अचार फैक्ट्री के कुएं में दम घुटने से पिता-पुत्र की मौत, मजदूर को बचाने की कोशिश में गई दो जिंदगियां
हादसे की शुरुआत तब हुई जब एक मजदूर अचार फर्मेंट करने वाले कुएं में उतरा, जो फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला एक पारंपरिक तरीका है। कुएं में फर्मेंटेशन के दौरान उत्पन्न होने वाली गैसें जैसे कार्बन
दिल्ली के नांगलोई इलाके में एक अचार बनाने वाली फैक्ट्री में शनिवार शाम को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें फैक्ट्री मालिक और उनके बेटे की दम घुटने से मौत हो गई। घटना राव विहार क्षेत्र में हुई, जहां फैक्ट्री एक आवासीय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर चल रही थी। फैक्ट्री मालिक अनिल राम उम्र 60 वर्ष और उनके बेटे नीरज उम्र 32 वर्ष एक मजदूर को बचाने के लिए करीब 10 फीट गहरे कुएं में उतरे थे, जो अचार को फर्मेंट करने के लिए इस्तेमाल होता है। मजदूर कुएं में गिर गया था और बेहोश हो गया था, जिसके बाद अनिल और उनके दो बेटे नीरज तथा संदीप (28 वर्ष) उसे निकालने के लिए कुएं में उतरे। कुएं में ऑक्सीजन की कमी के कारण सभी चार व्यक्ति बेहोश हो गए। अनिल के भाई सुभाष और स्थानीय लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अनिल और नीरज को मृत घोषित कर दिया। मजदूर और संदीप की हालत गंभीर है लेकिन स्थिर बताई जा रही है। पुलिस को शाम को पीसीआर कॉल मिली, जिसके बाद नांगलोई थाने की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। हादसा ऐसे समय हुआ जब फैक्ट्री में काम चल रहा था और कुआं अचार बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जहां फर्मेंटेशन के दौरान जहरीली गैसें बन सकती हैं। यह घटना दिल्ली में औद्योगिक सुरक्षा मानकों की कमी को एक बार फिर सामने लाती है।
हादसे की शुरुआत तब हुई जब एक मजदूर अचार फर्मेंट करने वाले कुएं में उतरा, जो फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाला एक पारंपरिक तरीका है। कुएं में फर्मेंटेशन के दौरान उत्पन्न होने वाली गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य जहरीली गैसें जमा हो जाती हैं, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। मजदूर बेहोश होकर गिर गया, जिसे देखकर फैक्ट्री मालिक अनिल राम और उनके बेटे नीरज ने तुरंत उसे बचाने की कोशिश की। वे कुएं में उतरे लेकिन गैसों के कारण खुद भी बेहोश हो गए। छोटा बेटा संदीप भी मदद के लिए उतरा और वही हाल हुआ। कुएं की गहराई करीब 10 फीट बताई गई है, लेकिन अंदर की हवा जहरीली होने से कुछ ही मिनटों में सभी प्रभावित हो गए।
अनिल के भाई सुभाष ने स्थानीय लोगों की मदद से रस्सी और अन्य तरीकों से चारों को बाहर निकाला। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने अनिल और नीरज को मृत घोषित किया। मजदूर और संदीप को इलाज के लिए भर्ती किया गया है और उनकी हालत स्थिर है। पुलिस ने बताया कि कुएं में फर्मेंटेशन प्रक्रिया के कारण जहरीली गैसें जमा थीं, जो सांस लेने में बाधा डालती हैं। अचार बनाने वाले कुओं में फर्मेंटेशन के दौरान मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें बनती हैं, जो ऑक्सीजन को विस्थापित कर देती हैं। ऐसे कुओं में बिना सुरक्षा उपकरण जैसे ऑक्सीजन मास्क या रस्सी के उतरना जानलेवा साबित हो सकता है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरी घटना की जांच शुरू की और कुएं का निरीक्षण किया। नांगलोई थाने की टीम ने बताया कि फैक्ट्री एक आवासीय इमारत में चल रही थी, जहां ग्राउंड फ्लोर पर फैक्ट्री और ऊपर परिवार का निवास था। अनिल राम फैक्ट्री के मालिक थे और परिवार के साथ वही रहते थे। हादसे के समय फैक्ट्री में काम चल रहा था लेकिन अन्य मजदूर बाहर थे। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि कुएं में उतरने से पहले कोई सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए थे। घटना के बाद पुलिस ने फैक्ट्री सील कर दी है और फैक्ट्री लाइसेंस, सुरक्षा मानकों की जांच शुरू की है। दिल्ली में ऐसी फैक्ट्रियां अक्सर घरों में चलती हैं, जहां बड़े कुएं या टैंक अचार फर्मेंट करने के लिए बनाए जाते हैं। ऐसे टैंकों में गैस जमा होने का खतरा हमेशा रहता है। पुलिस ने मजदूरों से पूछताछ की और घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया।
इस हादसे ने दिल्ली में छोटी फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों की कमी को एक बार फिर सामने ला दिया है। अचार बनाने जैसी पारंपरिक फैक्ट्रियां अक्सर घरेलू स्तर पर चलती हैं, जहां बड़े कुएं या टैंक इस्तेमाल होते हैं। इनमें फर्मेंटेशन के दौरान गैसें बनती हैं, जो घातक हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कुओं में उतरने से पहले ऑक्सीजन लेवल चेक करना, वेंटिलेशन सुनिश्चित करना और सुरक्षा उपकरण जैसे हार्नेस, मास्क और रस्सी का इस्तेमाल जरूरी है। दिल्ली में कई इलाकों में ऐसी फैक्ट्रियां चल रही हैं, जहां मजदूर बिना ट्रेनिंग के काम करते हैं। इस घटना से फैक्ट्री मालिकों को सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी और फैक्ट्री के लाइसेंस की समीक्षा होगी।
हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है और स्थानीय लोग परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। अनिल राम के परिवार में अब सिर्फ छोटा बेटा संदीप और अन्य सदस्य बचे हैं। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार है। मजदूर की हालत सुधार पर है लेकिन वह अभी अस्पताल में है। यह घटना ऐसे समय हुई जब दिल्ली में औद्योगिक हादसों की संख्या बढ़ रही है। पुलिस ने कहा कि फैक्ट्री में सुरक्षा उपकरणों की कमी थी, जिससे हादसा हुआ। जांच में यह भी देखा जाएगा कि फैक्ट्री लाइसेंस्ड थी या नहीं और मजदूरों को सुरक्षा ट्रेनिंग दी गई थी या नहीं।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चश्मदीदों से बयान दर्ज किए और फैक्ट्री के आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की है। घटना ने छोटे पैमाने की फैक्ट्रियों में मजदूर सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि फर्मेंटेशन टैंक में काम करते समय गैस डिटेक्टर और वेंटिलेशन सिस्टम अनिवार्य होने चाहिए। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने पर रिपोर्ट सौंपी जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। परिवार को मुआवजे की मांग की जा रही है।
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