मंजूरी सिर्फ 6 कमरों की और धड़ल्ले से बना दिए 26 कमरे, दिल्ली के मालवीय नगर में नियमों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा था मौत का व्यापार।
राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौज रानी में हुआ भीषण अग्निकांड महज एक साधारण दुर्घटना नहीं था, बल्कि
- अवैध कंस्ट्रक्शन और लालच ने ली 21 बेकसूर लोगों की जान, दिल्ली के बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की आड़ में छिपे बड़े घोटाले की परतें खुलीं।
- होटल मालिक लवकेश बजाज की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक गलियारों में मची भारी हलचल, फायर एनओसी के बिना चल रहे इस डेथ ट्रैप के असली गुनहगारों पर कस रहा शिकंजा।
राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौज रानी में हुआ भीषण अग्निकांड महज एक साधारण दुर्घटना नहीं था, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र की घोर लापरवाही और इंसानी लालच का एक ऐसा जीता-जागता उदाहरण है जिसने 21 मासूम जिंदगियों को लील लिया। इस हादसे के बाद जब जांच एजेंसियों ने घटनास्थल की फाइलों और स्वीकृत नक्शों को खंगालना शुरू किया, तो जो सच सामने आया उसने सभी के होश उड़ा दिए। पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन के दस्तावेजों के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत को 'बेड एंड ब्रेकफास्ट' (बीएंडबी) योजना के तहत होमस्टे चलाने के लिए केवल 6 कमरों की आधिकारिक मंजूरी दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह थी कि नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाते हुए इस पांच मंजिला इमारत के भीतर कंक्रीट के अवैध पार्टीशन खड़े करके कुल 26 कमरे बना दिए गए थे, जहां हर वक्त क्षमता से चार गुना अधिक लोग ठहरे रहते थे।
इमारत के मालिक लवकेश बजाज ने ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में पूरी बिल्डिंग को एक ऐसी भूलभुलैया में तब्दील कर दिया था, जहां से आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलना लगभग नामुमकिन था। जांच में यह पाया गया है कि हर मंजिल पर जहां कानूनी रूप से केवल दो या तीन बड़े हवादार कमरे होने चाहिए थे, वहां प्लाईवुड और पतली दीवारों के सहारे पांच से छह छोटे-छोटे केबिन जैसे कमरे निकाल दिए गए थे। इन कमरों में वेंटिलेशन यानी ताजी हवा आने-जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी और खिड़कियों को स्थाई रूप से बड़े शीशों और लोहे की ग्रिलों से पूरी तरह लॉक कर दिया गया था। जब बेसमेंट में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी, तो यही बंद बनावट पूरी इमारत के लिए काल बन गई क्योंकि जहरीले धुएं को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और वह पूरी बिल्डिंग में फैल गया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और नगर निगम के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने इस मुद्दे पर प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं। यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि स्थानीय नगर निगम, दमकल विभाग और क्षेत्रीय पुलिस की नाक के नीचे सालों से यह अवैध निर्माण और व्यावसायिक गतिविधि धड़ल्ले से संचालित हो रही थी। एक संकरी और भीड़भाड़ वाली गली में बिना किसी वैध फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के इतना बड़ा होटलनुमा ढांचा खड़ा कर देना और उसमें देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को ठहराना, बिना स्थानीय अधिकारियों की मौन सहमति या भारी भ्रष्टाचार के संभव ही नहीं हो सकता।
बेड एंड ब्रेकफास्ट नीति का दुरुपयोग
दिल्ली सरकार की बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना को इसलिए शुरू किया गया था ताकि स्थानीय लोग अपने घरों के खाली कमरों में सैलानियों को ठहराकर दिल्ली की संस्कृति से रूबरू करा सकें और कुछ अतिरिक्त आय कमा सकें। इस योजना के तहत व्यावसायिक लाइसेंस और कड़े कमर्शियल नियमों से छूट दी जाती है। लेकिन इस हादसे ने यह साफ कर दिया है कि कैसे बड़े-बड़े सटोरियों और होटल व्यवसायियों ने इस योजना को टैक्स चोरी करने और बिना फायर एनओसी के अवैध रूप से पांच सितारा जैसा कमर्शियल लॉज चलाने का सबसे सुरक्षित जरिया बना लिया है।
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और संपत्ति के संचालक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। बजाज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस रिमांड के दौरान हो रही पूछताछ में यह भी पता चला है कि इस अवैध धंधे में कई अन्य बड़े पार्टनर भी शामिल थे, जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरी व्यवस्था को मैनेज करते थे। जांच टीम अब उन सभी सरकारी कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है, जिनके पास इस इलाके की इमारतों की जांच करने और अवैध निर्माण को गिराने का जिम्मा था, लेकिन उन्होंने मोटी रिश्वत लेकर आंखें मूंद रखी थीं।
इस हादसे में मरने वाले 21 लोगों में से 17 विदेशी नागरिक थे, जो भारत के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान पर भरोसा करके यहां अपना इलाज कराने आए थे। मालवीय नगर के बड़े-बड़े निजी अस्पतालों के बिल्कुल ठीक सामने स्थित इस अवैध गेस्ट हाउस में इन मरीजों को बेहद सस्ते दामों का लालच देकर ठहराया जाता था। जब आधी रात के बाद इमारत आग के गोले में तब्दील हुई, तो बीमारी के कारण शारीरिक रूप से कमजोर ये विदेशी मरीज बेड से उठकर भागने की स्थिति में भी नहीं थे। दम घुटने के कारण कमरों के भीतर ही उनकी सांसे हमेशा के लिए थम गईं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के मेडिकल टूरिज्म और पर्यटकों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा काला धब्बा लगा दिया है, जिसका जवाब देना अब सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है।
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