Indian Railway News: ट्रेन के स्लीपर कोच में साइड लोअर बर्थ के नीचे निकला लंबा सांप, रात में यात्रियों में मची चीख-पुकार
ट्रेन के स्लीपर कोच में रात के वक्त साइड लोअर बर्थ के नीचे लंबा सांप निकलने से अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

भारतीय रेल में यात्रा करने वाले मुसाफिरों की सुरक्षा और कोच के रख-रखाव को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ट्रेन के स्लीपर श्रेणी के डिब्बे में रात के समय उस वक्त अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई, जब साइड लोअर बर्थ के नीचे फर्श पर एक लंबा सांप रेंगता हुआ दिखाई दिया। अधिकांश यात्री जब अपनी-अपनी सीटों पर सो रहे थे, तभी अचानक सामने आए इस रेंगते जीव को देखकर बोगी में मौजूद लोगों के होश उड़ गए।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद रेल यात्रियों ने रेलवे प्रशासन की लापरवाही, बोगियों की समुचित सफाई और मेंटेनेंस यार्ड में बरती जाने वाली ढिलाई पर तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए हैं। पोस्ट साझा करने वाले यूजर ने रेलवे पर तंज कसते हुए लिखा कि यात्रियों ने सुरक्षित सफर के लिए टिकट खरीदा था, न कि किसी जंगल सफारी के रोमांच के लिए।
रात के सन्नाटे में कैसे मची भगदड़?
सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के सोशल मीडिया विवरण के अनुसार, यह पूरी घटना रात के उस पहर की है जब स्लीपर कोच की अधिकांश लाइटें बंद थीं और यात्री अपनी सीटों पर विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान साइड लोअर बर्थ पर बैठे एक यात्री की नजर बर्थ के ठीक नीचे फर्श पर धीमी गति से रेंग रहे एक लंबे सांप पर पड़ी।
शुरुआत में अंधेरे के कारण यात्री को किसी तार या कपड़े का भ्रम हुआ, लेकिन जब उसने मोबाइल की टॉर्च जलाई तो वहां एक लंबा सांप फन फैलाए हलचल करता दिखा। यह दृश्य देखते ही यात्री अपनी सीट से उछलकर दूर हट गया और कोच में शोर मचा दिया। शोर सुनते ही आसपास की बर्थों पर सो रहे अन्य यात्री, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, घबराकर उठ खड़े हुए। कई यात्री घबराहट में मिडिल और अपर बर्थ पर चढ़ गए, जबकि कुछ लोग तुरंत कोच के मुख्य दरवाजे और गैलरी की तरफ भाग खड़े हुए।
सोशल मीडिया पर फूटा यात्रियों का गुस्सा
माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म एक्स पर यह वीडियो अपलोड होते ही कुछ ही घंटों में हजारों बार देखा गया और तेजी से री-ट्वीट होने लगा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि सांप साइड लोअर बर्थ के नीचे रखे सामान के पास धीरे-धीरे अपना रास्ता बना रहा है। बोगी में मौजूद लोग भयभीत आवाज में एक-दूसरे को सतर्क रहने और नीचे पैर न रखने की हिदायत देते सुनाई दे रहे हैं।
यूजर ने अपने पोस्ट में रेल मंत्रालय, केंद्रीय रेल मंत्री और संबंधित रेलवे जोन्स को टैग करते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया। यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा कि स्लीपर कोच में यात्रा करने वाले आम मध्यमवर्गीय यात्रियों को अक्सर बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है, लेकिन अब तो जान का जोखिम भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि यह सांप किसी सोते हुए यात्री या नीचे लटके बच्चे के पैर पर चढ़ जाता या डस लेता, तो चलती ट्रेन में इलाज के अभाव में बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
कोच के अंदर सांप पहुंचने की क्या हो सकती है वजह?
चलती ट्रेन के बंद या सेमी-कवर्ड डिब्बे में सांप जैसा खतरनाक जीव आखिर कैसे प्रवेश कर गया, इसको लेकर तकनीकी और परिचालन स्तर पर कई आशंकाएं जताई जा रही हैं:
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यार्ड और वाशिंग लाइन में लापरवाही: ट्रेनें जब यात्रा शुरू करने से पहले यार्ड या सेकेंडरी मेंटेनेंस डिपो में घंटों खड़ी रहती हैं, तो वहां आसपास उगी घनी झाड़ियों और जलभराव के चलते सरीसृप अक्सर ट्रेन के अंडरगियर, पाइपलाइन या बोगी के निचले हिस्सों में छिप जाते हैं।
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सफाई और पेस्ट कंट्रोल का अभाव: ट्रेनों के लंबी दूरी के सफर पर रवाना होने से पहले डिब्बों की गहन जांच और कीटनाशक/पेस्ट कंट्रोल छिड़काव की अनिवार्य प्रक्रिया होती है। यदि बोगियों के ड्रेनेज पाइप, टॉयलेट वेंट्स या एयर वेंटिलेशन ग्रिल खुले या टूटे हों, तो सांप आसानी से अंदर दाखिल हो सकते हैं।
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पार्सल या यात्रियों के सामान के साथ: कई बार ग्रामीण या बाहरी इलाकों के स्टेशनों से लोड होने वाले अनपैक्ड सामान, बोरियों या भारी टोकरियों के जरिए भी ऐसे जीव अनजाने में कोच के भीतर पहुंच जाते हैं।
आपात स्थिति में क्या कदम उठाने चाहिए?
ट्रेन यात्रा के दौरान यदि किसी यात्री को कोच के अंदर सांप, बिच्छू या अन्य कोई खतरनाक जीव दिखाई दे, तो घबराने या भगदड़ मचाने के बजाय कुछ व्यावहारिक कदमों का पालन करना आवश्यक है:
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जीव को छेड़ने या मारने की कोशिश न करें: विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी सांप को घेरने या डंडे से मारने की कोशिश करने पर वह आक्रामक होकर हमला कर सकता है। उससे कम से कम 5 से 6 फीट की सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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तुरंत रेल मदद हेल्पलाइन (139) पर संपर्क करें: भारतीय रेलवे की एकीकृत आपातकालीन हेल्पलाइन संख्या 139 पर कॉल करके या 'RailMadad' मोबाइल ऐप पर अपनी पीएनआर (PNR) संख्या और कोच/बर्थ नंबर दर्ज कराकर लाइव कंप्लेंट दर्ज करें।
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टीटीई या ट्रेन एस्कॉर्ट पार्टी को सूचित करें: कोच में तैनात टीटीई (TTE), आरपीएफ (RPF) या जीआरपी (GRP) के गश्ती दल को तत्काल घटना की जानकारी दें, ताकि अगले मुख्य स्टेशन पर वन विभाग (फॉरेस्ट डिपार्टमेंट) के रेस्क्यू दल या स्नेक कैचर को पहले से अलर्ट किया जा सके।
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सामान की सावधानी से जांच: बर्थ के नीचे रखे अपने बैग या जूतों को तुरंत न खींचें। लाइट जलाकर पूरी सावधानी से स्थिति का मुआयना करें।
रेलवे जवाबदेही पर उठते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब किसी ट्रेन के डिब्बे से सांप या जहरीले जीव निकलने की खबर आई हो। इससे पहले भी कुछ मामलों में एसी और नॉन-एसी कोचों में चूहे, कॉकरोच और यहां तक कि सांप मिलने की घटनाएं सुर्खियों में रही हैं।
यात्री संगठनों का स्पष्ट कहना है कि रेलवे केवल किराए बढ़ाने या नए नियमों को लागू करने तक सीमित न रहे, बल्कि मेंटेनेंस यार्डों में झाड़ियों की नियमित कटाई, बोगियों की सीलिंग जांच और रात के समय कोच अटेंडेंट्स की मुस्तैदी सुनिश्चित करे। जब तक बोगियों के रखरखाव में शून्य लापरवाही की नीति नहीं अपनाई जाएगी, तब तक यात्रियों के मन से ऐसे डरावने अनुभवों का भय खत्म नहीं होगा।
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