वंदे भारत एक्सप्रेस में नशे की 'सवारी': रायपुर में दो युवतियां 24 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार

गिरफ्तार की गई आरोपियों की पहचान नीलम राठौर और रीना वर्मा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिलासपुर के तिफरा इलाके की रहने वाली हैं। शुरुआती पूछताछ में यह जानकारी मिली है कि ये दोनों युवतियां आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से गांजे की यह बड़ी खेप लेकर आ

Mar 22, 2026 - 12:27
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वंदे भारत एक्सप्रेस में नशे की 'सवारी': रायपुर में दो युवतियां 24 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार

  • हाई-प्रोफाइल ट्रेन और ट्रॉली बैग में छिपा नशा: बिलासपुर की दो लड़कियों ने अपनाई तस्करी की नई तरकीब
  • NCB और RPF का संयुक्त ऑपरेशन: एसी कोच में सफर कर रही युवतियों से लाखों का गांजा बरामद

छत्तीसगढ़ के रायपुर रेलवे स्टेशन पर एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त टीम ने वंदे भारत एक्सप्रेस में छापेमारी की। जांच के दौरान ट्रेन के एसी-2 (AC 2) कोच में सफर कर रही दो युवतियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गईं। जब सुरक्षा कर्मियों ने उनके पास रखे बड़े ट्रॉली बैग्स की तलाशी लेने की कोशिश की, तो युवतियों ने सामान्य यात्रियों की तरह व्यवहार करते हुए उसे निजी सामान बताया। हालांकि, सघन जांच में जब बैग खोले गए, तो अधिकारी दंग रह गए। बैग के भीतर कपड़ों की जगह भारी मात्रा में गांजा भरा हुआ था, जिसे बेहद चतुराई से पैक किया गया था ताकि बाहर से किसी को गंध न आए।

गिरफ्तार की गई आरोपियों की पहचान नीलम राठौर और रीना वर्मा के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिलासपुर के तिफरा इलाके की रहने वाली हैं। शुरुआती पूछताछ में यह जानकारी मिली है कि ये दोनों युवतियां आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से गांजे की यह बड़ी खेप लेकर आ रही थीं। तस्करी के लिए वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेन का चुनाव करना इस ओर संकेत करता है कि तस्कर अब जांच से बचने के लिए महंगे टिकट और वीआईपी ट्रेनों का सहारा ले रहे हैं। उन्हें लगा था कि ऐसी हाई-प्रोफाइल ट्रेन में पुलिस आमतौर पर साधारण पैसेंजर ट्रेनों की तुलना में कम तलाशी लेती है। विशाखापट्टनम से बिलासपुर की ओर जाते समय रायपुर स्टेशन वह बिंदु बना जहाँ इनके सफर पर विराम लग गया और पूरी साजिश का भंडाफोड़ हो गया।

सुरक्षा एजेंसियों ने दोनों युवतियों के पास से कुल 24 किलोग्राम अवैध गांजा जब्त किया है। वर्तमान बाजार दर के अनुसार, जब्त किए गए मादक पदार्थ की कीमत लगभग 3 से 4 लाख रुपये आंकी गई है। अधिकारियों के अनुसार, गांजे को छोटे-छोटे पैकेटों में बांटकर ट्रॉली बैग में इस तरह व्यवस्थित किया गया था कि वह ऊपर से केवल व्यक्तिगत सामान जैसा दिखे। यह तस्करी का एक पेशेवर तरीका है जहाँ तस्कर खुद को एक सामान्य पर्यटक या कॉर्पोरेट यात्री के रूप में पेश करते हैं ताकि सुरक्षा कर्मियों का ध्यान उन पर न जाए। इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की बरामदगी यह दर्शाती है कि नशे का काला कारोबार अब सामान्य ट्रेनों से निकलकर लग्जरी परिवहन सेवाओं तक अपनी पैठ बना चुका है।

विशेष नोट: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, विशाखापट्टनम और ओडिशा का सीमावर्ती क्षेत्र गांजा तस्करी का एक बड़ा हब बनता जा रहा है। यहां से देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में तस्करी के लिए रेलवे नेटवर्क का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। आरपीएफ ने अब 'ऑपरेशन नार्कोस' के तहत संदिग्ध यात्रियों और उनके सामान की स्कैनिंग को और अधिक कड़ा कर दिया है।

इस कार्रवाई के दौरान आरपीएफ और एनसीबी की तालमेल वाली रणनीति काफी कारगर साबित हुई। खुफिया जानकारी के आधार पर टीम पहले से ही अलर्ट पर थी। जैसे ही ट्रेन रायपुर पहुंची, टीम ने बिना शोर-शराबे के विशिष्ट कोच को घेरा और लक्षित बर्थ पर मौजूद युवतियों से पूछताछ शुरू की। पकड़ी गई युवतियों नीलम और रीना ने पहले तो अधिकारियों को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन जब ट्रॉली बैग के लॉक खोले गए तो वे पूरी तरह टूट गईं। पुलिस के अनुसार, बैग के भीतर गांजे की गंध को दबाने के लिए विशेष रसायनों या सुगंधित वस्तुओं का प्रयोग भी किया गया था, लेकिन अनुभवी सुरक्षा अधिकारियों की नजरों से यह बच नहीं सका।

जांच का एक मुख्य पहलू यह भी है कि ये युवतियां किसके इशारे पर काम कर रही थीं। पुलिस को संदेह है कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग रैकेट का हिस्सा हो सकता है, जहाँ कम उम्र की महिलाओं को कूरियर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है ताकि सुरक्षा एजेंसियों को कम संदेह हो। बिलासपुर के तिफरा जैसे रिहायशी इलाके से आने वाली इन युवतियों की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनके पिछले यात्रा रिकॉर्ड की भी बारीकी से जांच की जा रही है। मोबाइल फोन रिकॉर्ड के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि विशाखापट्टनम में उन्हें यह खेप किसने सौंपी थी और बिलासपुर में इसे किसे डिलीवर किया जाना था।

वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में इस तरह की घटना होना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है। प्रीमियम ट्रेनों में सफर करने वाले यात्री अपनी निजता और शांति की अपेक्षा करते हैं, जिसका फायदा उठाकर तस्कर अवैध गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना के बाद, रेलवे प्रशासन ने वंदे भारत और राजधानी जैसी ट्रेनों में भी औचक निरीक्षण और खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की मदद से तलाशी अभियान तेज करने का फैसला लिया है। अधिकारियों का मानना है कि पकड़ी गई युवतियां केवल मोहरे हो सकती हैं और असली सरगना पर्दे के पीछे रहकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा है।वर्तमान में, नीलम राठौर और रीना वर्मा के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। रायपुर पुलिस और एनसीबी की टीमें अब बिलासपुर और विशाखापट्टनम में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। बरामद गांजे को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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