भारत-यूरोपीय संघ FTA: महंगी लग्जरी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट, 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक होगी लेकिन कोटा आधारित रहेगी
समझौते की वार्ताएं 2007 में शुरू हुईं और 2013 में ऑटो सेक्टर में ड्यूटी छूट पर रुक गईं। 27 जनवरी 2026 को वार्ताएं पूरी हुईं। समझौता 2026 के अंत में हस्ताक्षरित होगा और 2027 से लागू होगा। समझौते में कोटा

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता वार्ताएं पूरी हो चुकी हैं और यह समझौता 2027 से लागू होने की संभावना है। इस समझौते के तहत यूरोपीय लग्जरी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी में छूट दी जाएगी लेकिन यह छूट केवल महंगी कारों पर लागू होगी। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि छोटी कारों के बाजार को संरक्षण देने के लिए सस्ती कारों पर कोई छूट नहीं मिलेगी। समझौते में कोटा आधारित प्रणाली अपनाई गई है जिसमें निर्धारित संख्या में कारों पर ही ड्यूटी कटौती होगी। यह समझौता 2007 से शुरू हुई वार्ताओं का नतीजा है जो 2013 में रुक गई थीं लेकिन अब पूरी हो गई हैं। समझौते से भारत के ऑटो सेक्टर को संरक्षण मिलेगा जबकि यूरोपीय संघ को बाजार पहुंच। अधिकारी ने गणित समझाते हुए कहा कि कार की कीमत पोर्ट पर 15 हजार यूरो होनी चाहिए जो अतिरिक्त खर्चों के बाद 25 लाख रुपये से ऊपर बिकेगी। इससे मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा और यूरोपीय कंपनियां भारत में निर्माण करेंगी। समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले पांच साल कोई छूट नहीं होगी।
समझौते के तहत यूरोपीय संघ भारत से कारों पर ड्यूटी धीरे-धीरे हटाएगा जबकि भारत कोटा आधारित ड्यूटी छूट देगा। अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है। भारत का ऑटो बाजार छोटी कारों पर आधारित है जहां यूरोपीय संघ की रुचि कम है। इसलिए 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली कारों को यूरोपीय संघ भारत को निर्यात नहीं करेगा। कोटा में कारों की संख्या निर्धारित होगी और यह पांच साल में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगी। ड्यूटी 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक होगी। समझौते से नौकरियां बढ़ेंगी और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण होगा।
समझौते की वार्ताएं 2007 में शुरू हुईं और 2013 में ऑटो सेक्टर में ड्यूटी छूट पर रुक गईं। 27 जनवरी 2026 को वार्ताएं पूरी हुईं। समझौता 2026 के अंत में हस्ताक्षरित होगा और 2027 से लागू होगा। समझौते में कोटा आधारित पारिस्परिक लाभ है जहां भारत हर एक लाख कार कोटा के बदले यूरोपीय संघ से 2.5 लाख टाइल कोटा लेगा। यूरोपीय संघ का बाजार भारत से दोगुना बड़ा है। समझौते से दोनों अर्थव्यवस्थाओं में नौकरियां बढ़ेंगी। अधिकारी ने कहा कि समझौता संतुलित है और दोनों पक्षों की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया है।
समझौते में इलेक्ट्रिक वाहनों को पहले पांच साल संरक्षण दिया गया है। कोटा पांचवें साल से शुरू होगा। ड्यूटी में कटौती पहले साल 35 प्रतिशत या 30 प्रतिशत से शुरू होगी और धीरे-धीरे घटेगी।
भारत-ईयू FTA में लग्जरी कारों पर ड्यूटी कटौती की शर्तें: केवल 15 हजार यूरो से ऊपर की कारों पर लागू, छोटी कारों को निर्यात नहीं करेगा यूरोपीय संघ
समझौते में लग्जरी कारों पर ड्यूटी कटौती केवल कंपलीटली बिल्ट यूनिट्स पर लागू होगी। ये वे कारें हैं जो पूरी तरह आयातित होंगी। कंपलीटली नॉक्ड डाउन यूनिट्स जो भारत में असेंबल होती हैं उन पर कोई सीधी छूट नहीं मिलेगी। अधिकारी ने बताया कि लग्जरी ब्रांड्स जैसे बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज, ऑडी, लेम्बोर्गिनी, पोर्श की ज्यादातर कारें भारत में असेंबल होती हैं इसलिए उनकी कीमतों में ज्यादा कमी नहीं आएगी। केवल अल्ट्रा हाई-एंड मॉडल्स जैसे फेरारी, लेम्बोर्गिनी, मासेराती पर प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में सीकेडी पर ड्यूटी 16-17 प्रतिशत है जो FTA से आधा होकर 8-8.5 प्रतिशत हो सकती है लेकिन इसकी पुष्टि बाकी है।
अधिकारी ने गणित समझाया कि कार की वैल्यू इंडियन पोर्ट पर 15 हजार यूरो होनी चाहिए। इसके बाद ड्यूटी, टैक्स, रजिस्ट्रेशन आदि से 10 लाख रुपये जुड़ेंगे। जीएसटी 28 प्रतिशत या 40 प्रतिशत, इंश्योरेंस, फ्रेट, ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स से कुल कीमत 25 लाख रुपये से ऊपर पहुंचेगी। इसलिए 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली कारों पर कोई छूट नहीं। यूरोपीय संघ ऐसी कारें निर्यात नहीं करेगा। वर्तमान में 40 हजार डॉलर से कम की कारों पर 70 प्रतिशत बेसिक कस्टम्स ड्यूटी है जबकि इससे ऊपर पर 110 प्रतिशत प्रभावी ड्यूटी है। FTA से कोटा में यह 10 प्रतिशत तक घटेगी।
ड्यूटी कटौती का प्रभाव
लग्जरी कारों की 90 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री लोकली असेंबल मॉडल्स से होती है। मर्सिडीज-बेंज इंडिया की 90 प्रतिशत से ज्यादा बिक्री मेड इन इंडिया मॉडल्स से है और केवल 5 प्रतिशत सीबीयू आयात से। इसलिए कीमतों में कमी नहीं आएगी। ऑडी इंडिया ने कहा कि अंतिम शर्तें उपलब्ध होने के बाद ही मूल्यांकन किया जा सकता है। रुपये की कमजोरी से लाभ ऑफसेट हो जाएगा। रुपये 2025 में यूरो के मुकाबले 19 प्रतिशत कमजोर हुआ जो लाभ को कम करेगा।
समझौते से नए और नीश प्रोडक्ट्स के लिए अवसर बनेंगे। अगर डिमांड बढ़ी तो लोकलाइजेशन बढ़ेगा।
FTA में कोटा प्रणाली और चरणबद्ध कटौती: पहले साल 40 प्रतिशत तक घटेगी ड्यूटी, ईवी को पांच साल संरक्षण, रुपये की कमजोरी से लाभ सीमित
समझौते में कोटा प्रणाली अपनाई गई है जहां ड्यूटी छूट निर्धारित संख्या में कारों पर ही मिलेगी। कोटा 2.5 लाख कारों का सालाना है। यह पांच साल में चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा। कोटा से बाहर कोई छूट नहीं मिलेगी। अधिकारी ने कहा कि कोटा आधारित इकोसिस्टम से दोनों पक्षों की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया है। भारत हर एक लाख कार कोटा के बदले यूरोपीय संघ से 2.5 लाख टाइल कोटा लेगा। यूरोपीय संघ का बाजार भारत से दोगुना बड़ा है।
ड्यूटी कटौती पहले साल 40 प्रतिशत तक होगी और फिर 10 प्रतिशत तक घटेगी। बेसिक कस्टम्स ड्यूटी आधी होकर 35 प्रतिशत होगी और फिर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत तक। सीकेडी पर ड्यूटी 16.5 प्रतिशत से आधी होकर 8.25 प्रतिशत होगी। ईवी पर पहले पांच साल कोई कोटा नहीं। ड्यूटी कटौती सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग होगी।
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