फरीदाबाद में डॉक्टर मुजम्मिल शकील की गिरफ्तारी और दो एके-47 और 350 किलो विस्फोटक बरामद, बड़े हमले की थी साजिश, इमाम की पत्नी ने दी थी जानकारी।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए हरियाणा के फरीदाबाद से दो एके-47 राइफलें और करीब 350 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की
फरीदाबाद। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक बड़े आतंकी साजिश का पर्दाफाश करते हुए हरियाणा के फरीदाबाद से दो एके-47 राइफलें और करीब 350 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की है। यह कार्रवाई गिरफ्तार एक डॉक्टर की पूछताछ के आधार पर की गई। मुख्य आरोपी डॉक्टर मुजम्मिल शकील को अल-फलाह अस्पताल से हिरासत में लिया गया। जांच में पता चला कि आरोपी जैश-ए-मोहम्मद और गजवत-उल-हिंद जैसे संगठनों से जुड़े थे। पुलिस ने अब आरोपी की मस्जिद से जुड़े इमाम को भी हिरासत में ले लिया है। इमाम की पत्नी ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की। यह घटना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करीब होने से चिंता बढ़ा रही है।
सबसे पहले श्रीनगर में एक पोस्टर ने खलबली मचा दी। नवंबर के पहले सप्ताह में श्रीनगर के नौगाम इलाके में दुकानदारों को केंद्रीय एजेंसियों से न मिलने की चेतावनी वाले पोस्टर लगे मिले। इन पर जैश-ए-मोहम्मद का समर्थन था। सीसीटीवी फुटेज से एक शख्स की पहचान हुई, जो डॉक्टर आदिल अहमद राथर निकला। राथर अनंतनाग के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर था। वह अक्टूबर 2024 तक वहां तैनात रहा, उसके बाद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक निजी अस्पताल में नौकरी करने लगा। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 7 नवंबर को सहारनपुर से उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में राथर ने कई राज खोले।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में सर्च वारंट लिया। राथर के लॉकर से एक एके-47 राइफल और गोली का जखीरा बरामद हुआ। यह खोज मामले को नई दिशा दे गई। राथर ने बताया कि वह हथियारों और विस्फोटकों को फरीदाबाद में छिपा रखा है। वहां उसका साथी डॉक्टर मुजम्मिल शकील है। शकील पुलवामा जिले के कोइल गांव का रहने वाला है। वह अल-फलाह अस्पताल में काम करता था। तीन महीने पहले राथर ने फरीदाबाद में एक किराए का फ्लैट लिया, जो रहने के लिए नहीं बल्कि हथियार स्टोर करने के लिए था। पुलिस को शक है कि यह सामग्री बड़े आतंकी हमलों के लिए इकट्ठी की गई थी।
9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त टीम ने धौज गांव में छापेमारी की। आरोपी के किराए के फ्लैट से दो एके-47 राइफलें, 84 जिंदा कारतूस, 14 बैग अमोनियम नाइट्रेट (कुल 350 किलोग्राम), टाइमर, पांच लीटर केमिकल सॉल्यूशन और 48 आईईडी बनाने के सामान बरामद हुए। फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर सतेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि विस्फोटक आरडीएक्स नहीं, बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है। यह खाद के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन बम बनाने में घातक है। शुरुआती रिपोर्टों में इसे आरडीएक्स बताया गया था, जो गलत था। कमिश्नर ने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर पुलिस की अगुवाई में की गई कार्रवाई थी। स्थानीय पुलिस ने सहयोग किया।
पूछताछ में शकील ने कबूल किया कि वह राथर का साथी था। दोनों इस्लामिक स्टेट के गजवत-उल-हिंद मॉड्यूल से जुड़े थे। वे पैन-इंडिया हमलों की योजना बना रहे थे। दिल्ली-एनसीआर को निशाना बनाया जाना था। आरोपी आईईडी बनाकर हमले करने वाले थे। वे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से प्रेरित थे। भविष्य में अपना अलग 'तंजीम' खड़ा करने की भी बात सामने आई। पुलिस को शक है कि डॉक्टरों की नौकरी कवर के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। पढ़े-लिखे लोग आतंकी नेटवर्क में घुसपैठ आसान कर देते हैं। राथर और शकील पर आर्म्स एक्ट और अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। दोनों को रिमांड पर लिया गया है।
इस मामले में नया मोड़ तब आया जब शकील की मस्जिद से जुड़े इमाम को हिरासत में लिया गया। शकील फरीदाबाद की एक स्थानीय मस्जिद में जाता था। पुलिस को जानकारी मिली कि इमाम आरोपी से संपर्क में था। 10 नवंबर को इमाम को पूछताछ के लिए बुलाया गया। वह सहयोग नहीं कर रहा था, इसलिए हिरासत में ले लिया गया। इमाम की पत्नी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की। उसने लिखा कि पुलिस ने पति को बिना वजह उठा लिया। लेकिन पुलिस का कहना है कि यह जांच का हिस्सा है। इमाम पर कोई सीधा आरोप नहीं, लेकिन उसके संपर्कों की पड़ताल हो रही है।
पुलिस अब नेटवर्क को उजागर करने में जुटी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) मामले को ले सकती है। यह स्लीपर सेल जैसा मॉड्यूल था। आरोपी बाहर से सामान्य दिखते थे, लेकिन अंदर से रेडिकल थे। फरीदाबाद का धौज गांव राष्ट्रीय राजधानी से महज 50 किलोमीटर दूर है। यहां सड़कें और रेल मार्ग आसानी से उपलब्ध हैं। आरोपी इसी का फायदा उठा रहे थे। स्टोरेज के लिए ग्रामीण इलाके चुने गए, जहां नजरें कम पड़ती हैं। अल-फलाह अस्पताल भी सर्च किया गया। वहां से अतिरिक्त सामग्री मिलने की संभावना है।
यह घटना जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के बदलते स्वरूप को दिखाती है। पहले हथियार सीमा पार से आते थे, अब स्थानीय लोग ही नेटवर्क चला रहे हैं। डॉक्टर जैसे प्रोफेशनल्स का शामिल होना चिंताजनक है। वे यात्रा आसानी से कर लेते हैं और संदेह कम पैदा होता है। पुलिस ने कहा कि विस्फोटक कैसे दिल्ली के करीब पहुंचे, इसकी जांच तेज है। अमोनियम नाइट्रेट खाद के रूप में बिकता है, लेकिन इतनी मात्रा में तस्करी बिना मदद के संभव नहीं। पाकिस्तान से लिंक की पड़ताल हो रही है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने बधाई दी। उन्होंने कहा कि खुफिया तंत्र की वजह से साजिश नाकाम हुई। फरीदाबाद में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। चेकपोस्ट सख्त कर दिए गए। एनसीआर में अलर्ट जारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मॉड्यूल्स को तोड़ना जरूरी है। अन्यथा बड़े हमले हो सकते हैं। एनआईए की एंट्री से जांच गहरा सकती है।
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