कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों को जारी किया थ्री-लाइन व्हिप, 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूदगी अनिवार्य।

कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों को बजट सत्र के दूसरे चरण के शुरुआती दिनों में अनिवार्य उपस्थिति के लिए थ्री-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें

Mar 7, 2026 - 12:19
 0  4
कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों को जारी किया थ्री-लाइन व्हिप, 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूदगी अनिवार्य।
कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों को जारी किया थ्री-लाइन व्हिप, 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूदगी अनिवार्य।
  • ओम बिरला के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव, बजट सत्र के दूसरे चरण में चर्चा और वोटिंग संभावित
  • स्पीकर खुद सदन में बैठेंगे लेकिन अध्यक्षता नहीं करेंगे, विपक्ष का आरोप पार्टिसन व्यवहार पर

कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों को बजट सत्र के दूसरे चरण के शुरुआती दिनों में अनिवार्य उपस्थिति के लिए थ्री-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। यह व्हिप इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सूत्रों के अनुसार इन दिनों लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव चर्चा और वोटिंग के लिए सदन में लाया जा सकता है। बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च 2026 से शुरू होकर 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा, जिसमें महत्वपूर्ण विधेयक और अन्य संसदीय कार्यवाही होगी। विपक्ष ने फरवरी में स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव नोटिस दिया था, जिसमें उन्हें सदन की कार्यवाही में पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया गया है, जैसे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य सदस्यों को बोलने नहीं देने और विपक्षी महिला सांसदों पर अनुचित टिप्पणियां करने का दावा। यह प्रस्ताव 118 से अधिक विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर से समर्थित है, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और अन्य दल शामिल हैं, हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस के मुख्य व्हिप के एसुरेश ने इस नोटिस को लोकसभा सचिवालय में जमा किया था। स्पीकर ओम बिरला ने नैतिक आधार पर कहा है कि प्रस्ताव के निपटारे तक वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे, बल्कि सदस्यों के बीच बैठेंगे और बहस में भाग ले सकते हैं तथा वोट भी दे सकते हैं। यह संसद के इतिहास में एक दुर्लभ स्थिति होगी, क्योंकि स्पीकर आमतौर पर सदन की अध्यक्षता करते हैं लेकिन हटाने के प्रस्ताव पर वे सामान्य सदस्य की तरह व्यवहार करेंगे।

बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसमें लोकसभा में स्पीकर हटाने का प्रस्ताव पहले दिन ही एजेंडा में सूचीबद्ध है। यह प्रस्ताव संविधान और लोकसभा नियमों के अनुसार चलाया जाएगा, जहां स्पीकर को हटाने के लिए बहुमत की आवश्यकता होती है। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन में विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका और पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्यवाही संचालित की, विशेष रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान। प्रस्ताव में फरवरी 2025 की कुछ घटनाओं का जिक्र किया गया था, लेकिन सचिवालय ने नोटिस में खामियां पाईं और उन्हें सुधारने का निर्देश दिया। कांग्रेस ने कहा है कि प्रस्ताव नियमों के अनुरूप है और बहस होनी चाहिए, क्योंकि स्पीकर के व्यवहार पर विशिष्ट उदाहरण दिए गए हैं। भाजपा ने भी अपने सांसदों को 9 और 10 मार्च के लिए थ्री-लाइन व्हिप जारी किया है, जिसमें महत्वपूर्ण विधायी कार्यों का हवाला दिया गया है। दोनों पक्षों की यह तैयारी दिखाती है कि सदन में तीखी बहस और वोटिंग की संभावना है। स्पीकर ओम बिरला कोटा से सांसद हैं और उन्होंने सदन में कहा है कि वे नैतिक आधार पर अध्यक्षता नहीं करेंगे, लेकिन बहस में शामिल होंगे। यह स्थिति संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि स्पीकर की अनुपस्थिति में डिप्टी स्पीकर या पैनल चेयरमैन अध्यक्षता संभालेंगे।

  • थ्री-लाइन व्हिप का महत्व

थ्री-लाइन व्हिप पार्टी के सांसदों के लिए सबसे सख्त निर्देश होता है, जिसमें अनुपस्थिति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। कांग्रेस ने 9 से 11 मार्च तक सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने को कहा है, जबकि भाजपा ने 9 और 10 मार्च के लिए व्हिप जारी किया है। यह दोनों पक्षों की गंभीरता को दर्शाता है।

सत्र के पहले चरण में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरूआत हुई थी, जिसमें 2026-27 के बजट पर चर्चा हुई। पहले चरण में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर तीखी बहस हुई थी। विपक्ष ने इन मुद्दों पर सरकार पर हमला बोला था, और सदन में कई बार हंगामा हुआ जिसके कारण कुछ सांसदों को निलंबित किया गया। स्पीकर पर आरोप लगा कि उन्होंने विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया, जिसके बाद फरवरी में प्रस्ताव नोटिस दिया गया। स्पीकर ने सदन में कहा था कि उनके पास कांग्रेस सांसदों के व्यवधान की ठोस जानकारी थी। दूसरे चरण में अब यह प्रस्ताव चर्चा में आएगा, जो संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष ने कहा है कि स्पीकर ने संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया है और पक्षपातपूर्ण तरीके से काम किया है।

लोकसभा में स्पीकर हटाने का प्रस्ताव दुर्लभ है, और यह 18वीं लोकसभा में राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। प्रस्ताव में स्पीकर पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने, महिला सांसदों पर अनुचित आरोप लगाने और सदन की कार्यवाही में पक्षपात का आरोप है। कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा कि प्रस्ताव नियमों के अनुसार है और बहस होनी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस ने इसमें हिस्सा नहीं लिया, लेकिन अन्य विपक्षी दल जैसे समाजवादी पार्टी और डीएमके ने समर्थन दिया। भाजपा ने प्रस्ताव को राजनीतिक स्टंट बताया है। स्पीकर ओम बिरला ने सदन में अपनी स्थिति स्पष्ट की है कि वे नैतिक आधार पर अध्यक्षता नहीं करेंगे, लेकिन बहस में भाग लेंगे। यह स्थिति सदन में बहस को और तीखा बना सकती है, क्योंकि स्पीकर सामान्य सदस्य की तरह बैठेंगे।

  • सत्र की समयसीमा और महत्वपूर्ण बिंदु

बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। पहले चरण में बजट चर्चा और धन्यवाद प्रस्ताव हुआ था। दूसरे चरण में स्पीकर हटाने का प्रस्ताव प्रमुख मुद्दा होगा, साथ ही अन्य विधेयक भी आएंगे। यह घटनाक्रम संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी टकराव को बढ़ाता है। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर ने सदन की गरिमा को प्रभावित किया है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक हथकंडा मानती है। प्रस्ताव पर बहस 2-3 दिनों तक चल सकती है, और वोटिंग से स्पीकर की स्थिति तय होगी। यदि प्रस्ताव पास होता है, तो स्पीकर हट जाएंगे, लेकिन बहुमत के कारण यह मुश्किल लगता है। कांग्रेस ने सांसदों को व्हिप जारी करके अपनी एकजुटता दिखाई है। दूसरे चरण में अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी होंगे, जैसे विधेयकों पर चर्चा और संभावित बजट संबंधी मुद्दे। लेकिन स्पीकर प्रस्ताव प्रमुख रहेगा। यह संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है और राजनीतिक बहस को तेज करेगा।

Also Read- मुख्यमंत्री योगी का जनता दर्शन: गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए तत्काल आर्थिक सहायता के निर्देश, किसी को न हों परेशान

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow