Top Silver ETFs: इन 5 सिल्वर ईटीएफ ने 1 महीने में दिया बंपर रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट 

घरेलू और वैश्विक बाजार में चांदी की बढ़ती मांग के बीच सिल्वर ईटीएफ ने एक महीने में मजबूत रिटर्न दिया है। जानिए सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाले 5 प्रमुख फंड्स।

Aug 17, 2026 - 14:36
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Top Silver ETFs: इन 5 सिल्वर ईटीएफ ने 1 महीने में दिया बंपर रिटर्न, देखें पूरी लिस्ट 
  • Best Silver ETFs Returns: कम समय में चांदी ने कराई तगड़ी कमाई, इन 5 सिल्वर ETF का रहा दबदबा 
  • चांदी में निवेश पर मिला जोरदार मुनाफा: 1 महीने में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले टॉप 5 सिल्वर ETF 
  • कमोडिटी बाजार में तेजी से चमके सिल्वर फंड्स, 1 महीने के रिटर्न में टॉप 5 सिल्वर ETF आगे

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में चांदी की कीमतों में आई हालिया मजबूती का सीधा असर भारतीय एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स यानी सिल्वर ईटीएफ के प्रदर्शन पर देखा जा रहा है। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो विभिन्न म्यूचुअल फंड हाउसों के प्रमुख सिल्वर ईटीएफ ने निवेशकों को सात से नौ प्रतिशत से अधिक का सकारात्मक रिटर्न प्रदान किया है। औद्योगिक मांग में तेजी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सौर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी की खपत और सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में कीमती धातुओं की ओर निवेशकों के बढ़ते रुझान ने इन फंड्स को गति दी है। फिजिकल चांदी को सुरक्षित रखने के झंझट और शुद्धता की चिंता के बिना डिजिटल रूप से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सिल्वर ईटीएफ एक लोकप्रिय विकल्प बन चुका है, जिसके चलते बाजार में इसकी लिक्विडिटी और वॉल्यूम में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है।

भारतीय पूंजी बाजार में कमोडिटी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में इस समय चांदी से जुड़े फंड्स का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। पिछले 30 दिनों के बाजार आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख फंड हाउसों द्वारा संचालित सिल्वर ईटीएफ ने अल्पकालिक अवधि में अन्य पारंपरिक परिसंपत्ति वर्गों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान 360 वन सिल्वर ईटीएफ, यूटीआई सिल्वर ईटीएफ, डीएसपी सिल्वर ईटीएफ, आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ईटीएफ और निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ जैसे फंड्स ने रिटर्न के मामले में शीर्ष स्थान हासिल किया है। 

कमोडिटी एक्सचेंजों पर चांदी के हाजिर भाव और वायदा अनुबंधों में आई मजबूती का सीधा असर इन ईटीएफ के नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर पड़ा है। पिछले एक माह के रिटर्न परिदृश्य को देखें तो 360 वन सिल्वर ईटीएफ ने लगभग 9.55 प्रतिशत का उच्चतम रिटर्न दर्ज किया, जबकि यूटीआई सिल्वर ईटीएफ ने लगभग 8.90 प्रतिशत की बढ़त दिखाई। इसी क्रम में आदित्य बिड़ला सन लाइफ सिल्वर ईटीएफ ने 8.34 प्रतिशत, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल व डीएसपी सिल्वर ईटीएफ ने 7.3 से 8.2 प्रतिशत तथा बाजार में सबसे बड़े एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) और उच्च ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ ने 7.2 प्रतिशत के आसपास रिटर्न दिया।

इन फंड्स का मूल ढांचा भौतिक चांदी की 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली छड़ों पर आधारित होता है। सेबी के नियमों के अनुसार, ये फंड अपनी कुल परिसंपत्ति का न्यूनतम 95 प्रतिशत हिस्सा भौतिक चांदी और उससे जुड़े वित्तीय साधनों में निवेश करते हैं। जब भी घरेलू स्तर पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है, तो उसका सीधा प्रतिबिंब इन ईटीएफ की एनएवी पर दिखाई देता है। 

बाजार विश्लेषकों और कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी के प्रदर्शन में आया यह उछाल केवल सट्टेबाजी या तात्कालिक तेजी नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत बुनियादी कारण मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में चांदी की भारी खपत बनी हुई है, जबकि खनन आपूर्ति में सीमित वृद्धि देखी जा रही है।

म्यूचुअल फंड प्रबंधकों का कहना है कि जो निवेशक प्रत्यक्ष रूप से चांदी के सिक्के या ईंटें खरीदने में मेकिंग चार्ज और लॉकर स्टोरेज की लागत वहन नहीं करना चाहते, उनके लिए ईटीएफ सबसे पारदर्शी और तरल माध्यम बन चुका है। हालांकि, वित्तीय योजनाकारों ने यह सलाह भी दी है कि कमोडिटी में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए किसी भी निवेशक को अपने कुल पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रेशियस मेटल्स में आवंटित नहीं करना चाहिए। 

सिल्वर ईटीएफ के मजबूत एक-मासिक रिटर्न ने रिटेल निवेशकों के साथ-साथ संस्थागत निवेशकों का ध्यान भी आकर्षित किया है। डीमैट खातों के माध्यम से इन फंड्स में दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, जिन निवेशकों के पास डीमैट खाता नहीं है, वे 'सिल्वर ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स' (FoF) के माध्यम से व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) का मार्ग अपना रहे हैं। इस रुझान से गैर-पारंपरिक म्यूचुअल फंड श्रेणियों में परिसंपत्ति आधार का विस्तार हुआ है और निवेशकों को इक्विटी बाजार की संभावित अस्थिरता के बीच हेजिंग का एक मजबूत साधन मिला है। 

आगामी तिमाहियों में चांदी की दिशा काफी हद तक वैश्विक ब्याज दरों के रुख, डॉलर इंडेक्स की चाल और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में खपत का चक्र सकारात्मक बना रहता है, तो सिल्वर फंड्स में निवेश का रुझान जारी रह सकता है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि पिछले रिटर्न भविष्य के मुनाफे की पूर्ण गारंटी नहीं होते, और किसी भी प्रकार के नए आवंटन से पहले फंड के एक्सपेंस रेशियो, ट्रैकिंग एरर और स्वयं की जोखिम क्षमता का उचित मूल्यांकन करना आवश्यक है।

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