इजरायल का तेहरान पर हवाई हमला, मेहराबाद एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त, ईरान की सैन्य क्षमता को गहरा झटका, फाइटर जेट्स नष्ट

हमले में ईरान के कई फाइटर जेट्स भी नष्ट हो गए, जो इजरायली वायु सेना के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। इजरायली सेना ने कहा कि ये जेट्स ईरान के हवाई क्षेत्र में इजरायली विमानों पर हमला क

Mar 8, 2026 - 11:11
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इजरायल का तेहरान पर हवाई हमला, मेहराबाद एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त, ईरान की सैन्य क्षमता को गहरा झटका, फाइटर जेट्स नष्ट
इजरायल का तेहरान पर हवाई हमला, मेहराबाद एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त, ईरान की सैन्य क्षमता को गहरा झटका, फाइटर जेट्स नष्ट

इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान के मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़े हवाई हमले को अंजाम दिया है, जिसने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। यह हमला 7 मार्च 2026 की रात को हुआ, जब इजरायली वायु सेना के दर्जनों फाइटर जेट्स ने तेहरान और उसके आसपास के सैन्य ठिकानों पर हमला किया। इजरायली सेना ने दावा किया कि मेहराबाद एयरपोर्ट को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि यह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की क्यूड्स फोर्स का प्रमुख केंद्र था, जहां से लेबनान के हिजबुल्लाह संगठन को हथियार और धन की सप्लाई की जाती थी। हमले में एयरपोर्ट के रनवे, हैंगर और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा, जिससे तेहरान में कई घंटों तक धुएं के बादल छाए रहे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि विस्फोटों की आवाज पूरे शहर में सुनाई दी और आग की लपटें दूर से दिखाई दे रही थीं।

इजरायली सेना ने कहा कि इस ऑपरेशन में 80 से अधिक फाइटर जेट्स शामिल थे, जो ईरान के हवाई क्षेत्र में घुसकर हमले कर रहे थे। हमले में कम से कम 16 सैन्य विमान नष्ट हो गए, जो क्यूड्स फोर्स के थे और हिजबुल्लाह को हथियार पहुंचाने में इस्तेमाल होते थे। ईरान की ओर से इस हमले पर तत्काल प्रतिक्रिया आई, जहां राज्य मीडिया ने इसे इजरायल और अमेरिका की साजिश बताया और कहा कि ईरान का हवाई रक्षा तंत्र सक्रिय था। हालांकि, ईरान ने किसी बड़े जवाबी हमले की घोषणा नहीं की, लेकिन तेहरान में एयर रेड सायरन बजाए गए। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि मध्य पूर्व में पहले से ही इजरायल-हिजबुल्लाह और इजरायल-हमास संघर्ष चल रहा है, और ईरान की इसमें भूमिका प्रमुख है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

मेहराबाद एयरपोर्ट तेहरान का प्रमुख घरेलू हवाई अड्डा है, जो व्यावसायिक उड़ानों के अलावा सैन्य उद्देश्यों के लिए भी उपयोग किया जाता है। इजरायली सेना के बयान के अनुसार, यह एयरपोर्ट आईआरजीसी की क्यूड्स फोर्स का एक महत्वपूर्ण केंद्र था, जहां से हिजबुल्लाह को हथियार, गोला-बारूद और धन की सप्लाई की जाती थी। क्यूड्स फोर्स ईरान की विदेशी सैन्य गतिविधियों को संभालती है और लेबनान, सीरिया तथा अन्य क्षेत्रों में ईरान-समर्थित मिलिशिया को सहायता प्रदान करती है। इजरायल ने दावा किया कि हमले में 16 ऐसे सैन्य विमान नष्ट हो गए, जो हथियारों की ढुलाई में लगे थे। ये विमान एयरपोर्ट के सैन्य हिस्से में खड़े थे और इजरायली मिसाइलों से पूरी तरह तबाह हो गए। एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे में रनवे, कंट्रोल टावर और फ्यूल स्टोरेज की सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा, जिससे तेहरान में घरेलू उड़ानें कई घंटों तक प्रभावित रहीं। ईरान की राज्य समाचार एजेंसी ने पुष्टि की कि एयरपोर्ट के पास धमाके हुए और आग लगी, लेकिन नागरिकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। इजरायल ने कहा कि हमला सटीक था और नागरिक क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन ईरान ने इसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला बताकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शिकायत की। इस हमले ने हिजबुल्लाह की सप्लाई चेन को गहरा झटका दिया है, क्योंकि ईरान हिजबुल्लाह को मिसाइलें और अन्य हथियार प्रदान करता रहा है। लेबनान में हिजबुल्लाह ने इस हमले की निंदा की और कहा कि यह क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहा है।

हमले में ईरान के कई फाइटर जेट्स भी नष्ट हो गए, जो इजरायली वायु सेना के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। इजरायली सेना ने कहा कि ये जेट्स ईरान के हवाई क्षेत्र में इजरायली विमानों पर हमला करने की क्षमता रखते थे, इसलिए इन्हें पहले से निशाना बनाया गया। ईरान की वायु सेना मुख्य रूप से पुराने रूसी और अमेरिकी जेट्स पर निर्भर है, और इस हमले से उसकी सैन्य क्षमता को गंभीर क्षति पहुंची है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास लगभग 300 फाइटर जेट्स हैं, लेकिन इनमें से कई पुराने हैं और रखरखाव की समस्या से जूझ रहे हैं। हमले में नष्ट हुए जेट्स Su-24 या MiG-29 जैसे हो सकते हैं, जो ईरान की मुख्य वायु शक्ति का हिस्सा हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ जब ईरान पहले से ही आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य चुनौतियों से जूझ रहा है। ईरान ने दावा किया कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ने कई इजरायली मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन कुछ हमले सफल रहे।

तेहरान में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय थे और सायरन बजाए गए, जिससे निवासी बंकरों में छिप गए। इस घटना ने ईरान की सैन्य ताकत पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इजरायली जेट्स ईरान के हवाई क्षेत्र में घुसकर हमला कर सके। अमेरिका ने इस हमले पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन इजरायल को अपना सहयोगी बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है। गोवा मुक्ति संग्राम 1961 में भारत के लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन यहां ईरान-इजरायल संघर्ष का संदर्भ अलग है। हिजबुल्लाह ईरान-समर्थित संगठन है, जो लेबनान में इजरायल के खिलाफ लड़ता है और हजारों मिसाइलों का जखीरा रखता है।

यह हमला इजरायल की 'ऑपरेशन रोअरिंग लायन' या इसी तरह की रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां इजरायल ईरान की सैन्य सप्लाई लाइन्स को तोड़ने पर फोकस कर रहा है। इजरायल ने कहा कि मेहराबाद एयरपोर्ट से हिजबुल्लाह को हथियार भेजे जा रहे थे, जो लेबनान में इजरायली शहरों पर हमले के लिए इस्तेमाल होते हैं। हिजबुल्लाह ने पिछले महीनों में इजरायल पर हजारों रॉकेट दागे हैं, जिसके जवाब में इजरायल ने लेबनान और सीरिया में हमले किए हैं। अब तेहरान पर सीधा हमला ईरान को संघर्ष में और खींच सकता है। ईरान ने कहा कि वह जवाब देगा, लेकिन अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर है और युद्ध में उलझना उसके लिए घातक हो सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि अगर ईरान इजरायल पर हमला करेगा तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। इस हमले ने तेल की कीमतों में उछाल ला दिया है, क्योंकि ईरान प्रमुख तेल उत्पादक है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 5 प्रतिशत बढ़ गईं।

हमले के बाद तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और एयरपोर्ट के आसपास सैन्य टुकड़ियां तैनात हैं। ईरानी मीडिया ने दिखाया कि एयरपोर्ट पर आग बुझाने का काम चल रहा है और कुछ हिस्सों को बंद कर दिया गया है। निवासियों ने बताया कि विस्फोटों से घर हिल गए और बच्चे डर से रोने लगे। इजरायल ने हमले को 'व्यापक' बताया और कहा कि 230 से अधिक बम गिराए गए। यह इजरायल का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है। ईरान की सुप्रीम लीडर की मौत की अफवाहें भी फैलीं, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इन्हें खारिज किया। इस घटना ने मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को झटका दिया है, जहां पहले से ही युद्ध चल रहा है। रूस और चीन ने इजरायल की निंदा की, जबकि पश्चिमी देशों ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।

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