हिमाचल बजट 2026 पर भाजपा का कड़ा प्रहार: शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस को बताया 'आर्थिक अभिशाप'
बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हालांकि यह दावा किया कि वे राज्य को 2030 तक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। लेकिन भाजपा इन दावों को पूरी तरह खारिज करती

- कर्ज के जाल में फंसा पहाड़ी राज्य: 1.40 लाख करोड़ के बोझ और घटते बजट पर गरमाई सियासत
- कांग्रेस की योजनाओं पर उठाए सवाल: पूनावाला बोले- 'खटाखट' वादों ने हिमाचल को बर्बादी की राह पर धकेला
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शनिवार, 21 मार्च 2026 को विधानसभा में पेश किए गए 54,928 करोड़ रुपये के बजट ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने इस बजट के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए कहा कि सामान्यतः हर साल सरकारी बजट में कुछ प्रतिशत की वृद्धि देखी जाती है, लेकिन हिमाचल में इस बार बजट का कुल परिव्यय पिछले वर्ष के 58,514 करोड़ रुपये से घटकर 54,928 करोड़ रुपये रह गया है। यह लगभग 3,586 करोड़ रुपये की बड़ी कटौती है। पूनावाला का तर्क है कि जब बजट ही कम हो गया है, तो विकास कार्यों की गति रुकना तय है। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद से इस दल ने केवल आर्थिक अस्थिरता को ही बढ़ावा दिया है।
हिमाचल प्रदेश की वर्तमान वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राज्य पर कर्ज का बोझ अब असहनीय होता जा रहा है। उनके अनुसार, प्रदेश पर कुल ऋण बढ़कर लगभग 1,40,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँच चुका है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) के अनुपात में खतरनाक स्तर पर है। पूनावाला ने कांग्रेस द्वारा चुनाव के दौरान किए गए 'खटाखट' वादों और गारंटियों पर तंज कसते हुए कहा कि इन लोकलुभावन घोषणाओं को पूरा करने के चक्कर में राज्य का खजाना खाली हो गया है। बिना वित्तीय बैकअप के रेवड़ियां बांटने की नीति ने हिमाचल को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ सरकार को अपने मंत्रियों और विधायकों के वेतन में कटौती या उन्हें स्थगित करने जैसे अभूतपूर्व कदम उठाने पड़ रहे हैं।
आर्थिक मोर्चे पर राज्य की घेराबंदी करते हुए पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जहाँ भी सत्ता में आती है, वहां की अर्थव्यवस्था को वेंटिलेटर पर ले आती है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि महंगाई और बेरोजगारी पर लगाम लगाने के बजाय सरकार ने जनता पर अतिरिक्त करों का बोझ डाल दिया है। राज्य सरकार ने केंद्र द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने को बजट घटने का कारण बताया है, लेकिन भाजपा इसे बहानेबाजी मानती है। पूनावाला ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार नियमों के तहत सहायता प्रदान करती है, लेकिन राज्य का दायित्व अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों को विकसित करना होता है, जिसमें वर्तमान सरकार पूरी तरह विफल रही है।
हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं के वेतन में 50% की कटौती की घोषणा की है, जबकि मंत्रियों के वेतन में 30% और विधायकों के वेतन में 20% की कटौती अगले छह महीनों के लिए प्रभावी होगी। इसके अतिरिक्त, प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के वेतन का भी एक हिस्सा अस्थायी रूप से स्थगित (Defer) करने का प्रस्ताव बजट में रखा गया है। यह कदम राज्य की गंभीर राजकोषीय स्थिति की पुष्टि करता है।
प्रशासनिक स्तर पर बजट की कटौती का सीधा असर स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पूनावाला ने जोर देकर कहा कि बजट में कमी का मतलब है कि नई सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण के लिए धन की कमी होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसी योजनाओं को लागू करके अल्पकालिक राजनीतिक लाभ तो ले लिया, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों पर जो वित्तीय बोझ डाला है, उसका परिणाम अब सामने आने लगा है। भाजपा नेता ने मतदाताओं को आगाह किया कि कांग्रेस की आर्थिक नीतियां किसी भी राज्य के लिए विनाशकारी साबित हो सकती हैं, इसलिए ऐसे 'आर्थिक अभिशाप' से दूरी बनाए रखना ही हितकर है।
राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि शहजाद पूनावाला का यह हमला आगामी स्थानीय चुनावों और राज्य के राजनीतिक माहौल को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है। भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की योजना बना रही है कि कैसे एक समृद्ध राज्य को कर्ज के दलदल में धकेला गया। पूनावाला ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि हिमाचल की जनता अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है क्योंकि जो गारंटियां दी गई थीं, वे अब राज्य की आर्थिक बर्बादी का कारण बन रही हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को श्वेत पत्र जारी कर यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्षों में लिए गए कर्ज का उपयोग किन विकास कार्यों में किया गया है।
बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हालांकि यह दावा किया कि वे राज्य को 2030 तक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं। लेकिन भाजपा इन दावों को पूरी तरह खारिज करती है। पूनावाला का कहना है कि जब सरकार के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पर्याप्त धन नहीं है और वह वेतन कटौती कर रही है, तो आत्मनिर्भरता की बातें केवल कागजी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कार्यशैली हमेशा से ही 'लोन लो और घी पियो' वाली रही है, लेकिन अब घी खत्म हो चुका है और केवल लोन का बोझ बचा है।
निष्कर्ष के तौर पर, हिमाचल प्रदेश का बजट 2026 पक्ष और विपक्ष के बीच एक बड़ा युद्धक्षेत्र बन गया है। जहाँ सरकार इसे 'व्यवस्था परिवर्तन' और वित्तीय अनुशासन की ओर एक कदम बता रही है, वहीं शहजाद पूनावाला के नेतृत्व में भाजपा इसे आर्थिक पतन का दस्तावेज करार दे रही है। पूनावाला का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की आर्थिक साख को चोट पहुँचाने के लिए इस्तेमाल करेगी। हिमाचल की जनता के लिए अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस वित्तीय संकट से बाहर निकलने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है और क्या वाकई वेतन कटौती जैसे उपायों से राज्य की वित्तीय सेहत में कोई सुधार आता है।
What's Your Reaction?







