आलीशान विला, सात फ्लैट, करोड़ों का सोना और भारी नकदी बरामद, सरकारी रसूख की आड़ में बनाई गई अकूत काली कमाई का सनसनीखेज खुलासा

तेलंगाना राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई

Jun 10, 2026 - 12:39
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आलीशान विला, सात फ्लैट, करोड़ों का सोना और भारी नकदी बरामद, सरकारी रसूख की आड़ में बनाई गई अकूत काली कमाई का सनसनीखेज खुलासा
आलीशान विला, सात फ्लैट, करोड़ों का सोना और भारी नकदी बरामद, सरकारी रसूख की आड़ में बनाई गई अकूत काली कमाई का सनसनीखेज खुलासा
  • तेलंगाना में भ्रष्टाचार पर एसीबी का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार, आय से अधिक संपत्ति के मामले में सड़क एवं भवन विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ गिरफ्तार
  • आधिकारिक तौर पर 18 करोड़ की संपत्ति का दस्तावेज जब्त, हैदराबाद के रियल एस्टेट बाजार के अनुसार वास्तविक कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान

तेलंगाना राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत राज्य के सड़क एवं भवन विभाग में सर्वोच्च पद पर आसीन इंजीनियर-इन-चीफ मोहन नाइक जरूपला को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया है। सरकारी सेवा में रहते हुए अपनी आधिकारिक आय के स्रोतों से कहीं अधिक धन और संपत्तियां जमा करने की गोपनीय शिकायतों के बाद ब्यूरो ने यह कदम उठाया है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत बाकायदा मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद इस पूरी योजनाबद्ध कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया गया। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी ने राज्य के प्रशासनिक महकमे और तकनीकी विंग में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि इतने वरिष्ठ स्तर के अधिकारी पर इस तरह का शिकंजा कसने का यह हालिया दिनों का सबसे बड़ा मामला है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की इस विशेष और व्यापक कार्रवाई के तहत केवल आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी ही नहीं की गई, बल्कि उनके पूरे साम्राज्य को खंगालने के लिए एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया। एसीबी की विभिन्न टीमों ने सुबह एक साथ मोहन नाइक जरूपला के मुख्य कार्यालय, उनके आलीशान निजी आवास और उनके बेहद करीबी रिश्तेदारों व व्यावसायिक सहयोगियों से जुड़े करीब 15 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी। यह छापेमारी इतनी अचानक और गोपनीय तरीके से की गई कि आरोपी अधिकारी या उनके करीबियों को अपनी संपत्तियों के दस्तावेज छिपाने या ठिकाने लगाने का रत्ती भर भी मौका नहीं मिल सका। हैदराबाद के पॉश इलाकों से लेकर तेलंगाना के ग्रामीण अंचलों तक फैले इन 15 ठिकानों पर देर रात तक चली गहन तलाशी के दौरान जांचकर्ताओं के हाथ कई ऐसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले दस्तावेज लगे हैं, जो सीधे तौर पर काली कमाई के निवेश की गवाही दे रहे हैं।

जांचकर्ताओं द्वारा की गई इस बेहद व्यापक और सघन छापामारी के दौरान अचल संपत्तियों का एक ऐसा विशाल जखीरा सामने आया है जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। ब्यूरो द्वारा आधिकारिक रूप से साझा की गई शुरुआती खोजबीन की रिपोर्ट के मुताबिक, निजामाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले डिचपल्ली मंडल के मुल्लांगी गांव में ही केवल 19.38 एकड़ में फैली पांच बड़ी कृषि भूमियों के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इन जमीनों का सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार आधिकारिक मूल्यांकन लगभग 82.9 लाख रुपये आंका गया है, जो कि बेहद कम है। ग्रामीण इलाकों के अलावा आरोपी अधिकारी ने राज्य की राजधानी और प्रमुख आईटी हब हैदराबाद के सबसे महंगे और आलीशान रिहायशी इलाकों में भी भारी निवेश कर रखा था। अधिकारियों को छानबीन में हैदराबाद के बेहद नामचीन इलाकों में कुल सात बहुमंजिला फ्लैट मिले हैं, जिनमें से तीन फ्लैट कोमपल्ली जैसे विकसित होते क्षेत्र में हैं और चार बेहद महंगे गाचीबावली इलाके में स्थित हैं, जिनका कुल सरकारी मूल्य ही लगभग 7.35 करोड़ रुपये दर्ज है।

  • काली कमाई का रियल एस्टेट साम्राज्य

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि लोक सेवक ने अपनी अवैध कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा जमीन, फ्लैट और विला जैसे रियल एस्टेट सेक्टर में खपाया था। सरकारी और बाजार मूल्य के बीच का यह भारी अंतर यह दिखाता है कि कैसे विकास योजनाओं के लिए आने वाले फंड का दुरुपयोग निजी तिजोरियों को भरने के लिए किया जा रहा था।

अचल संपत्तियों की यह लंबी चौड़ी सूची केवल फ्लैट और कृषि भूमि तक ही सीमित नहीं पाई गई है, बल्कि जांच में कई अन्य आलीशान आवासीय संपत्तियों का भी पता चला है। ब्यूरो की टीमों को मियापुर जैसे महंगे रिहायशी क्षेत्र में लगभग 2.5 करोड़ रुपये की सरकारी कीमत वाला एक बेहद भव्य और सर्वसुविधायुक्त ट्रिपलेक्स विला मिला है, जो अत्याधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस है। इसके साथ ही कुकटपल्ली इलाके में लगभग 62.14 लाख रुपये की लागत से बना एक बिल्कुल नवनिर्मित मकान भी जांच के दायरे में आया है जो पूरी तरह आधुनिक वास्तुकला पर आधारित है। संपत्तियों के प्रति अधिकारी की भूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि निजामपेट जैसे तेजी से बढ़ते इलाके में एक और बिल्कुल नए विला को अपने नाम करने के लिए 1 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बतौर एडवांस पेमेंट (अग्रिम भुगतान) दी जा चुकी थी, जिसके पुख्ता कागजात और रसीदें भी तलाशी के दौरान आरोपी के घर से बरामद की गई हैं।

जमीन और मकानों के इस विशाल साम्राज्य के साथ-साथ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने आरोपी के ठिकानों से बहुत बड़े पैमाने पर नकदी, भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती साजो-सामान भी जब्त किया है। विभिन्न परिसरों की अलमारियों और लॉकरों की तलाशी के दौरान कुल 55 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई है जिसके स्रोत के बारे में आरोपी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके अलावा विभिन्न बैंकों में जमा करीब 1.44 करोड़ रुपये की जमा राशि (बैंक डिपॉजिट) का पता चलने के बाद उन सभी खातों को तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया है ताकि पैसों का कोई अनधिकृत लेन-देन न हो सके। गहनों की बात करें तो आरोपी के पास से करीब 2.5 किलोग्राम शुद्ध सोने के आभूषण मिले हैं, जिनकी मौजूदा बाजार दर के हिसाब से सरकारी कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही लगभग 3.6 लाख रुपये के मूल्य वाले करीब 6 किलोग्राम वजन के चांदी के भारी जेवरात और बर्तन भी ब्यूरो ने अपने कब्जे में ले लिए हैं।

अवैध रूप से अर्जित की गई इस अकूत संपत्ति से आरोपी इंजीनियर-इन-चीफ बेहद विलासितापूर्ण जीवन शैली व्यतीत कर रहा था, जिसका प्रमाण उसके घरों से मिले सामानों से मिलता है। एसीबी ने आरोपी के ठिकानों से करीब 1.26 करोड़ रुपये की कीमत का बेहद महंगा और आयातित घरेलू साजो-सामान जब्त किया है, जिसमें महंगे सोफे, झूमर और साज-सज्जा की सामग्रियां शामिल हैं। इसके अलावा आधुनिक जीवन शैली और निगरानी से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले करीब 11.25 लाख रुपये के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स भी जब्त किए गए हैं, जिनमें 9 अत्याधुनिक स्मार्टफोन और 4 हाई-एंड लैपटॉप शामिल हैं, जिनकी तकनीकी जांच की जा रही है। आवाजाही के लिए आरोपी के बेड़े में 25 लाख रुपये की अनुमानित कीमत वाली दो बेहद लग्जरी गाड़ियां भी शामिल थीं, जिन्हें ब्यूरो ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। इस तरह अब तक मिली तमाम संपत्तियों, नकदी और गहनों के आधार पर ब्यूरो ने जो कुल आधिकारिक और सरकारी मूल्य तय किया है, वह लगभग 17.95 करोड़ रुपये बैठता है।

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