युद्धविराम के समझौतों के बीच सुलग उठा लेबनान, इजरायली सेना ने की 150 ठिकानों पर भीषण बमबारी
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और वहां के आपातकालीन केंद्रों से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस नए संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक हजारों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालिया चौबीस घंटों में हुए हमलों
- अमेरिकी मध्यस्थता की कोशिशों को लगा बड़ा झटका, दक्षिणी हिस्से में सैन्य कार्रवाई से दहल उठा बेरूत
- सशर्त शांति वार्ता के दावों के बीच थमता नहीं दिख रहा संघर्ष, हमलों में सेना के उच्चाधिकारियों समेत कई मौतें
मिडिल ईस्ट यानी मध्य पूर्व के अशांत क्षेत्रों में शांति बहाली की तमाम अंतरराष्ट्रीय कोशिशों और राजनयिक वार्ताओं के बीच एक बार फिर युद्ध की विभीषिका ने भीषण रूप अख्तियार कर लिया है। अमेरिकी प्रशासन की सीधी मध्यस्थता और वैश्विक दबाव के बाद दोनों पक्षों के बीच एक सशर्त युद्धविराम पर सैद्धांतिक सहमति बनने की खबरें अभी पूरी तरह ठंडी भी नहीं हुई थीं कि इजरायल की वायुसेना और जमीनी तंत्र ने दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से को अपने नए और घातक हमलों से दहला दिया। सैन्य सूत्रों से प्राप्त हालिया जानकारियों के मुताबिक, इजरायली रक्षा बलों ने पिछले अड़तालीस घंटों के भीतर लेबनान के दक्षिणी फ्रंट पर स्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह के लगभग एक सौ पचास महत्वपूर्ण ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इन हमलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि सीमावर्ती इलाकों से लेकर Nabatieh और Tyre जैसे बड़े शहरों के आस-पास के क्षेत्र काले धुएं और मलबे के ढेर में तब्दील हो गए, जिससे क्षेत्र में अस्थाई शांति की उम्मीद लगाए बैठे नागरिकों में फिर से खौफ का माहौल पैदा हो गया है।
राजनयिक स्तर पर वाशिंगटन और अन्य प्रमुख वैश्विक राजधानियों में जारी त्रिपक्षीय वार्ताओं के समानांतर चल रही यह सैन्य कार्रवाई साफ संकेत देती है कि तेल अवीव का राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व किसी भी तरह के बाहरी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रणनीतिक मोर्चे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी सुरक्षा संबंधी शर्तें और सीमा पार से होने वाले खतरों का पूरी तरह से खात्मा नहीं हो जाता, तब तक सैन्य अभियान को विराम नहीं दिया जाएगा। इस अड़ियल रुख का सीधा असर जमीन पर दिखाई दे रहा है, जहां भारी गोलाबारी, हवाई हमलों और ड्रोन ऑपरेशन्स के जरिए हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद किया जा रहा है। सैन्य कमान का दावा है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन हथियारों के भंडारों, कमांड सेंटरों और रॉकेट लॉन्चिंग पैड्स को तबाह करना है, जिनका इस्तेमाल इजरायली भूभाग और सीमा पर तैनात सैनिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा था।
इस नए सैन्य उबाल में सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह रहा है कि इस बार इजरायली हमलों की चपेट में सीधे तौर पर लेबनान की संप्रभु सेना भी आ गई है। दक्षिणी लेबनान के Kfar Tebnit और Khardali के बीच मुख्य मार्ग पर सफर कर रहे लेबनानी सशस्त्र बलों के एक आधिकारिक सैन्य वाहन पर किए गए सटीक इजरायली हमले में कम से कम बारह लोगों की जान चली गई है, जिनमें लेबनानी सेना के एक अत्यंत उच्च पदस्थ ब्रिगेडियर जनरल, एक कैप्टन और एक अन्य नियमित सैनिक शामिल हैं। लेबनानी सेना, जो इस पूरे संघर्ष के दौरान ऐतिहासिक रूप से इजरायल और हिजबुल्लाह की सीधी लड़ाई से खुद को दूर रखती आई है, उसके शीर्ष अधिकारियों का इस तरह मारा जाना एक नए और बड़े रणनीतिक संकट को जन्म दे रहा है। इस घटना के बाद लेबनान के रक्षा मंत्रालय और वहां के प्रशासन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है, क्योंकि इसे देश की राष्ट्रीय संप्रभुता पर सीधे प्रहार के रूप में देखा जा रहा है।
सक्रिय युद्ध क्षेत्र का संकट: इजरायली सैन्य कमान ने बाद में इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने लेबनानी सेना के वाहन पर हमला किया था, लेकिन इसके पीछे तर्क दिया गया कि वह वाहन एक अत्यधिक संवेदनशील और सक्रिय युद्ध क्षेत्र में बिना पूर्व सूचना और बिना किसी आवश्यक समन्वय के संदिग्ध रूप से गति कर रहा था, जिसके चलते सैनिकों ने इसे संभावित खतरा मानकर निशाना बनाया।
युद्धविराम के समझौतों के बाद भी इस स्तर पर हो रही हिंसा ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है, क्योंकि कागजों पर हुए वादे जमीन पर पूरी तरह निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं। अमेरिकी मध्यस्थों द्वारा तैयार किए गए शांति मसौदे के तहत यह शर्त रखी गई थी कि हिजबुल्लाह के तमाम लड़ाके और उनका सैन्य साजो-सामान लितानी नदी के उत्तरी हिस्से की तरफ पूरी तरह पीछे हट जाएंगे, जिसके बाद इजरायली सेना भी उन इलाकों को खाली कर देगी। हालांकि, जमीन पर स्थिति इसके उलट है; हिजबुल्लाह ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक इजरायली सेना लेबनानी सरजमीं पर मौजूद रहेगी और हवाई क्षेत्रों का उल्लंघन करेगी, तब तक उनका प्रतिरोध और ड्रोन हमले जारी रहेंगे। इस गतिरोध के कारण इजरायली सेना ने Zahrani नदी के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले स्थानीय नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं, जिसका मतलब है कि आने वाले दिनों में सैन्य अभियानों का दायरा और अधिक आक्रामक होने वाला है।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और वहां के आपातकालीन केंद्रों से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस नए संघर्ष की शुरुआत से लेकर अब तक हजारों निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है और घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हालिया चौबीस घंटों में हुए हमलों ने न केवल रिहायशी इमारतों को मलबे में बदला है, बल्कि चिकित्सा बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें Nabatieh जिले के Zebdine कस्बे और अन्य हिस्सों में बचाव कार्य में जुटे पैरामेडिक्स और एम्बुलेंस चालकों की भी मौतें हुई हैं। रिहायशी इलाकों के ठीक बीचों-बीच बने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाने की इजरायली रणनीति के कारण आम नागरिकों, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बाहरी देशों के कामगार भी शामिल हैं, उन्हें सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अस्पतालों के नजदीक और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाले इन हमलों ने पूरे दक्षिणी और पूर्वी लेबनान की स्वास्थ्य व्यवस्था को चरमरा कर रख दिया है।
रणनीतिक विश्लेषकों के नजरिए के बिना भी अगर इस स्थिति को देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि यह संघर्ष केवल दो पक्षों की क्षेत्रीय लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे व्यापक भू-राजनीतिक हित काम कर रहे हैं। ईरान समर्थित गुटों और इजरायल के बीच चल रही इस शह और मात के खेल में लेबनान एक ऐसी रणभूमि बन चुका है जहां की आम जनता और वहां की राष्ट्रीय सेना बिना किसी प्रत्यक्ष भागीदारी के भी इसकी कीमत चुका रही है। वाशिंगटन में हुए समझौते के तहत जिन त्रिपक्षीय नियमों को लागू करने की बात कही गई थी, वे दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास की खाई को पाटने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं, क्योंकि हर एक पक्ष दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाकर अपनी आक्रामक कार्रवाइयों को सही ठहराने की कोशिश में जुटा रहता है।
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