह मानवीय मुद्दों पर उसकी ऐतिहासिक नेतृत्वकारी भूमिका को कमजोर कर सकता है। प्रियंका गांधी वाड्रा ने गाजा में मानवीय संकट पर अपनी लगातार बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की भूमिका और नैतिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है। उनकी टिप्पणियां न केवल गाजा में नागरिकों के दुख को उजागर करती हैं, बल्कि भारत की विदेश नीति में मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने की मांग भी करती हैं। गाजा में बिगड़ती स्थिति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता के बीच, प्रियंका का यह बयान एक बार फिर मानवता और न्याय के लिए आवाज उठाने का आह्वान है।
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