Donald Trump on Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने बताया ईरान के साथ कब खत्म हो सकता है संघर्ष, मध्य पूर्व संकट पर बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे तनाव और संघर्ष के संभावित खात्मे पर बयान दिया है। जानें उन्होंने युद्ध खत्म होने की स्थितियों और अमेरिकी नीति पर क्या कहा।

Sep 10, 2026 - 13:33
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Donald Trump on Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने बताया ईरान के साथ कब खत्म हो सकता है संघर्ष, मध्य पूर्व संकट पर बड़ा बयान
  • ट्रंप का ईरान पर रुख: संघर्ष समाप्त होने की शर्तों, क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी विदेश नीति पर कही यह बात
  • ईरान के साथ तनाव कब थमेगा? डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष की समाप्ति और कूटनीतिक रुख पर रखी अपनी बात
  • ईरान के साथ युद्ध कब समाप्त हो सकता है? डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया अपना रुख

मध्य पूर्व में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित युद्ध की समाप्ति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस बात का उल्लेख किया है कि ईरान के साथ चल रहा व्यापक गतिरोध और सैन्य टकराव किन परिस्थितियों में खत्म हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के संदर्भ में दिए गए इस बयान में उन्होंने तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं, क्षेत्रीय प्रभाव और अमेरिकी सुरक्षा हितों को रेखांकित किया है। वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहराते असर के बीच ट्रंप के इस बयान को वैश्विक मीडिया में प्रमुखता से देखा जा रहा है।

  • डोनाल्ड ट्रंप के बयान और युद्ध समाप्ति की शर्तें

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप से जब यह पूछा गया कि ईरान के साथ जारी गतिरोध और सैन्य टकराव की स्थिति का समाधान कब और कैसे संभव है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह ईरान के रुख और उसकी सैन्य गतिविधियों पर निर्भर करता है। ट्रंप ने कहा कि किसी भी दीर्घकालिक शांति या युद्ध जैसी स्थिति के खात्मे के लिए पहली बुनियादी शर्त यह है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने के अपने प्रयासों को पूरी तरह छोड़ना होगा।

इसके साथ ही, ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान जब तक मध्य पूर्व में विभिन्न प्रॉक्सी समूहों जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हूती विद्रोही और गाजा में सक्रिय हथियारबंद गुटों को वित्तीय और सैन्य सहायता देना बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है। उनके अनुसार, युद्ध या टकराव की समाप्ति तभी हो सकती है जब तेहरान यह समझे कि सैन्य विस्तारवाद और परमाणु क्षमता हासिल करने का रास्ता उसके अपने आर्थिक और राजनीतिक अस्तित्व के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।

  • तेहरान को लेकर 'अधिकतम दबाव' की नीति का उल्लेख

अपने कार्यकाल की नीतियों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की रणनीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन के दौरान ईरान पर कड़े आर्थिक और तेल प्रतिबंध लगाए गए थे, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा था और क्षेत्रीय स्तर पर उसके सैन्य कदमों को सीमित करने में मदद मिली थी।

ट्रंप का तर्क है कि ईरान के साथ तब तक कोई भी स्थायी समाधान नहीं निकल सकता जब तक कि उस पर कूटनीतिक और आर्थिक दबाव का दायरा पूरी तरह मजबूत न रहे। उन्होंने मौजूदा नीतियों की आलोचना करते हुए संकेत दिया कि ईरान को मिलने वाली आर्थिक छूट और नरम रुख के चलते ही वह अपनी आक्रामक नीतियों को जारी रखने में सक्षम हुआ है। ट्रंप के मुताबिक, अगर ईरान पर सख्त आर्थिक घेराबंदी बरकरार रखी जाए और यह स्पष्ट कर दिया जाए कि उसे कभी भी परमाणु शक्ति बनने नहीं दिया जाएगा, तो वह अंततः समझौते की मेज पर आने और आक्रामक रुख छोड़ने के लिए विवश होगा।

  • परमाणु समझौते से हटने की ऐतिहासिक गतिविधि

अमेरिका और ईरान के संबंधों में टकराव की यह कड़ी 2015 के बहुपक्षीय परमाणु समझौते जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से जुड़ी हुई है। बराक ओबामा के कार्यकाल में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, रूस और जर्मनी ने मिलकर ईरान के साथ यह समझौता किया था, जिसके तहत ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के बदले उसने अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी।

हालांकि, 2018 में राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को 'इतिहास का सबसे खराब सौदा' करार देते हुए अमेरिका को इससे अलग कर लिया था। ट्रंप का तर्क था कि यह समझौता ईरान को हमेशा के लिए परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोकता, बल्कि सिर्फ कुछ समय के लिए टालता है। इसके अलावा, इस समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय हस्तक्षेपों पर कोई पाबंदी नहीं थी। अमेरिका के अलग होने के बाद ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए गए, जिसके जवाब में ईरान ने भी समझौते की कई प्रमुख शर्तों का उल्लंघन करते हुए यूरेनियम संवर्धन की शुद्धता को काफी हद तक बढ़ा दिया।

  • क्षेत्रीय अस्थिरता: इजरायल, हूती विद्रोही और लाल सागर का संकट

ट्रंप का यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। गाजा में जारी संघर्ष के बाद से ही पूरे क्षेत्र में कई मोर्चों पर सैन्य टकराव देखा जा रहा है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर लगातार किए जा रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन हमलों के कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को लाल सागर में सुरक्षा अभियान चलाने पड़े हैं।

दूसरी ओर, इजरायल और लेबनानी गुट हिजबुल्लाह के बीच सीमा पार से भीषण गोलाबारी जारी है। इन सभी गतिविधियों के पीछे पश्चिमी देशों और इजरायल द्वारा ईरान की सीधी मदद का आरोप लगाया जाता रहा है। ट्रंप ने अपने बयान में संकेत दिया कि जब तक इन प्रॉक्सी युद्धों का संचालन केंद्र कमजोर नहीं होगा, तब तक इस संघर्ष के पूर्ण विराम की उम्मीद नहीं की जा सकती।

  • मध्य पूर्व संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा पर असर

ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनातनी का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है, पर किसी भी संभावित सैन्य संकट का सीधा खतरा बना रहता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

लाल सागर में हूती हमलों के कारण कई प्रमुख वैश्विक शिपिंग कंपनियों को स्वेज नहर का मार्ग छोड़कर अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे माल ढुलाई लागत (Freight Rates) और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। ट्रंप के अनुसार, इस संकट के न थमने से वैश्विक व्यापार को निरंतर अनिश्चितता और आर्थिक जोखिम का सामना करना पड़ रहा है।

  • ईरान का आधिकारिक रुख और आत्मरक्षा का तर्क

दूसरी ओर, ईरान की सरकार और उसके सैन्य नेतृत्व ने लगातार अमेरिका और उसके सहयोगियों के आरोपों को खारिज किया है। तेहरान का आधिकारिक रुख रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से असैन्य और शांतिपूर्ण ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए है और उसका इरादा परमाणु बम बनाने का नहीं है।

ईरान का यह भी कहना है कि मध्य पूर्व में उसकी उपस्थिति और क्षेत्रीय गुटों को दिया जाने वाला समर्थन 'प्रतिरोध की धुरी' (Axis of Resistance) का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और इजरायली कार्रवाइयों का मुकाबला करना है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी बाहरी दबाव या एकतरफा प्रतिबंधों के आगे नहीं झुकेगा और अपनी संप्रभुता तथा सुरक्षा पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है।

  • वर्तमान कूटनीतिक गतिरोध

मौजूदा समय में वाशिंगटन और तेहरान के बीच प्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप है। कतर, ओमान और स्विट्जरलैंड जैसे मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच अनौपचारिक संदेशों का आदान-प्रदान कराने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन किसी स्थायी समझौते की रूपरेखा अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है।

ट्रंप के इस बयान ने आगामी अमेरिकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में एक नई बहस छेड़ दी है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि जब तक परमाणु निगरानी एजेंसी (IAEA) के साथ ईरान का पूर्ण सहयोग बहाल नहीं होता और क्षेत्रीय स्तर पर युद्धविराम के कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तब तक इस व्यापक संघर्ष के शांत होने की संभावनाएं बेहद सीमित बनी रहेंगी। फिलहाल, वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्षों के कड़े रुख के बीच पश्चिम एशिया में तनाव का स्तर ऊंचा बना हुआ है।

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