Sanjay Sarawagi Targets Opposition: 'कारसेवकों पर गोली चलवाई, अब राम का नाम ले रहे', संजय सरावगी का सपा और ममता बनर्जी पर बड़ा हमला
Bihar BJP President Sanjay Sarawagi Attacks Opposition: बिहार भाजपा अध्यक्ष ने समाजवादी पार्टी और ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले अब केवल राम नाम का दिखावा कर रहे हैं।

- Bihar BJP President Statement: बिहार बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी का विपक्ष पर तीखा तंज, कहा- कारसेवकों के विरोधियों का राम से नाता नहीं
- 'कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले कर रहे दिखावा...' बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने सपा और ममता बनर्जी को घेरा, सियासी भूचाल
- बिहार से बड़ी राजनीतिक खबर: बीजेपी अध्यक्ष संजय सरावगी का विपक्ष पर तीखा वार, कहा- चुनावी फायदे के लिए राम का नाम ले रही सपा-ममता
बिहार की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और धार्मिक मुद्दों को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। बिहार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। पटना में मीडिया से बात करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिन राजनीतिक शक्तियों ने अतीत में अयोध्या आंदोलन के दौरान निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलवाई थीं, उनका भगवान राम से कोई वास्तविक नाता नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि विपक्ष आजकल केवल चुनावी फायदे के लिए राम नाम का दिखावा कर रहा है। इस तीखे बयान के बाद बिहार और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच नया टकराव पैदा होना तय माना जा रहा है।
यह पूरा मामला राम मंदिर आंदोलन के इतिहास और वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को जोड़कर दिए गए एक बड़े सियासी बयान का है। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय सरावगी ने विपक्षी गठबंधन के प्रमुख चेहरों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले दल आज अचानक खुद को राम भक्त दिखाने की होड़ में शामिल कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष ने समाजवादी पार्टी के पुराने इतिहास और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रुख का हवाला देते हुए उन्हें 'दिखावा करने वाला' करार दिया। इस राजनीतिक प्रहार के जरिए भाजपा ने एक बार फिर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और अयोध्या आंदोलन के संघर्षों को मुख्यधारा की बहस में ला खड़ा किया है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों ने विपक्षी नेताओं के हालिया बयानों और धार्मिक यात्राओं को लेकर सवाल पूछे थे। इसके जवाब में संजय सरावगी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इतिहास के पन्नों को पलटा। उन्होंने वर्ष 1990 के दौर का संदर्भ देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार के समय अयोध्या में शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रहे राम भक्तों और कारसेवकों पर क्रूरता से गोलियां बरसाई गई थीं, जिसमें कई मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
सरावगी ने आगे कहा, "इतिहास गवाह है कि किसने राम भक्तों का खून बहाया और किसने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे। आज वही लोग जब वोटों की खातिर पाला बदलकर राम-राम जपने का नाटक करते हैं, तो जनता उनकी असलियत अच्छी तरह समझती है।" उन्होंने ममता बनर्जी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में 'जय श्रीराम' के नारों से चिढ़ने वाले लोग अब राजनीतिक मजबूरी के तहत अलग भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि विपक्ष का यह हृदय परिवर्तन वास्तविक नहीं बल्कि पूरी तरह से चुनावी ढोंग और दिखावा है।
संजय सरावगी के इस बेहद कड़े प्रहार के बाद विपक्षी खेमे में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है:
समाजवादी पार्टी का रुख: सपा के स्थानीय और राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा के पास विकास, बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों पर बोलने के लिए कुछ नहीं है। इसलिए वे हर बार 35 साल पुराने मुद्दों और धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) का जवाब: टीएमसी नेताओं ने कहा कि ममता बनर्जी सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करती हैं और भाजपा को किसी को धार्मिक प्रमाण पत्र बांटने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
भाजपा का समर्थन: बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने संजय सरावगी के बयान का पूरी तरह समर्थन करते हुए कहा कि प्रामाणिक तथ्यों को सामने रखना इतिहास के प्रति न्याय है।
इस राजनीतिक बयानबाजी का प्रभाव आगामी चुनावों और गठबंधन की रणनीतियों पर स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा:
सांस्कृतिक ध्रुवीकरण: भाजपा इस मुद्दे के जरिए अपने कैडर को वैचारिक रूप से मजबूत करने और बहुसंख्यक समाज को पुराने घटनाक्रमों की याद दिलाने की रणनीति पर काम कर रही है।
विपक्ष के लिए रक्षात्मक स्थिति: राम मंदिर के मुद्दे पर विपक्ष के लिए स्टैंड लेना हमेशा से कूटनीतिक रूप से कठिन रहा है, सरावगी के इस सीधे हमले के बाद विपक्षी दलों को अपनी धर्मनिरपेक्ष और धार्मिक छवि के बीच संतुलन बनाने में मशक्कत करनी पड़ रही है।
बिहार की राजनीति पर असर: जेडीयू और भाजपा गठबंधन के भीतर भी इस तरह के प्रखर बयानों से राजनीतिक समीकरणों को नया आयाम मिलता है।
भाजपा अध्यक्ष के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में पार्टी इस आक्रामक राष्ट्रवाद और धार्मिक अस्मिता के मुद्दे को थामे रखेगी। समाजवादी पार्टी और टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस पर कोई बड़ा आधिकारिक पलटवार किए जाने की संभावना है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति का तापमान और बढ़ेगा। राज्य स्तर पर, भाजपा इस विमर्श को गांव-गांव तक ले जाने के लिए विशेष सांगठनिक बैठकों का आयोजन कर सकती है, जबकि विपक्ष इसे जनता के ध्यान भटकाने की कोशिश बताकर आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित रहने का प्रयास करेगा।
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