Nepal Tunnel Rescue: नेपाल टनल हादसे में 9 दिन बाद चमत्कार, जानिए कैसे मौत को मात देकर बाहर आए संजय शाह

Nepal Tunnel Rescue: नेपाल में जलविद्युत परियोजना टनल हादसे में 9 दिन बाद संजय शाह को सुरक्षित निकाल लिया गया है। जानिए कैसे उन्होंने टनल के अंदर बिताए खौफनाक दिन।

Sep 5, 2026 - 13:11
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Nepal Tunnel Rescue: नेपाल टनल हादसे में 9 दिन बाद चमत्कार, जानिए कैसे मौत को मात देकर बाहर आए संजय शाह
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नेपाल में एक बड़े जलविद्युत परियोजना स्थल पर हुए दुखद टनल हादसे के बाद एक अभूतपूर्व और चमत्कारिक रेस्क्यू सामने आया है। टनल में पिछले नौ दिनों से फंसे कंट्रोल रूम ऑपरेटर संजय शाह को बचावकर्मियों ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। भारी जलभराव और सुरंग का हिस्सा ढहने के बाद अंदर फंसे संजय शाह ने लगभग नौ दिनों तक बिना उचित संसाधनों के मौत को मात दी। सुरक्षित बाहर आने के बाद उन्होंने टनल के भीतर बिताए खौफनाक पलों और दूसरों की जान बचाने के दौरान खुद फंस जाने की पूरी आपबीती साझा की है। उधर, सुरक्षा बल और रेस्क्यू टीमें टनल के भीतर अन्य संभावित फंसे हुए लोगों की तलाश के लिए राहत अभियान युद्धस्तर पर चला रही हैं।

नेपाल में एक प्रमुख डैम और जलविद्युत परियोजना के निर्माण स्थल पर स्थित लंबी टनल में अचानक बड़ा हादसा हो गया था। टनल का एक हिस्सा ढहने और जलभराव होने के कारण अंदर काम कर रहे कई कर्मचारी फंस गए। इस हादसे के बाद चलाए जा रहे जटिल राहत और बचाव अभियान के नौवें दिन रेस्क्यू टीम को बड़ी सफलता मिली, जब टनल के कंट्रोल रूम में कार्यरत ऑपरेटर संजय शाह को जीवित और सुरक्षित बाहर निकाला गया। नौ दिनों तक टनल के अंधेरे में जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद उनका सुरक्षित बाहर आना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।

हादसे के दिन का भयावह अनुभव साझा करते हुए संजय शाह ने बताया कि वह टनल स्थित कंट्रोल रूम में तैनात थे। सामान्य परिस्थितियों में कंट्रोल रूम में चार से छह लोग ही रहते हैं, लेकिन जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त वहां करीब 40 से 45 लोग मौजूद थे। जैसे ही जलविद्युत परियोजना के बड़े डैम क्षेत्र में इमरजेंसी जैसी स्थिति बनी और टनल में पानी व मलबे का बहाव शुरू हुआ, कंट्रोल रूम ऑपरेटर होने के नाते संजय ने अपनी जिम्मेदारी निभाई।

संजय ने बताया कि उन्होंने खुद तुरंत भागने के बजाय कंट्रोल रूम से सभी उपस्थित लोगों को सचेत किया और उन्हें अविलंब बाहर निकलने का निर्देश दिया। उनके अलर्ट के कारण अधिकांश कर्मचारी समय रहते टनल से बाहर भागने में सफल रहे, लेकिन जब तक संजय खुद बाहर निकलने की कोशिश करते, तब तक टनल का मुख्य द्वार मलबे से बंद हो गया और पानी का बहाव तेज हो गया। टनल के भीतर नौ दिनों तक बंद रहने के दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार मंत्रोच्चार और ईश्वर का ध्यान करते रहे।

रेस्क्यू टीम के अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने संजय शाह के इस अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की है। अधिकारियों ने कहा कि अपनी परवाह किए बिना दर्जनों साथियों की जान बचाना और फिर विपरीत परिस्थितियों में नौ दिनों तक जीवित रहना एक मिसाल है।

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बताया कि इतने दिनों तक टनल में बंद रहने के कारण संजय को थकान और शारीरिक कमजोरी जरूर है, लेकिन उनकी स्थिति अब खतरे से बाहर और स्थिर है। वहीं नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार, टनल काफी लंबी है और अंदर अभी भी तीन से चार लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पानी के तेज बहाव में कुछ अन्य कर्मचारी टनल के और गहरे हिस्सों में चले गए हो सकते हैं।

इस दुर्घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में बनने वाली विशाल जलविद्युत परियोजनाओं और टनल निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी इलाकों में टनल निर्माण के समय आपातकालीन निकासी द्वार, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रणाली और संचार साधनों की व्यवस्था को लेकर विशेषज्ञों द्वारा चिंता व्यक्त की जा रही है।

दूसरी ओर, संजय शाह की इस जांबाजी की कहानी से रेस्क्यू में जुटी टीमों का मनोबल बढ़ा है। इस सफलता के बाद टनल के अंदर फंसे अन्य संभावित जीवित लोगों की खोज के लिए अभियान में आधुनिक उपकरणों और स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है।

नेपाली सुरक्षा बल, आपदा राहत दल और तकनीकी विशेषज्ञ टनल से पानी निकालने तथा मलबे को हटाने का काम निरंतर कर रहे हैं। प्रशासन का मुख्य ध्यान टनल के अंतिम छोर तक पहुंचकर अंदर फंसे अन्य लोगों से संपर्क स्थापित करने पर है। इसके साथ ही, स्थानीय सरकार ने इस टनल हादसे के कारणों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी औद्योगिक आपदाओं को रोका जा सके।

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