Iran Slams UAE: 'ग़ज़ा के कसाई' की मेज़बानी से नहीं होगा कोई लाभ, ईरान ने यूएई को दी खुली राजनयिक चेतावनी
Iran Warns UAE: ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को सख्त कूटनीतिक चेतावनी देते हुए कहा है कि 'ग़ज़ा के कसाई' की मेज़बानी करने से किसी को कोई फ़ायदा नहीं होने वाला है।

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पश्चिम एशिया में जारी गंभीर सैन्य और राजनयिक संकट के बीच ईरान ने पड़ोसी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार किया है। तेहरान ने अबू धाबी प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि 'ग़ज़ा के कसाई' के रूप में देखे जा रहे इज़रायली नेतृत्व की मेज़बानी करने अथवा उनके साथ सामान्य संबंध बनाए रखने से खाड़ी क्षेत्र के किसी भी मुल्क को कोई सुरक्षात्मक या कूटनीतिक लाभ हासिल नहीं होगा। ईरान के विदेश मंत्रालय की ओर से दिए गए इस बयान ने फारस की खाड़ी के देशों के बीच एक बार फिर भू-राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।
ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में रेखांकित किया कि फ़लस्तीनी क्षेत्र ग़ज़ा में महीनों से जारी सैन्य कार्रवाई, भारी तबाही और नागरिकों की जानमाल के नुकसान के बीच किसी भी अरब या मुस्लिम देश द्वारा इज़रायली प्रतिनिधियों का औपचारिक स्वागत करना क्षेत्रीय स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
- 'मेज़बानी से सुरक्षा नहीं, असुरक्षा बढ़ेगी'
ईरानी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ प्रवक्ता ने बयान जारी करते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रीय सरकारें यह गलतफहमी पाल रही हैं कि बाहरी ताकतों और इज़रायल के साथ रणनीतिक साझेदारी उनके राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को मजबूत करेगी। ईरान का तर्क है कि ऐतिहासिक रूप से इज़रायल की उपस्थिति ने पश्चिम एशिया में केवल अविश्वास, विभाजन और अस्थिरता को ही बढ़ावा दिया है।
ईरान ने यूएई को नसीहत देते हुए कहा कि जो सत्ताधारी दल या नेता मासूम बच्चों और नागरिकों के नरसंहार के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कटघरे में खड़े हैं, उन्हें मंच प्रदान करना नैतिक और कूटनीतिक रूप से आत्मघाती कदम है। तेहरान ने साफ किया कि खाड़ी क्षेत्र की वास्तविक सुरक्षा केवल क्षेत्रीय देशों के आपसी सहयोग, साझा संप्रभुता के सम्मान और बाहरी दखल को सीमित करके ही हासिल की जा सकती है।
- अब्राहम एकॉर्ड्स और बदलते खाड़ी समीकरण
संयुक्त अरब अमीरात और इज़रायल के बीच वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से संपन्न हुए 'अब्राहम एकॉर्ड्स' (Abraham Accords) के बाद से ही दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक, व्यापारिक, पर्यटन और सुरक्षा साझेदारी कायम हुई थी। बहरीन, मोरक्को और सूडान जैसे मुल्कों ने भी इसी रास्ते पर कदम आगे बढ़ाए थे।
हालांकि, 7 अक्टूबर के बाद से ग़ज़ा पट्टी में शुरू हुए भीषण युद्ध और हजारों नागरिकों की मौतों के बाद खाड़ी देशों में जनभावनाएं इज़रायल के खिलाफ बेहद आक्रामक हो चुकी हैं। इसके बावजूद यूएई ने अपने आधिकारिक कूटनीतिक चैनलों को खुला रखा है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और कूटनीतिक मंचों पर इज़रायली प्रतिनिधियों के साथ संवाद जारी रखा है। ईरान इसी निरंतर संवाद और मेज़बानी पर लगातार कड़े सवाल उठा रहा है।
- तेहरान और अबू धाबी के रिश्तों पर असर
यह राजनयिक तल्खी ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले कुछ वर्षों में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात ने अपने आपसी तनाव को कम करने और उच्चस्तरीय राजनयिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान के जरिए कामकाजी संबंधों को बहाल करने की कोशिश की थी।
व्यापारिक दृष्टि से दुबई लंबे समय से ईरानी कारोबारियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय हब रहा है। लेकिन इज़रायल के साथ यूएई के सुरक्षा सहयोग और खुफिया जानकारियों के साझाकरण की आशंकाओं को लेकर तेहरान की चिंताएं हमेशा से गहरी रही हैं। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि वह अपनी सीमाओं और समुद्री मार्गों के करीब इज़रायली उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं करेगा।
- पश्चिम एशिया में शांति का स्थायी रास्ता क्या?
ईरान की ओर से जारी बयान में यह भी दोहराया गया कि मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार की स्थायी शांति और आर्थिक समृद्धि तब तक संभव नहीं है जब तक कि फ़लस्तीनी जनता के मौलिक अधिकारों, उनकी जमीन की आजादी और ग़ज़ा में चल रहे हमलों को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता। तेहरान ने अरब देशों से अपील की है कि वे सामूहिक रूप से इज़रायली आक्रामकता का बहिष्कार करें और कूटनीतिक मंचों पर उसे अलग-थलग करने की नीति अपनाएं।
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