निक्की हेली का ट्रंप को कड़ा संदेश- भारत पर टैरिफ लगाकर सहयोगी से रिश्ते न बिगाड़ें, चीन को न दें छूट।

International: संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव की कड़ी....

Aug 6, 2025 - 11:12
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निक्की हेली का ट्रंप को कड़ा संदेश- भारत पर टैरिफ लगाकर सहयोगी से रिश्ते न बिगाड़ें, चीन को न दें छूट।
निक्की हेली का ट्रंप को कड़ा संदेश- भारत पर टैरिफ लगाकर सहयोगी से रिश्ते न बिगाड़ें, चीन को न दें छूट।

मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव की कड़ी आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम अमेरिका-भारत के रणनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है, जो इस समय बेहद महत्वपूर्ण हैं। हेली ने ट्रंप प्रशासन पर चीन के प्रति नरमी बरतने का भी आरोप लगाया, खासकर चीन को 90 दिनों की टैरिफ छूट देने के फैसले को लेकर। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, "भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, लेकिन चीन, जो हमारा प्रतिद्वंद्वी है और रूस व ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, उसे 90 दिन की टैरिफ छूट मिल जाती है। चीन को छूट न दें और भारत जैसे मजबूत सहयोगी के साथ रिश्ते न बिगाड़ें।"

मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने सीएनबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि वह अगले 24 घंटों में भारत के निर्यात पर भारी टैरिफ लगाएंगे। उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस से भारी मात्रा में तेल खरीदकर और उसे खुले बाजार में बेचकर यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, "भारत न केवल रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहा है, बल्कि उसे खुले बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहा है। उन्हें यूक्रेन में रूसी युद्ध मशीन से मरने वाले लोगों की कोई परवाह नहीं है।"

ट्रंप ने 01 अगस्त 2025 से भारत पर 25% टैरिफ और रूस से तेल व हथियार खरीदने के लिए अतिरिक्त दंड की घोषणा की थी। इस बार उन्होंने टैरिफ की दर को और बढ़ाने की धमकी दी, हालांकि नई दर या लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की। ट्रंप ने भारत को "अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं" बताते हुए कहा कि भारत अमेरिका के साथ बहुत व्यापार करता है, जबकि अमेरिका भारत के साथ कम व्यापार करता है।

निक्की हेली, जो भारतीय मूल की अमेरिकी नेता और रिपब्लिकन पार्टी की प्रमुख आवाज हैं, ने ट्रंप के इस कदम को गलत ठहराया। उन्होंने X पर लिखा, "भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, लेकिन चीन, जो हमारा प्रतिद्वंद्वी और रूस व ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, उसे 90 दिन की टैरिफ छूट मिली। चीन को छूट न दें और भारत जैसे मजबूत सहयोगी के साथ रिश्ते न बिगाड़ें।" हेली ने ट्रंप प्रशासन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया, क्योंकि चीन, जो रूस और ईरान से तेल खरीदने में सबसे आगे है, को 90 दिन की टैरिफ छूट दी गई है।

हेली लंबे समय से अमेरिका-भारत संबंधों की समर्थक रही हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ गठजोड़ को मजबूत करने की वकालत की है ताकि चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। हेली ने ट्रंप के पहले कार्यकाल में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत के रूप में काम किया था और वह पहली भारतीय-अमेरिकी थीं, जिन्हें कैबिनेट-स्तरीय पद मिला।

भारत ने ट्रंप की धमकी को "अनुचित और अनैतिक" बताते हुए कड़ा जवाब दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 04 अगस्त 2025 को एक बयान में कहा, "भारत ने रूस से तेल आयात 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद तब शुरू किया, जब पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी। अमेरिका ने ही भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता के लिए रूस से तेल आयात करने के लिए प्रोत्साहित किया था।"

भारत ने यह भी बताया कि अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) स्वयं रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं। 2024 में ईयू का रूस के साथ व्यापार 67.5 बिलियन यूरो और 2023 में सेवा व्यापार 17.2 बिलियन यूरो था, जो भारत के रूस के साथ कुल व्यापार से कहीं अधिक है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम, उर्वरक और रसायन आयात करता है, जो उसके इलेक्ट्रिक वाहन और परमाणु उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि भारत का रूस के साथ तेल व्यापार पारदर्शी है और यह वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर करने में मदद करता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की तेल रिफाइनरियां, चाहे सरकारी हों या निजी, तेल खरीद के फैसले कीमत, आपूर्ति सुरक्षा और निर्यात नियमों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लेती हैं।

रूस ने भी भारत का समर्थन करते हुए ट्रंप के बयान को "अवैध धमकी" करार दिया। क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेसकोव ने कहा, "रूस के व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ बयान वास्तव में धमकियां हैं। हम ऐसी धमकियों को अवैध मानते हैं।" रूस का यह बयान दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों पर बाहरी दबाव का दोनों देश मिलकर जवाब दे रहे हैं।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण हैं। 2024-25 में भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष 41 बिलियन डॉलर था। भारत मुख्य रूप से दवाइयां, पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और वस्त्र अमेरिका को निर्यात करता है। ट्रंप के प्रस्तावित टैरिफ से इन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। भारतीय रेटिंग एजेंसी ICRA ने 04 अगस्त 2025 को भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 6.2% से घटाकर 6.0% कर दिया, जिसमें अमेरिका के साथ व्यापार तनाव को एक कारण बताया गया।

हालांकि, कुछ क्षेत्र जैसे दवाइयां, जो भारत के अमेरिका को निर्यात का 37% हिस्सा हैं, और पेट्रोलियम उत्पाद व टेलीकॉम उपकरण अपेक्षाकृत सुरक्षित रह सकते हैं, क्योंकि ये अमेरिकी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन वस्त्र, ऑटो पार्ट्स, रसायन और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।

निक्की हेली ने हमेशा भारत को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में और उसके बाद भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करने की वकालत की है। हेली का मानना है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देशों के साथ गठजोड़ से चीन के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सकता है। उनकी यह टिप्पणी रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ट्रंप की नीतियों के प्रति असहमति को भी दर्शाती है।

हेली की टिप्पणी का एक अन्य पहलू यह है कि ट्रंप ने हाल ही में चीन के साथ व्यापार वार्ता को बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने सीएनबीसी को बताया कि वह वर्ष के अंत तक चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर सकते हैं, बशर्ते कोई व्यापार समझौता हो। यह बयान ट्रंप की चीन के प्रति नरम रुख को दर्शाता है, जिसे हेली ने दोहरा मापदंड करार दिया।

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के अनुसार, जनवरी से जून 2025 तक भारत ने प्रतिदिन लगभग 1.75 मिलियन बैरल रूसी तेल आयात किया, जो पिछले साल की तुलना में 1% अधिक है। भारत ने इस व्यापार को राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है। अगर भारत रूस से तेल खरीद बंद कर दे, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं को भारी नुकसान होगा।

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह रूस से तेल आयात जारी रखेगा, क्योंकि ये दीर्घकालिक अनुबंधों पर आधारित हैं। दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत रूस से तेल खरीद को रातोंरात बंद नहीं कर सकता। हालांकि, कुछ भारतीय रिफाइनरियों ने जुलाई में रूसी तेल की खरीद कम की थी, क्योंकि छूट की दर 2022 के बाद सबसे कम थी।

ट्रंप की धमकी से भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। फरवरी 2025 में ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन अब यह तनाव एक नई चुनौती बन सकता है। भारत ने अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर देते हुए कहा कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।

निक्की हेली का ट्रंप को दिया गया संदेश भारत-अमेरिका संबंधों की रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। उन्होंने ट्रंप के भारत पर भारी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव की आलोचना करते हुए चीन को दी गई 90 दिन की टैरिफ छूट पर सवाल उठाया। भारत ने भी ट्रंप की आलोचना को अनुचित बताते हुए अमेरिका और ईयू के रूस के साथ व्यापार को सामने रखा।

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