Delhi Park Security: DDA ने पूरा किया 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट, हाई, मीडियम और लो रिस्क कैटेगरी के हिसाब से होगा पहरा
Delhi DDA Park Security Audit: दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपने सभी 736 पार्कों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट पूरा कर लिया है। पार्कों को हाई, मीडियम और लो रिस्क में बांटकर सुरक्षा पुख्ता की जाएगी।

- दिल्ली के पार्कों में सुरक्षा का नया खाका: DDA ने 736 उद्यानों को तीन श्रेणियों में बांटा, संवेदनशील पार्कों में बढ़ेंगे सुरक्षा गार्ड और CCTV
- DDA Park Safety Audit: आस्था कुंज कांड के बाद एक्शन में प्राधिकरण, 736 पार्कों की जांच पूरी, जानें किन पार्कों में तैनात होंगे अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी
- दिल्ली में महिलाओं और मॉर्निंग वॉकर्स की सुरक्षा होगी पुख्ता: DDA के 736 पार्कों का ऑडिट पूरा, रिस्क प्रोफाइलिंग के आधार पर होगा एक्शन
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक उद्यानों और हरित क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्राधिकरण ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी 736 पार्कों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इन सभी पार्कों को उनकी भौगोलिक बनावट, आगंतुकों की संख्या, चारदीवारी की स्थिति और प्रकाश व्यवस्था को देखते हुए तीन मुख्य श्रेणियों—हाई रिस्क (उच्च जोखिम), मीडियम रिस्क (मध्यम जोखिम) और लो रिस्क (कम जोखिम)—में विभाजित किया गया है।

हाल ही में नेहरू प्लेस स्थित आस्था कुंज पार्क में हुई गंभीर आपराधिक वारदात के बाद उपराज्यपाल वीके सक्सेना और डीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने हरित क्षेत्रों की सुरक्षा प्रणाली की तत्काल समीक्षा के निर्देश दिए थे। इस ऑडिट का मुख्य उद्देश्य पार्कों के भीतर मौजूद अंधेरे कोनों (डार्क स्पॉट्स), टूटी चारदीवारियों और सुरक्षाकर्मियों की कमी की सटीक पहचान करना है, ताकि उसी अनुपात में सुरक्षा संसाधन तैनात किए जा सकें।
- रिस्क कैटेगरी का पैमाना: कैसे हुआ वर्गीकरण?
डीडीए की विशेष तकनीकी और बागवानी शाखा द्वारा किए गए इस ऑडिट में कई मानकों को परखा गया है। पार्कों के वर्गीकरण का आधार निम्नलिखित सुरक्षा पहलुओं को बनाया गया है:
हाई रिस्क पार्क (High Risk): इस श्रेणी में उन पार्कों को रखा गया है जो बहुत बड़े क्षेत्रफल (जैसे डिस्ट्रिक्ट पार्क, बायोडायवर्सिटी जोन या जंगल से सटे हिस्से) में फैले हैं, जहां रोशनी की भारी कमी है, चारदीवारी टूटी हुई है और जहां असामाजिक तत्वों के एकत्र होने की शिकायतें पूर्व में मिल चुकी हैं। ऐसे पार्कों में 24 घंटे सुरक्षा गार्डों की शिफ्ट, नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरों का जाल और नियमित पुलिस गश्त को अनिवार्य किया जाएगा।
मीडियम रिस्क पार्क (Medium Risk): ये वे पार्क हैं जो मध्यम आकार के हैं और रिहायशी कॉलोनियों के करीब स्थित हैं, लेकिन कुछ खास प्रवेश द्वारों पर निगरानी का अभाव या झाड़ियों की अनियंत्रित वृद्धि के कारण दृश्यता कम हो गई है। यहां अतिरिक्त लाइटें लगाने और सुबह-शाम सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी बढ़ाने की योजना है।
लो रिस्क पार्क (Low Risk): आवासीय सेक्टरों के बिल्कुल बीच बने छोटे और पूरी तरह से बाउंड्री से घिरे पार्क, जहां दिनभर स्थानीय नागरिकों की निरंतर आवाजाही रहती है, इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं। यहां बुनियादी सुरक्षा मानकों के साथ स्थानीय आरडब्ल्यूए के सहयोग से निगरानी रखी जाएगी।
- बुनियादी ढांचे में सुधार की समय-सीमा
ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद डीडीए ने केवल गार्ड तैनात करने तक ही योजना को सीमित नहीं रखा है, बल्कि बुनियादी ढांचे के सुधार पर भी बल दिया है। हाई रिस्क वाले पार्कों में सबसे पहले टूटी हुई बाउंड्री वॉल और तारों की बाड़ (फेंसिंग) की मरम्मत की जाएगी ताकि अनधिकृत प्रवेश को रोका जा सके।
इसके साथ ही, पार्कों में पैदल चलने वालों के मुख्य ट्रैक्स पर हाई-मास्ट एलईडी लाइटें लगाई जाएंगी। ऑडिट में यह तथ्य भी सामने आया कि कई पार्कों में अत्यधिक घने पेड़ों और बिना छंटाई वाली झाड़ियों के कारण अंधेरा रहता है, जिसे देखते हुए बागवानी विंग को तत्काल 'प्रूनिंग' (पेड़ों की वैज्ञानिक छंटाई) शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
- महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को मिलेगा सुरक्षित माहौल
राजधानी में सुबह की सैर (मॉर्निंग वॉक) और शाम के समय पार्कों में आने वाले नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई थी। स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) ने डीडीए की इस ऑडिट पहल का स्वागत किया है। नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा श्रेणी के आधार पर संसाधनों का आवंटन एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है, क्योंकि बड़े और वीरान पार्कों को छोटे कॉलोनियल पार्कों की तुलना में कहीं अधिक सख्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
डीडीए के अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को लागू करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ भी समन्वय बैठकें की जा रही हैं, ताकि पीसीआर वैन और बाइक पेट्रोलिंग यूनिट्स को हाई-रिस्क पार्कों के प्रवेश द्वारों के साथ सक्रिय रूप से जोड़ा जा सके।
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