हर आठ दिन में एक लाख नए परिवार अपना रहे हैं सौर ऊर्जा, सब्सिडी का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था, जानिए डिटेल्स।
भारत सरकार द्वारा देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने और ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'प्रधानमंत्री
- मुफ़्त बिजली से रोशन हुए देश के लाखों घर, 'पीएम सूर्य घर योजना' के पंजीकरण में आया ऐतिहासिक उछाल
- घरेलू बिजली बिलों के भारी-भरकम खर्च से मिलेगी हमेशा के लिए मुक्ति, जानिए आवेदन करने की पूरी डिजिटल प्रक्रिया
भारत सरकार द्वारा देश के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने और ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना' इन दिनों सफलता के नए रिकॉर्ड बना रही है। इस जनकल्याणकारी योजना के माध्यम से देश के 40 लाख से अधिक परिवारों ने अब तक अपना आधिकारिक पंजीकरण कराकर अपने घरों को सौर ऊर्जा की रोशनी से जगमगा दिया है। आधुनिक और मध्यम वर्गीय परिवारों के बीच इस योजना को लेकर एक अलग ही स्तर का आकर्षण देखा जा रहा है। आंकड़ों के आधार पर यह बात सामने आई है कि प्रत्येक आठ दिनों के भीतर लगभग एक लाख नए उपभोक्ता इस डिजिटल पोर्टल से जुड़ रहे हैं, जो देश में हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के प्रति बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य लक्ष्य देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ़्त बिजली प्रदान करना है। इसके तहत उपभोक्ताओं के घरों की छतों (रूफटॉप) पर सोलर पैनल स्थापित किए जाते हैं, जिससे उत्पादित होने वाली बिजली का उपयोग घर के दैनिक उपकरणों को चलाने में किया जाता है। बिजली के पारंपरिक ग्रिड पर निर्भरता कम होने से न केवल आम जनता के मासिक बजट को भारी राहत मिल रही है, बल्कि देश के कोयला और अन्य थर्मल ऊर्जा संसाधनों पर बढ़ता हुआ दबाव भी काफी हद तक कम हो रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर बेहद सक्रिय भूमिका निभा रही है।
वित्तीय सहायता के मोर्चे पर सरकार ने इस योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी व्यवस्था को बेहद पारदर्शी और आकर्षक बनाया है। नियमानुसार, 1 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम के लिए 30,000 रुपये और 2 किलोवाट क्षमता के लिए 60,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। वहीं, 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के संयंत्र स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अधिकतम 78,000 रुपये की भारी सब्सिडी तय की गई है। इस पूरी सब्सिडी राशि को किसी बिचौलिए या सरकारी दफ्तर के चक्कर काटे बिना, सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से मात्र 30 दिनों के भीतर सुरक्षित रूप से भेज दिया जाता है।
सोलर प्लांट क्षमता और सब्सिडी
1 से 2 किलोवाट क्षमता: 30,000 रुपये से लेकर 60,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता।
2 से 3 किलोवाट क्षमता: 60,000 रुपये से लेकर 78,000 रुपये तक की सब्सिडी राशि।
3 किलोवाट से अधिक क्षमता: अधिकतम 78,000 रुपये तक की फिक्स्ड सब्सिडी।
इस योजना से जुड़ने के लिए पात्रता संबंधी कुछ बेहद सरल मानक तय किए गए हैं ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। आवेदन करने वाला व्यक्ति अनिवार्य रूप से भारत का मूल नागरिक होना चाहिए और उसके पास अपने नाम पर एक वैध घरेलू बिजली का कनेक्शन होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, आवेदक के पास एक ऐसा पक्का मकान या छत उपलब्ध होनी चाहिए जहां सौर प्लेटों को स्थापित करने के लिए पर्याप्त और खुली धूप वाली जगह मिल सके। वाणिज्यिक (कमर्शियल) या औद्योगिक संपत्तियों पर इस योजना का लाभ नहीं लिया जा सकता है, यह पूरी तरह से केवल आवासीय उपभोक्ताओं के कल्याण के लिए ही समर्पित की गई है।
यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर को मुफ़्त बिजली से रोशन करना चाहते हैं, तो इसकी आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और बेहद आसान है। इसके लिए उपभोक्ताओं को सबसे पहले योजना के आधिकारिक राष्ट्रीय पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करना होता है, जहां उन्हें अपने राज्य, स्थानीय बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) का नाम और बिजली बिल पर दर्ज कंज्यूमर नंबर दर्ज करना होता है। इसके बाद उपभोक्ता अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से लॉगिन करके सोलर रूफटॉप के लिए विधिवत फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म जमा होने के बाद स्थानीय बिजली कंपनी तकनीकी व्यवहार्यता (फिजिबिलिटी) की जांच करती है और मंजूरी प्रदान करती है।
तकनीकी मंजूरी मिलने के बाद उपभोक्ताओं को अपने क्षेत्र में सरकार द्वारा पंजीकृत (एम्पैनल्ड) वेंडरों की सूची से किसी एक का चयन करके सोलर पैनल का इंस्टॉलेशन कार्य पूरा कराना होता है। वेंडर द्वारा प्लांट स्थापित करने के बाद बिजली विभाग के इंजीनियर मौके पर आकर प्लांट का निरीक्षण करते हैं और नेट-मीटरिंग की प्रक्रिया को पूरा करते हैं। नेट-मीटरिंग एक ऐसी प्रणाली है जिसके जरिए आपके द्वारा ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त बिजली और आपके द्वारा उपयोग की गई बिजली का हिसाब रखा जाता है। इसके बाद विभाग द्वारा एक कमीशनिंग सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जिसे पोर्टल पर अपलोड करते ही सब्सिडी का पैसा आपके खाते में आ जाता है।
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