जवानी की दहलीज पर कैंसर का खतरा- 15 साल की उम्र से दिखने वाले 5 प्रमुख लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन किशोरावस्था में, खासकर 15 साल की उम्र के आसपास, कुछ प्रकार के कैंसर के लक्षण
कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन किशोरावस्था में, खासकर 15 साल की उम्र के आसपास, कुछ प्रकार के कैंसर के लक्षण दिखना शुरू हो सकते हैं। ये लक्षण अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे लगते हैं, इसलिए इन्हें नजरअंदाज करने से कैंसर का पता देर से चलता है और इलाज मुश्किल हो जाता है। किशोरों में कैंसर दुर्लभ है, लेकिन जब होता है तो हॉजकिन लिंफोमा, टेस्टिकुलर कैंसर, थायरॉइड कैंसर, मेलानोमा और ब्रेन ट्यूमर जैसे प्रकार आम हैं। इनमें से कई कैंसर के शुरुआती लक्षण समान होते हैं, जैसे लिंफ नोड्स में सूजन, थकान, वजन घटना, बुखार और दर्द। इन लक्षणों को जल्दी पहचानकर डॉक्टर से जांच कराना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती निदान से इलाज की सफलता दर बहुत अधिक होती है। किशोरावस्था में कैंसर के सबसे आम लक्षणों में से एक है लिंफ नोड्स का सूजन आना। गर्दन, बगल या groin क्षेत्र में बिना दर्द वाली गांठ या सूजन दिखना हॉजकिन लिंफोमा का प्रमुख संकेत हो सकता है। यह सूजन अक्सर संक्रमण के कारण भी होती है, लेकिन अगर यह कई हफ्तों तक बनी रहे और कोई स्पष्ट कारण न हो तो जांच जरूरी है। हॉजकिन लिंफोमा किशोरों में सबसे आम कैंसरों में से एक है, जो 15 से 19 साल की उम्र में पीक पर होता है। इसी तरह, टेस्टिकुलर कैंसर में टेस्टिकल में गांठ या सूजन प्रमुख लक्षण है, जो 15 से 35 साल के पुरुषों में आम है। यह गांठ आमतौर पर दर्द रहित होती है, लेकिन टेस्टिकल का आकार बढ़ना या भारीपन महसूस होना भी संकेत देता है।
दूसरा प्रमुख लक्षण है अस्पष्ट थकान या कमजोरी। किशोर अक्सर स्कूल, खेल या अन्य गतिविधियों के कारण थकान महसूस करते हैं, लेकिन अगर थकान लगातार बनी रहे और आराम से ठीक न हो तो यह लिंफोमा या ल्यूकेमिया का संकेत हो सकता है। थकान के साथ रात में पसीना आना या बुखार आना भी बी सिम्पटम्स कहलाते हैं, जो हॉजकिन लिंफोमा में आम हैं। ये लक्षण शरीर में कैंसर सेल्स के बढ़ने के कारण होते हैं, जो ऊर्जा खींच लेते हैं। किशोरों में यह लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाता है क्योंकि इसे बढ़ती उम्र का हिस्सा मान लिया जाता है। तीसरा लक्षण है बिना कारण वजन घटना। अगर खान-पान और व्यायाम सामान्य होने के बावजूद वजन तेजी से कम हो रहा हो तो यह कई कैंसरों का संकेत है। किशोरावस्था में मेटाबॉलिज्म तेज होता है, लेकिन अस्पष्ट वजन घटना लिंफोमा, ब्रेन ट्यूमर या अन्य कैंसर का शुरुआती चेतावनी हो सकती है। वजन घटने के साथ भूख कम लगना या पेट में असुविधा भी जुड़ सकती है। यह लक्षण विशेष रूप से हॉजकिन लिंफोमा में देखा जाता है, जहां शरीर कैंसर से लड़ने में ऊर्जा खर्च करता है। चौथा लक्षण है लगातार दर्द या हड्डियों में दर्द। किशोरों में बढ़ते शरीर के कारण दर्द आम है, लेकिन अगर दर्द रात में बढ़े या किसी विशेष जगह पर केंद्रित हो तो यह ऑस्टियोसारकोमा या अन्य बोन कैंसर का संकेत हो सकता है। इसी तरह, सिरदर्द जो सुबह बदतर हो या उल्टी के साथ हो, ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। टेस्टिकुलर कैंसर में groin या पेट में दर्द भी हो सकता है। ये दर्द अक्सर इंजरी या ग्रोथ पेन समझकर इग्नोर कर दिए जाते हैं, लेकिन लगातार बने रहने पर जांच जरूरी है।
पांचवां लक्षण है त्वचा में बदलाव या मस्से में परिवर्तन। मेलानोमा, जो किशोरों में बढ़ रहा है, का मुख्य लक्षण मस्से का आकार, रंग या आकृति बदलना है। अगर कोई मस्सा खुजली करे, खून बहाए या नया उभरे तो जांच करानी चाहिए। थायरॉइड कैंसर में गर्दन में सूजन या गांठ महसूस होना आम है, जो किशोरों में बढ़ रहा है। ये लक्षण दिखने में आसान हैं, लेकिन अक्सर सन एक्सपोजर या हार्मोनल चेंजेस का हिस्सा मान लिए जाते हैं। किशोरों में कैंसर का निदान देर से होने का मुख्य कारण लक्षणों का सामान्य बीमारियों से मिलता-जुलता होना है। डॉक्टर भी दुर्लभता के कारण पहले अन्य कारण मान लेते हैं। लेकिन अगर लक्षण कई हफ्तों तक बने रहें तो अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट या बायोप्सी जैसे टेस्ट कराए जा सकते हैं। टेस्टिकुलर कैंसर में सेल्फ एग्जामिनेशन महत्वपूर्ण है, जहां हर महीने टेस्टिकल्स की जांच करनी चाहिए। हॉजकिन लिंफोमा में लिंफ नोड्स की सूजन प्रमुख है, जिसकी बायोप्सी से पुष्टि होती है। कैंसर के ये लक्षण इग्नोर करने से बीमारी फैल सकती है, लेकिन शुरुआती स्टेज में इलाज से 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में पूर्ण ठीक होना संभव है। किशोरों में हॉजकिन लिंफोमा की सर्वाइवल रेट 95 प्रतिशत से अधिक है, और टेस्टिकुलर कैंसर लगभग ठीक हो जाता है। थायरॉइड कैंसर भी शुरुआत में पकड़ने पर आसानी से इलाज योग्य है। इसलिए, 15 साल की उम्र से अगर कोई असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नियमित चेकअप और सेल्फ अवेयरनेस से खतरे को कम किया जा सकता है।
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