लश्कर-ए-तैयबा के फिदायीन आतंकियों की अजीबोगरीब दास्तां, भारत में तबाही मचाने का मिशन हुआ फेल।
जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा बलों की कड़ी मुस्तैदी और खुफिया एजेंसियों के सटीक नेटवर्क के कारण सीमा
- पहचान छुपाने और लुक बदलने के फेर में सैलून पहुंचे दहशतगर्द, आधुनिक मेकओवर कराते ही पुलिस ने दबोचा
- पाकिस्तानी हैंडलर्स के मंसूबों पर फिरा पानी, क्लीन शेव और फैशनेबल बनने की चाहत ने पहुंचाया जेल
जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा बलों की कड़ी मुस्तैदी और खुफिया एजेंसियों के सटीक नेटवर्क के कारण सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और आतंकी साजिशों को लगातार नाकाम किया जा रहा है। इसी कड़ी में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के पास से एक बेहद अजीबोगरीब और सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल देने वाला मामला सामने आया है। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ प्रशिक्षित फिदायीन आतंकवादी भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों और गोला-बारूद के साथ भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे। उनका मुख्य उद्देश्य देश के किसी बड़े महानगर या सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना बनाकर भारी तबाही मचाना था। लेकिन भारतीय सुरक्षा तंत्र के डर और स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान को पूरी तरह से छुपाने की जल्दबाजी में ये आतंकवादी अपने मुख्य मिशन को ही भूल गए। वे एक स्थानीय बाजार में अपने लुक को पूरी तरह से बदलने के चक्कर में ऐसे फंसे कि बिना एक भी गोली चलाए सीधे कानून के शिकंजे में आ गए।
सुरक्षा बलों द्वारा पकड़े गए इन आतंकवादियों से की गई शुरुआती पूछताछ और जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे आतंकवाद के बदलते तौर-तरीकों और उनके भीतर व्याप्त खौफ की कहानी बयां करते हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुजफ्फराबाद स्थित ट्रेनिंग कैंपों से विशेष कमान्डो ट्रेनिंग लेकर निकले ये दहशतगर्द पारंपरिक लिबास और लंबी दाढ़ी के साथ भारत में घुसे थे। भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद उन्हें यह अहसास हुआ कि सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन चेकिंग अभियान और सीसीटीवी कैमरों के जाल के कारण वे अपने इस हुलिए में ज्यादा दूर तक सफर नहीं कर पाएंगे। अपनी इस घबराहट के कारण उन्होंने तय किया कि वे किसी बड़े हमले को अंजाम देने से पहले खुद को पूरी तरह से एक आधुनिक और शहरी युवक के रूप में ढालेंगे। इसी मेकओवर की चाहत उन्हें सीधे सुरक्षा एजेंसियों के जाल की तरफ ले गई।
यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब ये संदिग्ध आतंकवादी छुपते-छुपाते एक अर्ध-शहरी इलाके के मुख्य बाजार में स्थित एक आलीशान मेंस सैलून (ब्यूटी पार्लर) में पहुंचे। वे वहां आम ग्राहकों की तरह अपनी बारी का इंतजार करने लगे और उन्होंने सैलून के कर्मचारियों से अपना हुलिया पूरी तरह बदलने को कहा। वे अपनी पारंपरिक दाढ़ी को पूरी तरह साफ कराकर (क्लीन शेव) आधुनिक हेयर स्टाइल रखना चाहते थे ताकि वे आम कॉलेज जाने वाले छात्रों या कामकाजी युवाओं जैसे दिख सकें। हालांकि, सैलून में मौजूद स्टाफ और स्थानीय लोगों को उनके बात करने के लहजे, उनके पास मौजूद भारी-भरकम पिठ्ठू बैगों और उनके शरीर की बनावट को देखकर गहरा संदेह हो गया। पहाड़ी रास्तों से चलकर आने के कारण उनके कपड़ों पर लगी मिट्टी और उनके चेहरे पर दिख रही भयंकर घबराहट ने स्थानीय लोगों के शक को यकीन में बदल दिया, जिसके बाद बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत पुलिस को इस बात की गुप्त सूचना दे दी गई।
सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) ने सादे कपड़ों में पूरे बाजार और सैलून को चारों तरफ से घेर लिया। जैसे ही आतंकवादी सैलून की कुर्सियों पर बैठकर अपना मेकओवर करा रहे थे, सुरक्षा बलों ने उन्हें बिना किसी प्रतिरोध का मौका दिए अचानक दबोच लिया। तलाशी लेने पर उनके बैगों से भारी मात्रा में अत्याधुनिक विदेशी हथियार, जीपीएस डिवाइस और जाली भारतीय मुद्रा बरामद की गई।
गिरफ्तारी के बाद जब इन आतंकियों को कड़े सुरक्षा घेरे में खुफिया पूछताछ केंद्र ले जाया गया, तो उन्होंने अपने पाकिस्तानी आकाओं की पूरी साजिश का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों ने उन्हें भारत के भीतर एक बहुत बड़े आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी दी थी और इसके लिए उन्हें महीनों तक शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया गया था। लेकिन भारत की धरती पर कदम रखते ही सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और चौकियों को देखकर उनका हौसला पूरी तरह से टूट गया था। उन्हें लगा कि अगर वे अपने पुराने हुलिए में आगे बढ़े तो चंद किलोमीटर के भीतर ही मारे जाएंगे। इसी मौत के डर से बचने के लिए उन्होंने अपने हैंडलर्स के आदेशों को दरकिनार करते हुए पहले अपना लुक बदलने का आत्मघाती फैसला लिया, जो अंततः उनकी सलाखों के पीछे पहुंचने की मुख्य वजह बना।
इस पूरी घटना ने सीमा पार बैठे आतंकी आकाओं की रणनीतिक विफलता को भी पूरी दुनिया के सामने लाकर रख दिया है। डिजिटल मैपिंग और आधुनिक तकनीक के इस दौर में अब आतंकियों के लिए स्थानीय स्तर पर छुपना या अपनी पहचान बदल पाना नामुमकिन होता जा रहा है। पकड़े गए आतंकियों के पास से मिले डिजिटल दस्तावेजों और मोबाइल फोनों से यह भी पता चला है कि वे सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से आधुनिक शहरी जीवनशैली से काफी प्रभावित थे। यही वजह थी कि भारत में घुसने के बाद वे जिहाद और आतंक के रास्ते को छोड़कर अपनी जान बचाने और फैशनेबल दिखने की कशमकश में उलझ गए। सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यह घटना दर्शाती है कि अब आतंकियों के मन में भारतीय सुरक्षा तंत्र का कितना गहरा भय बैठ चुका है।
सुरक्षा एजेंसियों ने इस सफल ऑपरेशन के बाद पूरे इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस गिरोह के कुछ अन्य सदस्य भी किसी अन्य इलाके में हुलिया बदलकर छिपे हुए हैं। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों की सतर्कता की भी जमकर सराहना की जा रही है, क्योंकि उनकी सजगता के कारण ही देश एक बहुत बड़े संभावित आतंकी हमले से बच गया। यदि ये आतंकवादी अपना लुक बदलने में कामयाब हो जाते, तो भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में इन्हें ढूंढ पाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता था। पकड़े गए सभी आतंकियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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