Delhi DUPIC Card: दिल्ली में हर जमीन-मकान का बनेगा DUPIC कार्ड, रेखा सरकार लाएगी नया कानून, जानें क्या होगा फायदा
Delhi DUPIC Card New Law: दिल्ली की रेखा सरकार संपत्तियों के लिए नया कानून लाने जा रही है। अब हर मकान और जमीन का एक विशिष्ट DUPIC कार्ड बनाया जाएगा।

- Delhi Property New Law: दिल्ली में प्रॉपर्टी धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम, रेखा सरकार का बड़ा फैसला, हर मकान का बनेगा DUPIC कार्ड
- दिल्ली वालों के लिए बड़ी खबर: रेखा सरकार लाने जा रही नया कानून, अब हर प्रॉपर्टी का बनेगा यूनिक DUPIC कार्ड, बदल जाएंगे नियम
- दिल्ली में भूमि सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम: रेखा सरकार लाएगी नया कानून, हर संपत्ति के लिए अनिवार्य होगा DUPIC कार्ड
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा के नेतृत्व वाली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में भूमि और संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कानून लाने की तैयारी में है। सरकार की इस नई योजना के तहत दिल्ली के प्रत्येक मकान, दुकान, प्लॉट और फ्लैट के लिए एक विशिष्ट पहचान पत्र यानी 'ड्यूपिक' (DUPIC) कार्ड जारी किया जाएगा। गुरुवार को सामने आई इस नीतिगत योजना के अनुसार, इस नए वैधानिक कदम का मुख्य उद्देश्य राजधानी में दशकों से चली आ रही जमीनी धोखाधड़ी, अवैध कब्जों और एक ही संपत्ति की कई बार फर्जी रजिस्ट्री जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करना है। इस डिजिटल डेटाबेस के तैयार होने से पूरी दिल्ली के संपत्ति रिकॉर्ड्स को एक क्लिक पर देखा जा सकेगा, जिससे आम दिल्लीवासियों को प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर सीधा और बड़ा लाभ मिलेगा।
दिल्ली में संपत्तियों के मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों और कानूनी मुकदमों की संख्या को कम करने के लिए रेखा सरकार एक व्यापक कानूनी मसौदा (Draft Bill) तैयार कर रही है। इस नए कानून के लागू होते ही दिल्ली की भौगोलिक सीमा के भीतर आने वाली सभी प्रकार की अचल संपत्तियों—चाहे वे फ्रीहोल्ड हों, लीजहोल्ड हों, डीडीए के फ्लैट्स हों या अनधिकृत कॉलोनियों के मकान हों—उन सभी के लिए डीयूूपीआईसी (DUPIC - Delhi Unique Property Identification Code) कार्ड बनवाना अनिवार्य हो जाएगा। यह कार्ड ठीक उसी तरह काम करेगा जैसे किसी व्यक्ति का विशिष्ट पहचान दस्तावेज काम करता है। इसमें संपत्ति का पूरा विवरण डिजिटल रूप में दर्ज होगा।
दिल्ली के राजस्व विभाग (Revenue Department) और शहरी विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए उच्च स्तरीय दौर की बैठकें पूरी हो चुकी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगामी विधानसभा सत्र में इस नए भूमि सुधार और संपत्ति स्वामित्व विधेयक को पटल पर रखा जा सकता है।
इस योजना के तहत दिल्ली के सभी जिलों में ड्रोन कैमरों और जीआईएस (GIS) मैपिंग के जरिए संपत्तियों का डिजिटल सर्वे किया जाएगा। सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक भूखंड या निर्मित ढांचे को एक यूनिक नंबर अलॉट किया जाएगा, जो उसके DUPIC कार्ड पर दर्ज होगा। इस कार्ड के भीतर संपत्ति के वर्तमान मालिक का नाम, उसका क्षेत्रफल, जीपीएस लोकेशन, संपत्ति का इतिहास (यानी इसे कब और किससे खरीदा गया) और उस पर यदि कोई बैंक लोन या कानूनी विवाद चल रहा है, तो उसकी पूरी जानकारी संकलित की जाएगी। यह पूरा सिस्टम क्लाउड डेटाबेस पर आधारित होगा, जिससे सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को भी सीधे जोड़ा जाएगा ताकि रजिस्ट्री के समय किसी भी तरह के फर्जी दस्तावेज का उपयोग न किया जा सके।
रेखा सरकार के इस क्रांतिकारी कदम का दिल्ली के रियल एस्टेट सेक्टर और आम नागरिकों ने स्वागत किया है। दिल्ली रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पदाधिकारियों का कहना है कि यह कानून विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों और बुजुर्ग मकान मालिकों के लिए सुरक्षा कवच साबित होगा, जिनकी संपत्तियों पर भू-माफिया अक्सर नजर बनाए रखते हैं।
प्रशासनिक स्तर पर टिप्पणी करते हुए दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ नीति निर्माता ने बताया, "इस कानून को लाने का मकसद किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों की रक्षा करना है। DUPIC कार्ड के माध्यम से हम दिल्ली के भूमि रिकॉर्ड्स का शत-प्रतिशत आधुनिकीकरण कर रहे हैं। इससे अदालतों में चल रहे जमीन संबंधी मुकदमों का बोझ काफी कम हो जाएगा।" वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार को सचेत करते हुए कहा है कि इस प्रक्रिया में आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने के लिए पुख्ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था की जानी चाहिए।
दिल्ली वालों को क्या होगा फायदा?
इस नए कानून के लागू होने और DUPIC कार्ड बनने से दिल्ली के आम नागरिकों को कई मोर्चों पर सीधा लाभ मिलेगा:
धोखाधड़ी पर पूर्ण विराम: एक ही जमीन या मकान के फर्जी कागजात बनाकर अलग-अलग लोगों को बेचने का गोरखधंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा, क्योंकि नई रजिस्ट्री तभी होगी जब पुराना DUPIC डेटा वेरिफाई होगा।
अवैध कब्जों से मुक्ति: जीपीएस लोकेशन और डिजिटल मैपिंग के कारण कोई भी पड़ोसी या बाहरी भू-माफिया किसी अन्य की जमीन पर अवैध निर्माण नहीं कर सकेगा।
लोन की प्रक्रिया होगी आसान: जब संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड DUPIC कार्ड में स्पष्ट होगा, तो बैंकों से होम लोन या मॉर्गेज लोन लेने की कागजी कार्रवाई काफी तेज हो जाएगी।
म्यूटेशन और टैक्स में पारदर्शिता: दिल्ली नगर निगम (MCD) को हाउस टैक्स की गणना करने और संपत्ति का नामांतरण (Mutation) करने में किसी भी प्रकार की मैन्युअल धांधली की गुंजाइश नहीं बचेगी।
कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इस विधेयक को कानून के रूप में अधिसूचित करने के लिए उपराज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद, प्रथम चरण में दिल्ली के चुनिंदा जिलों (पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर) में डिजिटल सर्वे और DUPIC कार्ड बनाने का काम शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों के भीतर पूरी दिल्ली की सभी व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियों को इस कार्ड के दायरे में ले आया जाए। आम जनता की सुविधा के लिए इस कार्ड के आवेदन की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन रखने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर विशेष शिविर (Camps) भी आयोजित किए जाएंगे।
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