दिल्ली की सड़कों पर 'डिजिटल' नजर: क्यूआर कोड स्कैन कर जनता सीधे दे सकेगी फीडबैक, 1400 किलोमीटर की सड़कों पर लगेंगे स्मार्ट डिस्प्ले बोर्ड
डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के विजन को मजबूती प्रदान करते हुए, दिल्ली सरकार की यह पहल सड़क साइन बोर्डों के मानकीकरण की ओर भी एक बड़ा कदम है। केवल फीडबैक बोर्ड ही नहीं, बल्कि अब दिल्ली में लगने वाले सभी नए दिशा-सूचक बोर्डों

पीडब्ल्यूडी की बड़ी पहल: अब खराब सड़क की शिकायत और सुझाव के लिए बस एक स्कैन ही काफी
दिल्ली की सड़कों के कायाकल्प और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मार्च 2026 के तीसरे सप्ताह में दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस नई प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया। इस योजना के तहत, दिल्ली की उन सभी सड़कों पर जहां हाल ही में सुदृढ़ीकरण, मरम्मत या री-कार्पेटिंग का काम हुआ है, वहां क्यूआर कोड युक्त सूचना बोर्ड लगाए जा रहे हैं। इन बोर्डों को बस क्यू शेल्टर, प्रमुख चौराहों और अधिक भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर स्थापित किया गया है ताकि अधिक से अधिक नागरिक इन्हें देख सकें और इनका उपयोग कर सकें। यह पहल दिल्ली सरकार के उस दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसके तहत तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना है।
इस डिजिटल पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को उनके क्षेत्र में हो रहे सड़क निर्माण कार्यों के बारे में सूचित करना और उन्हें निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा बनाना है। जब कोई नागरिक इन बड़े क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करेगा, तो उसके मोबाइल पर उस सड़क खंड से संबंधित पूरी विस्तृत जानकारी खुल जाएगी। इसमें सड़क का नाम, उसकी कुल लंबाई, सड़क के सुदृढ़ीकरण की पिछली तारीख, निर्माण करने वाले ठेकेदार या एजेंसी का नाम, परियोजना की स्वीकृत लागत और सबसे महत्वपूर्ण 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड' (दोष दायित्व अवधि) शामिल होगी। इस जानकारी के माध्यम से जनता यह जान पाएगी कि अगर सड़क समय से पहले टूटती है, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है और कितने समय तक ठेकेदार को उसकी मुफ्त मरम्मत करनी होगी।
यह प्रणाली केवल जानकारी साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक एकीकृत फीडबैक मैकेनिज्म भी जोड़ा गया है। यदि किसी नागरिक को सड़क की गुणवत्ता में कमी नजर आती है, कहीं गड्ढा दिखता है या सेंट्रल वर्ज टूटा हुआ मिलता है, तो वे सीधे उसी क्यूआर कोड के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। लोग मौके की फोटो खींचकर उसे पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं, जिस पर विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पीडब्ल्यूडी मंत्री ने इस पहल पर जोर देते हुए कहा कि वास्तविक पारदर्शिता तभी संभव है जब विभाग केवल जानकारी साझा न करे, बल्कि लोगों के सुझावों और शिकायतों को गंभीरता से सुने भी। इससे सरकार और जनता के बीच एक सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी और निर्माण की गुणवत्ता में सुधार आएगा। पीडब्ल्यूडी दिल्ली वर्तमान में लगभग 1400 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क, 106 फ्लाईओवर और कई अंडरपास का रखरखाव करता है। वर्तमान में रिंग रोड, नोएडा लिंक रोड, विकास मार्ग, मथुरा रोड और प्रेस एन्क्लेव रोड जैसे महत्वपूर्ण खंडों पर मजबूतीकरण का कार्य चल रहा है, जहां ये क्यूआर कोड बोर्ड प्राथमिकता के आधार पर लगाए जा रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने सख्त प्रोटोकॉल और समय सीमा निर्धारित की है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सड़क का काम पूरा होने के सात दिनों के भीतर संबंधित डिवीजन को डिस्प्ले बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य पूरा होने के 10 दिनों के भीतर अधिकारियों को इसकी 'कम्प्लीशन रिपोर्ट' भी सौंपनी होगी। सभी डिवीजनों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि ये बोर्ड हमेशा साफ और स्पष्ट दिखाई दें और क्यूआर कोड हर समय कार्यात्मक रहें। यदि भविष्य में उसी सड़क पर कोई नया मरम्मत कार्य होता है, तो कोड से जुड़ी डिजिटल जानकारी को तुरंत अपडेट करना होगा ताकि नागरिकों को हमेशा नवीनतम डेटा प्राप्त हो सके।
डिजिटल इंडिया और स्मार्ट सिटी के विजन को मजबूती प्रदान करते हुए, दिल्ली सरकार की यह पहल सड़क साइन बोर्डों के मानकीकरण की ओर भी एक बड़ा कदम है। केवल फीडबैक बोर्ड ही नहीं, बल्कि अब दिल्ली में लगने वाले सभी नए दिशा-सूचक बोर्डों (Signages) पर भी क्यूआर कोड अनिवार्य कर दिए गए हैं। इन छोटे क्यूआर कोड में बोर्ड के निर्माता का नाम, निर्माण की तारीख, उपयोग की गई सामग्री और वारंटी की जानकारी होगी। इससे यह लाभ होगा कि यदि कोई साइन बोर्ड समय से पहले अपनी चमक खो देता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो विभाग 'पीडब्ल्यूडी सेवा' ऐप के माध्यम से तुरंत उसकी मरम्मत या प्रतिस्थापन के लिए जवाबदेही तय कर सकेगा। यह भविष्योन्मुखी कदम दिल्ली की सड़कों को एक वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।
दिल्ली पुलिस ने भी इसी तरह की तकनीक का उपयोग पहले से ही अपने 'अनुभूति' फीडबैक सिस्टम के माध्यम से शुरू किया हुआ है, जहां थानों में आने वाले लोग क्यूआर कोड स्कैन करके पुलिसिंग के अनुभव साझा करते हैं। अब पीडब्ल्यूडी की इस पहल से दिल्ली की सड़कों का प्रबंधन भी इसी तर्ज पर आधुनिक हो गया है। आने वाले त्योहारों जैसे दिवाली और छठ पूजा के दौरान दिल्ली के प्रमुख बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के आसपास भी इसी तरह के क्यूआर कोड आधारित पहुंच नियंत्रण और सूचना प्रणाली के विस्तार की योजना है। यह स्पष्ट है कि दिल्ली अब एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ रही है जहां सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता की जांच केवल आधिकारिक कागजों में नहीं, बल्कि सीधे जनता के मोबाइल स्क्रीन पर होगी।
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