Akbaruddin Owaisi News: अकबरुद्दीन ओवैसी ने विधानसभा में की मर्यादा की अपील, कहा- 'बहनों का सम्मान जरूरी'

AIMIM विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने सदन में मर्यादा बनाए रखने की जोरदार वकालत की। उन्होंने साफ कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बहनों का सम्मान हर हाल में जरूरी है।

Sep 9, 2026 - 11:10
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Akbaruddin Owaisi News: अकबरुद्दीन ओवैसी ने विधानसभा में की मर्यादा की अपील, कहा- 'बहनों का सम्मान जरूरी'
  • Assembly Session: सदन में बोले अकबरुद्दीन ओवैसी- राजनीति अपनी जगह, महिलाओं और बहनों के सम्मान से समझौता नहीं
  • सदन में अकबरुद्दीन ओवैसी का कड़ा रुख: बोले- बहस अपनी जगह लेकिन बहनों का सम्मान सबसे पहले होना चाहिए
  • Big Political Statement: सदन की मर्यादा पर बोले अकबरुद्दीन ओवैसी, कहा- सभी दल करें बहनों और महिलाओं का सम्मान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के वरिष्ठ विधायक और सदन में पार्टी के मुखर नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने विधायी कार्यवाही के दौरान सदन की गरिमा और मर्यादा को लेकर बड़ा बयान दिया है। विधायी परिसर में आयोजित सत्र के दौरान चर्चा में हिस्सा लेते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों से आत्मसंयम बरतने का आग्रह किया। ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मतभेद और वैचारिक असहमति राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक विमर्श में 'बहनों का सम्मान' और महिलाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उनके इस हस्तक्षेप के बाद सदन में तीखी नोकझोंक पर कुछ देर के लिए विराम लगा और कई सदस्यों ने उनकी इस टिप्पणी पर गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया।

सदन की कार्यवाही के दौरान तीखे वाद-विवाद के बीच एआईएमआईएम नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने विधायी गरिमा को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया। सदन में सदस्यों के आचरण और संवाद की गुणवत्ता पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की एक निश्चित मर्यादा होती है, जिसे किसी भी कीमत पर लांघा नहीं जाना चाहिए। अपने संक्षिप्त मगर असरदार संबोधन में उन्होंने कहा कि राजनीतिक टकराव अपनी जगह है, लेकिन सदन के भीतर या बाहर महिलाओं और बहनों के आत्मसम्मान की रक्षा करना हर निर्वाचित प्रतिनिधि की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सदन की नियमित कार्यवाही के दौरान विभिन्न नीतिगत और जनहितैषी मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई थी। चर्चा के दौरान माहौल गर्मा गया और व्यक्तिगत स्तर पर टिप्पणियों का दौर शुरू हो गया। इसी हंगामेदार स्थिति के बीच अकबरुद्दीन ओवैसी ने आसन से अनुमति लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने सभी दलों के जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए याद दिलाया कि विधानसभा जनता की आशाओं का केंद्र है, न कि निजी आक्षेपों का अखाड़ा।

ओवैसी ने सदन की परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे सवाल-जवाब लोकतंत्र की खूबसूरती हैं, लेकिन जब भाषा का स्तर गिरता है तो उससे पूरी विधायी संस्था की छवि धूमिल होती है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात को रेखांकित किया कि परिवार और महिलाओं के संदर्भ में की जाने वाली किसी भी अप्रिय या अशोभनीय टिप्पणी से हर किसी को बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में जीत-हार या आरोप-प्रत्यारोप चलते रहेंगे, लेकिन हमारे सामाजिक मूल्य और बहनों का सम्मान सबसे ऊपर रहना चाहिए। उनके इस स्पष्ट संदेश के बाद सदन में कुछ समय के लिए शांति छा गई और आसन की ओर से भी कार्यवाही को सुचारू बनाने के निर्देश दिए गए।

अकबरुद्दीन ओवैसी के इस वक्तव्य पर सदन के भीतर अलग-अलग दलों के नेताओं ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। सत्तापक्ष के वरिष्ठ मंत्रियों ने कहा कि सदन की मर्यादा को अक्षुण्ण रखना हर विधायक की सामूहिक जिम्मेदारी है और ओवैसी की यह नसीहत सही समय पर आई है। वहीं विपक्षी खेमे के सदस्यों ने भी माना कि विधायी चर्चा में भाषा की शालीनता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर जब विषय सामाजिक मर्यादा और नारी शक्ति के सम्मान से जुड़ा हो। सदन की आसंदी ने भी सदस्यों को सचेत करते हुए कहा कि संसदीय नियमों की अवहेलना करने वाली किसी भी असंसदीय भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

विधानसभा में दिए गए इस बयान का राजनीतिक गलियारों में व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। हाल के दिनों में कई राज्यों की विधानसभाओं और चुनावी रैलियों में घटते भाषाई स्तर को लेकर सामाजिक मंचों पर चिंता जताई जा रही थी। ऐसे में अकबरुद्दीन ओवैसी का मर्यादा की बात करना और महिलाओं के आदर को राजनीतिक प्राथमिकताओं से ऊपर रखना एक सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से सदन में अनावश्यक गतिरोध कम करने और स्वस्थ चर्चा की परंपरा को पुनर्जीवित करने में मदद मिल सकती है।

इस घटनाक्रम के बाद अब सदन के आगामी दिनों के सत्रों में सदस्यों के आचरण पर सभी की नजरें रहेंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि पीठासीन अधिकारी आने वाले दिनों में असंसदीय शब्दों के प्रयोग और मर्यादा के उल्लंघन को लेकर नई व्यवस्था दे सकते हैं। विभिन्न दलों के सचेतक भी अपने-अपने विधायकों को सदन की गरिमा का ध्यान रखने और रचनात्मक संवाद में भाग लेने के लिए औपचारिक दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं, ताकि सदन की उत्पादकता और शुचिता दोनों बरकरार रह सकें।

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