ट्रंप की युद्धविराम घोषणा से वैश्विक बाजारों में उत्साह, कच्चे तेल की कीमतों में 15% की भारी गिरावट।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के 'द्विपक्षीय युद्धविराम' की घोषणा ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के समीकरणों को पूरी

- शेयर बाजार में लौटी रौनक: ट्रंप-ईरान समझौते के बाद ग्लोबल इंडेक्स में जबरदस्त उछाल, निवेशकों ने राहत की सांस ली
- शांति की पहल से बदला आर्थिक परिदृश्य: तेल के दाम $100 के नीचे फिसले, शेयर बाजार ने छुआ नई ऊंचाइयों का स्तर
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के 'द्विपक्षीय युद्धविराम' की घोषणा ने वैश्विक वित्तीय बाजारों के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। मंगलवार देर शाम हुई इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जिससे भाव 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गए। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में भी 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद तेल की कीमतों में एक ही दिन में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की इस पहल ने उस अनिश्चितता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है जिसने पिछले कई हफ्तों से ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बाधित कर रखा था।
युद्धविराम के समझौते की शर्तों के तहत ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को तत्काल प्रभाव से खोलने पर सहमत हो गया है। इस जलमार्ग के माध्यम से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, और इसका बंद होना वैश्विक ऊर्जा संकट का एक बड़ा कारण बना हुआ था। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह दो सप्ताह का समय दोनों पक्षों को दीर्घकालिक शांति वार्ता के लिए एक मंच प्रदान करेगा। जैसे ही यह खबर व्यापारिक टर्मिनलों पर पहुंची, तेल वायदा बाजार में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया, क्योंकि व्यापारियों ने उस युद्ध प्रीमियम को हटाना शुरू कर दिया जो संघर्ष की स्थिति में कीमतों को $117 प्रति बैरल तक ले गया था। तेल की कीमतों में गिरावट से पेंट, टायर, विमानन और तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में 5% से 8% तक की जबरदस्त बढ़त देखी गई है।
शेयर बाजारों की बात करें तो ट्रंप की घोषणा के बाद अमेरिकी और एशियाई बाजारों में 'राहत रैली' देखने को मिली। वॉल स्ट्रीट पर डॉव फ्यूचर्स में 900 अंकों से अधिक का उछाल आया, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। निवेशकों के बीच यह धारणा बन गई है कि यदि यह युद्धविराम स्थायी शांति में बदलता है, तो मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आएगी और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में कटौती करने का अवसर मिल सकता है। भारतीय शेयर बाजार ने भी इस वैश्विक सकारात्मकता का अनुसरण किया, जहाँ सेंसेक्स और निफ्टी ने शुरुआती कारोबार में ही 1.5 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाकर निवेशकों के पोर्टफोलियो में करोड़ों रुपये जोड़ दिए।
इस कूटनीतिक सफलता में पाकिस्तान की मध्यस्थता को भी एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह सैन्य टकराव के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक समाधानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस समझौते ने न केवल कच्चे तेल बल्कि विमानन ईंधन और गैसोलीन की कीमतों में भी नरमी लाने का मार्ग प्रशस्त किया है, जो हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर पहुंच गए थे। हालांकि, बाजार के कुछ जानकार अभी भी सतर्क हैं, क्योंकि यह केवल दो सप्ताह का अस्थायी समझौता है। यदि इस अवधि के दौरान वार्ता विफल होती है, तो बाजार में पुनः अस्थिरता आने की संभावना बनी हुई है, जिससे वर्तमान लाभ कम हो सकते हैं।
वैश्विक बांड बाजार में भी इस घटनाक्रम की सकारात्मक प्रतिक्रिया हुई है। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई है, जो सुरक्षित निवेश से हटकर जोखिम वाले संपत्तियों (शेयरों) की ओर पूंजी के प्रवाह को दर्शाता है। ऊर्जा की कम कीमतों का सीधा लाभ विनिर्माण क्षेत्र को मिलेगा, जिससे औद्योगिक उत्पादन लागत में कमी आएगी। विशेष रूप से भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे देश के व्यापार घाटे को कम करने और रुपये की स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। लॉजिस्टिक्स और परिवहन कंपनियों ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है, क्योंकि ईंधन की कम लागत सीधे उनके मुनाफे को बढ़ाएगी।
तकनीकी मोर्चे पर, सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भी कुछ मुनाफावसूली देखी गई, क्योंकि निवेशकों ने अपना ध्यान फिर से इक्विटी बाजार की ओर मोड़ दिया है। ट्रंप का यह कदम उनके 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे और घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने की नीति के अनुरूप माना जा रहा है। अमेरिकी जनता भी बढ़ती गैस कीमतों से परेशान थी, और इस युद्धविराम ने राजनीतिक रूप से भी ट्रंप को बढ़त दिलाई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि अगले 14 दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे। यदि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता सकारात्मक रहती है, तो हम तेल की कीमतों को $85-$90 के स्तर पर स्थिर होते देख सकते हैं।
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