खानपान में लापरवाही ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, अस्वच्छ और दूषित भोजन की वजह से वैश्विक स्तर पर 87 करोड़ लोग पड़ रहे हैं गंभीर रूप से बीमार।

खाद्य सुरक्षा के वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली इस विस्तृत रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अस्वच्छ खानपान के कारण होने वाली बीमारियों का सबसे बड़ा खामियाजा मासूम बच्चों और कमजोर प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, कुल बीमार होने

Jun 7, 2026 - 12:02
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खानपान में लापरवाही ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, अस्वच्छ और दूषित भोजन की वजह से वैश्विक स्तर पर 87 करोड़ लोग पड़ रहे हैं गंभीर रूप से बीमार।
खानपान में लापरवाही ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, अस्वच्छ और दूषित भोजन की वजह से वैश्विक स्तर पर 87 करोड़ लोग पड़ रहे हैं गंभीर रूप से बीमार।

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की खाद्य सुरक्षा को लेकर अब तक की सबसे बड़ी चेतावनी, दूषित भोजन के कारण हर साल हो रही है 15 लाख से अधिक मौतें।
  • पेट पर वार कर रहा है एक खतरनाक अदृश्य दुश्मन, स्वामी रामदेव ने खराब जीवनशैली और मिलावटी खाद्य पदार्थों से बचने के लिए दिए विशेष स्वास्थ्य टिप्स।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया वैश्विक रिपोर्ट ने खानपान की आदतों और खाद्य सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में एक बड़ा हड़कंप मचा दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, दूषित और अस्वच्छ भोजन के सेवन के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 87 करोड़ (866 मिलियन) लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ रहे हैं। इस चिंताजनक स्थिति पर योग गुरु स्वामी रामदेव ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है और लोगों को सचेत किया है कि हमारे खानपान में बरती जा रही थोड़ी सी भी लापरवाही किस कदर हमारे शरीर के भीतर एक अदृश्य दुश्मन को जन्म दे रही है। यह अदृश्य दुश्मन मुख्य रूप से हमारे पेट और पाचन तंत्र पर सीधा वार कर रहा है, जिसके कारण न केवल अल्पावधि की बीमारियां हो रही हैं, बल्कि कैंसर और हृदय रोग जैसी जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं भी इंसानी शरीर को अपना ग्रास बना रही हैं।खाद्य सुरक्षा के वैश्विक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाली इस विस्तृत रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अस्वच्छ खानपान के कारण होने वाली बीमारियों का सबसे बड़ा खामियाजा मासूम बच्चों और कमजोर प्रतिरोधी क्षमता वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार, कुल बीमार होने वाले लोगों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या लगभग एक-तिहाई है, जो कि बेहद डरावनी स्थिति है। दूषित भोजन और पानी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने वाले बैक्टीरिया, वायरस और विभिन्न प्रकार के परजीवी बच्चों में जानलेवा डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण का कारण बनते हैं। समय पर उचित इलाज और साफ-सफाई न मिलने के कारण वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों बच्चों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों की विफलता को दर्शाता है।

इस महामारी की तरह फैलती समस्या के पीछे केवल जैविक कारक ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि भोजन में मौजूद रासायनिक तत्व और भारी धातुएं भी इंसानी सेहत को अंदर से खोखला कर रही हैं। वर्तमान समय में कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के कारण मिट्टी और पानी में आर्सेनिक, लेड (शीशा) और मरकरी (पारा) जैसे खतरनाक रसायनों की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है। जब यह रसायन हमारी खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) का हिस्सा बनते हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारे आंतरिक अंगों को प्रभावित करते हैं। रासायनिक रूप से दूषित इस भोजन के निरंतर सेवन से शरीर में क्रोनिक बीमारियां जैसे लिवर डैमेज, किडनी का फेल होना, मानसिक विकलांगता और विभिन्न प्रकार के घातक ट्यूमर विकसित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

खाद्य सुरक्षा के बड़े वैश्विक आंकड़े

  • सालाना बीमार लोग: लगभग 86.6 करोड़ (87 करोड़ के करीब)

  • सालाना होने वाली मौतें: 15.2 लाख से अधिक नागरिक

  • आर्थिक नुकसान: उत्पादकता और इलाज में सालाना 310 अरब डॉलर की बर्बादी

  • सबसे संवेदनशील वर्ग: 5 वर्ष से कम आयु के मासूम बच्चे

योग गुरु स्वामी रामदेव ने इस गंभीर विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज के आधुनिक दौर में पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड और सड़क किनारे मिलने वाले अस्वास्थ्यकर भोजन का चलन अत्यधिक बढ़ गया है। लोग स्वाद के चक्कर में भोजन की शुद्धता और उसकी स्वच्छता को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। मैदे से बने उत्पाद, अत्यधिक तेल-मसाले और प्रिजर्वेटिव्स (परिरक्षकों) से युक्त खाद्य पदार्थ हमारे पेट के भीतर मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं। जब पेट का संतुलन बिगड़ता है, तो कब्ज, एसिडिटी, कोलाइटिस और अल्सर जैसी बीमारियां शरीर में अपनी जड़ें जमाने लगती हैं। योग साधना और प्राकृतिक खानपान के जरिए ही इस अदृश्य दुश्मन का डटकर मुकाबला किया जा सकता है।

इस वैश्विक रिपोर्ट में इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि अस्वच्छ भोजन से होने वाली बीमारियों के कारण पूरी दुनिया को एक बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। स्वास्थ्य प्रणालियों पर बढ़ते अतिरिक्त बोझ और कार्यस्थल से कर्मचारियों की बीमारी के कारण होने वाली अनुपस्थिति की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को सालाना अरबों डॉलर की उत्पादकता का नुकसान उठाना पड़ता है। विकासशील और कम आय वाले देशों में यह स्थिति और भी अधिक भयावह है क्योंकि वहां न तो स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही खाद्य पदार्थों के रख-रखाव के लिए उचित कोल्ड चेन और रेफ्रिजरेशन की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसके चलते भोजन बहुत जल्दी दूषित हो जाता है।

दूषित भोजन से होने वाले मुख्य रोग

  • जैविक कारण: डायरिया, हैजा, साल्मोनेला संक्रमण, हेपेटाइटिस ए और ई।

  • रासायनिक कारण: हृदय रोग, कैंसर, गुर्दे की बीमारी और बच्चों में मानसिक विकास का अवरुद्ध होना।

  • मुख्य स्रोत: अशुद्ध पानी, बिना धुली सब्जियां, कच्चा मांस और मिलावटी डेयरी उत्पाद।

बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन की वजह से भी खाद्य सुरक्षा का संकट दिनों-दिन और अधिक गहराता जा रहा है। तापमान में होने वाली लगातार वृद्धि के कारण भोजन में बैक्टीरिया और फंगस बहुत तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलें और गोदामों में रखा अनाज विषाक्त (टॉक्सिक) हो जाता है। इसके अलावा, बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्रियों में धड़ल्ले से की जाने वाली मिलावट भी इस संकट को दोगुना कर रही है। सब्जियों को कृत्रिम रूप से चमकाने के लिए खतरनाक रसायनों का लेप लगाया जाता है और फलों को पकाने के लिए कार्बाइड का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है, जो सीधे तौर पर हमारे पाचन तंत्र को पूरी तरह से तबाह कर रहा है।

स्वामी रामदेव के अचूक स्वास्थ्य नियम

  • आहार शुद्धि: केवल ताजा, सुपाच्य और घर का बना सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

  • जल का नियम: पीने के पानी को हमेशा उबालकर या पूरी तरह फिल्टर करके ही पिएं।

  • नियमित योग: पेट को स्वस्थ रखने के लिए रोज कपालभाति, मांडुकासन और पवनमुक्तासन करें।

  • प्राकृतिक उपचार: पेट की गर्मी और संक्रमण को शांत करने के लिए एलोवेरा और गिलोय के जूस का सेवन करें।

स्वस्थ जीवन की प्राप्ति के लिए व्यक्तिगत स्तर पर स्वच्छता के नियमों का कड़ाई से पालन करना बेहद अनिवार्य हो गया है। खाना पकाने और खाने से पहले हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना, कच्ची सब्जियों और फलों को साफ पानी से बार-बार साफ करना और भोजन को हमेशा ढककर सुरक्षित तापमान पर रखना कुछ ऐसे बुनियादी उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर इस जानलेवा खतरे से काफी हद तक बचा जा सकता है। सरकारों और खाद्य नियामकों को भी कृषि स्तर से लेकर रिटेल मार्केट तक सख्त निगरानी तंत्र स्थापित करना होगा ताकि मिलावटखोरों पर लगाम कसी जा सके। जब तक हर नागरिक अपने भोजन के प्रति जागरूक नहीं होगा, तब तक इस खतरनाक अदृश्य दुश्मन को पूरी तरह से हराना नामुमकिन बना रहेगा।

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