'फांसी की सजा भी इसके लिए छोटी...' पुणे की अदालत ने 4 साल की बच्ची के हत्यारे और दुष्कर्मी को सुनाया मृत्युदंड
महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरपुर में चार साल की मासूम बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी 65 वर्षीय बुजुर्ग को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।

- पुणे मासूम दुष्कर्म और मर्डर केस में बड़ा फैसला: 65 वर्षीय दोषी को कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा, कहा- 'इसके लिए मृत्युदंड भी छोटा'
- पुणे कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 4 साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को फांसी की सजा
- Pune Nasarapur Case: नसरपुर में 4 साल की बच्ची से हैवानियत करने वाले दोषी को अदालत ने दी मौत की सजा
महाराष्ट्र के पुणे जिले से न्याय व्यवस्था की नजीर पेश करने वाला एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक अदालती फैसला सामने आया है। पुणे जिले के नसरपुर इलाके में महज चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में विशेष अदालत ने दोषी को सख्त से सख्त सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की गंभीरता और वहशीपन को देखते हुए 65 वर्षीय दोषी भीमराव (विनोध) कांबले को फांसी की सजा (मृत्युदंड) देने का आदेश जारी किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह के जघन्य और घिनौने कृत्य के लिए उम्रकैद की सजा किसी भी सूरत में पर्याप्त नहीं है। कानूनी प्रावधानों के तहत अब इस मामले को उच्च न्यायालय की पुष्टि के लिए भेजा जाएगा।
यह पूरा मामला समाज को झकझोर देने वाले उस जघन्य अपराध से जुड़ा है, जो पुणे के नसरपुर क्षेत्र में घटित हुआ था। यहां एक चार साल की मासूम बच्ची को अकेला पाकर दोषी ने न केवल उसके साथ डिजिटल और शारीरिक स्तर पर बेहद क्रूरतापूर्ण यौन उत्पीड़न (दुष्कर्म) किया, बल्कि अपनी पहचान छिपाने और साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस ने घटना के तत्काल बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) तथा भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे दोषी माना।
मामले के घटनाक्रम के अनुसार, पीड़ित बच्ची अपने घर के पास खेल रही थी, जब दोषी ने उसे बहला-फुसलाकर एकांत स्थान पर ले जाकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, जिसके बाद उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वैज्ञानिक साक्ष्य, फॉरेंसिक डीएनए (DNA) रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट को बेहद मजबूती से कोर्ट के सामने पेश किया।
विशेष अदालत के न्यायाधीश ने सजा का ऐलान करते हुए कहा कि यह मामला 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) की श्रेणी में आता है। सुनवाई के दौरान जज ने टिप्पणी की, "इस जघन्य और घिनौनी वारदात के लिए उम्रकैद की सजा काफी नहीं है। इसके लिए फांसी की सजा भी छोटी है, लेकिन कोर्ट के पास देने को इससे बड़ी सजा मौजूद नहीं है।" दोषी की ढलती उम्र (65 वर्ष) का हवाला देते हुए बचाव पक्ष ने रहम की अपील की थी, जिसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मासूम पर की गई क्रूरता के आगे उम्र की दलील को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अदालत का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष व्यक्त किया है। मृतका के माता-पिता ने कहा, "हमारी बच्ची तो वापस नहीं आ सकती, लेकिन इस दरिंदे को फांसी के फंदे तक पहुंचाकर अदालत ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है। हमें कानून पर पूरा भरोसा था।" दूसरी ओर, सरकारी वकील ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए यह साबित किया कि इस कृत्य में किसी भी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं थी। बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि वे इस फैसले के खिलाफ नियमानुसार बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर करेंगे।
इस फैसले का समाज और न्याय प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों में त्वरित सुनवाई और मृत्युदंड की सजा मिलने से अपराधियों में कानून का खौफ पैदा होगा। पुणे और आस-पास के क्षेत्रों के सामाजिक संगठनों ने इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस कठोर सजा की सराहना कर रहे हैं और इसे न्याय की जीत मान रहे हैं।
विशेष अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के तहत इस मामले के रिकॉर्ड को बॉम्बे हाई कोर्ट में 'डेथ रेफरेंस' (Death Reference) के रूप में भेजा जाएगा, जहां उच्च न्यायालय इस सजा की पुष्टि करेगा। जब तक उच्च न्यायालय से इस सजा की संपुष्टि नहीं हो जाती, तब तक दोषी को यरवदा केंद्रीय कारागार के हाई-सिक्योरिटी सेल में रखा जाएगा। पीड़ित परिवार को सहायता राशि और मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया भी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पूरी की जा रही है।
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