जालना में स्वतंत्रता दिवस पर प्रदर्शनकारी पर पुलिस कार्रवाई, पुलिस उपाधीक्षक अनंत कुलकर्णी ने एक प्रदर्शनकारी को लात मारी, वायरल वीडियो से विवाद
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी अमित चौधरी और गोपाल चौधरी पिछले एक महीने से जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने उपोषण पर बैठे थे। उनकी शिकायत थी कि गोपाल चौधरी की पत्नी ने दो
महाराष्ट्र के जालना जिले में 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विवादास्पद घटना घटी। इस दिन राज्य की गार्डियन मिनिस्टर पंकजा मुंडे जालना में ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने आई थीं। जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने पिछले एक महीने से अपनी मांगों को लेकर उपोषण कर रहे प्रदर्शनकारियों ने मंत्री से मिलने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अनंत कुलकर्णी ने एक प्रदर्शनकारी को लात मार दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस घटना ने पुलिस की कार्रवाई और संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी अमित चौधरी और गोपाल चौधरी पिछले एक महीने से जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने उपोषण पर बैठे थे। उनकी शिकायत थी कि गोपाल चौधरी की पत्नी ने दो साल पहले उन्हें छोड़ दिया और जलगांव में किसी अन्य व्यक्ति से शादी कर ली। इस मामले में पुलिस ने उनके ससुराल वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में रिश्वत ली है। स्वतंत्रता दिवस के दिन जब पंकजा मुंडे जालना पहुंचीं, तो प्रदर्शनकारियों ने अपनी शिकायत सीधे उन तक पहुंचाने की कोशिश की और उनका काफिला रोकने का प्रयास किया।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिस दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। वायरल वीडियो में दिखता है कि डीएसपी अनंत कुलकर्णी एक प्रदर्शनकारी, गोपाल चौधरी, को पीछे से लात मारते हैं, जबकि उसे अन्य पुलिसकर्मी ले जा रहे थे। इस घटना ने सोशल मीडिया पर व्यापक आक्रोश पैदा किया। कई लोगों ने इसे पुलिस की बर्बरता और अमानवीय व्यवहार बताया। कुछ ने तो साहित्यिक हवाले देकर कहा कि अगर कवि कुसुमाग्रज या नामदेव ढसाल आज होते, तो वे इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते। घटना की आलोचना करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने इसे “विकृति का कळस” करार दिया और डीएसपी पर कार्रवाई की मांग की।
डीएसपी अनंत कुलकर्णी ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। उनका कहना है कि प्रदर्शनकारी ने आत्मदहन करने की कोशिश की थी और उसने अपने शरीर पर डीजल डाल लिया था। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी ने एक महिला पुलिसकर्मी पर भी डीजल डालने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। कुलकर्णी ने दावा किया कि उनकी कार्रवाई आवश्यक थी, क्योंकि प्रदर्शनकारी की हरकत से पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों की सुरक्षा को खतरा था। हालांकि, वायरल वीडियो में दिख रही कार्रवाई की शैली ने उनकी सफाई पर सवाल उठाए हैं, और लोग इसे अत्यधिक बल प्रयोग मान रहे हैं।
इस घटना ने जालना सहित पूरे महाराष्ट्र में पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने डीएसपी कुलकर्णी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मानना है कि प्रदर्शनकारियों के उग्र व्यवहार के कारण पुलिस को सख्ती बरतनी पड़ी।
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