गूगल क्रोम यूजर्स के लिए भारत सरकार की हाई-रिस्क चेतावनी: तुरंत अपडेट करें अपना ब्राउजर वरना हैकर्स लगा सकते हैं सेंध।

भारत सरकार की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गूगल क्रोम ब्राउजर का उपयोग करने

Apr 16, 2026 - 11:54
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गूगल क्रोम यूजर्स के लिए भारत सरकार की हाई-रिस्क चेतावनी: तुरंत अपडेट करें अपना ब्राउजर वरना हैकर्स लगा सकते हैं सेंध।
गूगल क्रोम यूजर्स के लिए भारत सरकार की हाई-रिस्क चेतावनी: तुरंत अपडेट करें अपना ब्राउजर वरना हैकर्स लगा सकते हैं सेंध।
  • साइबर हमलों का नया खतरा: गूगल क्रोम में मिली गंभीर कमियां, आपकी निजी जानकारी और बैंकिंग डेटा पर मंडरा रहा है संकट
  • हैकिंग से बचने का अंतिम मौका: सरकारी एजेंसी CERT-In ने जारी किया अलर्ट, जानें कैसे सुरक्षित रखें अपना कंप्यूटर और लैपटॉप

भारत सरकार की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गूगल क्रोम ब्राउजर का उपयोग करने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए एक बेहद गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। इस आधिकारिक अलर्ट में बताया गया है कि गूगल क्रोम के पुराने वर्जन्स में कई ऐसी सुरक्षा खामियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर हैकर्स दूर बैठे ही आपके कंप्यूटर सिस्टम का पूर्ण नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। यह चेतावनी 'हाई-सीवेरिटी' श्रेणी में रखी गई है, जिसका अर्थ है कि इन कमजोरियों का जोखिम स्तर बहुत अधिक है और इन्हें नजरअंदाज करना आपके डिजिटल जीवन के लिए घातक साबित हो सकता है। यह अलर्ट विंडोज, मैक और लिनक्स तीनों ही ऑपरेटिंग सिस्टम के यूजर्स के लिए समान रूप से प्रभावी है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इस सुरक्षा चूक का मुख्य कारण क्रोम के 'सीएसएस' (CSS) कंपोनेंट और इसके 'V8' जावास्क्रिप्ट इंजन में मौजूद कुछ तकनीकी बग्स हैं। इन खामियों को 'यूज़-आफ्टर-फ्री' (Use-After-Free) के नाम से जाना जाता है, जो तब उत्पन्न होती हैं जब ब्राउजर अपनी मेमोरी का प्रबंधन सही तरीके से नहीं कर पाता। हैकर्स इस स्थिति का लाभ उठाकर पीड़ित के कंप्यूटर में 'आर्बिट्ररी कोड' यानी मनचाहा प्रोग्राम रन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें केवल यूजर को एक विशेष रूप से तैयार की गई दुर्भावनापूर्ण वेबसाइट या लिंक पर क्लिक कराने की आवश्यकता होती है। एक बार जब यूजर उस लिंक को क्रोम में खोलता है, तो हैकर्स सिस्टम की सुरक्षा दीवारों को लांघकर भीतर प्रवेश कर जाते हैं।

इस हैकिंग हमले के परिणाम अत्यंत चिंताजनक हो सकते हैं। यदि कोई हमलावर इन कमजोरियों के माध्यम से सिस्टम में घुसने में सफल हो जाता है, तो वह न केवल आपकी ब्राउजिंग हिस्ट्री और पासवर्ड देख सकता है, बल्कि आपके बैंकिंग क्रेडेंशियल्स और व्यक्तिगत फाइलों को भी चोरी कर सकता है। इसके अलावा, हमलावर आपके कंप्यूटर में चुपके से जासूसी करने वाले मालवेयर या रैनसमवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे आपका पूरा डिवाइस लॉक हो सकता है या आपके कैमरे और माइक्रोफोन का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे डरावनी बात यह है कि यह सब कुछ बैकग्राउंड में होता है और सामान्य यूजर को इसके बारे में तब तक पता नहीं चलता जब तक कि बहुत देर न हो जाए। साइबर विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक आप अपने ब्राउजर को पूरी तरह अपडेट नहीं कर लेते, तब तक किसी भी अनजान ईमेल, सोशल मीडिया मैसेज या संदिग्ध विज्ञापन वाले लिंक पर क्लिक न करें। असुरक्षित वेबसाइटों पर जाकर अपनी वित्तीय जानकारी साझा करना वर्तमान में जोखिम भरा हो सकता है।

सरकार की ओर से जारी इस एडवायजरी में स्पष्ट किया गया है कि जो यूजर्स गूगल क्रोम के 147.0.7727.55 से पुराने वर्जन्स का उपयोग कर रहे हैं, वे सबसे अधिक खतरे में हैं। गूगल ने इन खतरों को भांपते हुए तेजी से सुरक्षा पैच जारी किए हैं और नए वर्जन में इन सभी कमजोरियों को ठीक कर दिया है। CERT-In का कहना है कि साइबर अपराधी अक्सर ऐसे ही 'जीरो-डे' और 'हाई-रिस्क' बग्स की तलाश में रहते हैं क्योंकि दुनिया भर में क्रोम का यूजर बेस बहुत बड़ा है। सुरक्षा एजेंसी ने संस्थानों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे अपने आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रोम को अपडेट करने को प्राथमिकता दें।

बचाव के लिए सबसे प्रभावी और सरल तरीका यह है कि आप तुरंत अपने गूगल क्रोम को अपडेट करें। इसके लिए आपको क्रोम ब्राउजर खोलकर ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन बिंदुओं (मेनू) पर क्लिक करना होगा। वहां 'Help' विकल्प में जाकर 'About Google Chrome' पर क्लिक करें। ऐसा करते ही ब्राउजर खुद-ब-खुद अपडेट चेक करेगा और उपलब्ध होने पर उसे डाउनलोड करना शुरू कर देगा। अपडेट पूरा होने के बाद 'Relaunch' बटन दबाना अनिवार्य है, क्योंकि जब तक ब्राउजर रीस्टार्ट नहीं होता, सुरक्षा पैच पूरी तरह लागू नहीं होते। कई बार लोग अपडेट तो कर लेते हैं लेकिन ब्राउजर बंद नहीं करते, जिससे सुरक्षा का चक्र अधूरा रह जाता है। साइबर सुरक्षा का यह मुद्दा केवल एक सॉफ्टवेयर अपडेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे बदलते डिजिटल व्यवहार की ओर भी इशारा करता है। आज के दौर में जब हम अपनी अधिकांश बैंकिंग, खरीदारी और आधिकारिक काम ब्राउजर के माध्यम से करते हैं, तो ब्राउजर की सुरक्षा हमारे घर के मुख्य दरवाजे की सुरक्षा जैसी हो जाती है। सरकार ने इस अलर्ट के माध्यम से यह संदेश भी दिया है कि केवल एंटी-वायरस होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले हर एप्लीकेशन का अपडेटेड होना सुरक्षा की पहली शर्त है। हैकर्स पुरानी तकनीकों की कमजोरियों को अपना हथियार बनाते हैं, इसलिए समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना ही सबसे समझदारी भरा बचाव है।

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