EV Charging Safety: क्या NCR में ई-वाहन चार्जिंग बनी जानलेवा? घर में इलेक्ट्रिक गाड़ी चार्ज करते समय बरतें ये सावधानियां

दिल्ली-NCR में ई-वाहन (EV) चार्जिंग के दौरान हादसों ने चिंता बढ़ा दी है। घर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते समय सुरक्षा उपायों और गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी है।

Jul 17, 2026 - 14:48
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EV Charging Safety: क्या NCR में ई-वाहन चार्जिंग बनी जानलेवा? घर में इलेक्ट्रिक गाड़ी चार्ज करते समय बरतें ये सावधानियां
home EV charger installation
  • Electric Vehicle Fire Prevention: घर पर ईवी चार्जिंग पड़ न जाए भारी, शॉर्ट सर्किट और बैटरी ब्लास्ट से बचने के सुरक्षा उपाय जानें
  • दिल्ली-NCR में ई-वाहन चार्जिंग को लेकर बढ़ी चिंता, घर में गाड़ी चार्ज करते समय इन नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
  • EV Charging Alert: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते हादसों के बीच ई-वाहन चार्जिंग सुरक्षा को लेकर गाइडलाइन जारी, जानें बचने के उपाय

दिल्ली-एनसीआर (NCR) सहित देश के तमाम बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ ही ई-वाहन चार्जिंग से जुड़ी सुरक्षा चिंताएं भी गंभीर रूप से सामने आई हैं। जुलाई 2026 में दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम के कई रिहायशी इलाकों में घरेलू स्तर पर हो रही ईवी चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों को सतर्क कर दिया है। तकनीकी मानकों की अनदेखी और घरेलू बिजली लोड का सही आकलन न करना घर पर ई-वाहन चार्ज करने को जानलेवा बना रहा है। इस उभरते संकट को देखते हुए ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और अग्निशमन अधिकारियों ने वाहन स्वामियों के लिए विशेष सुरक्षा उपाय और दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के विभिन्न रिहायशी अपार्टमेंट्स, स्वतंत्र मकानों और अवैध पीजी (PG) परिसरों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर वाहनों को घरेलू सामान्य सॉकेट से चार्ज करने के दौरान आग लगने के मामले बढ़े हैं। रिहायशी इमारतों में बिजली के बुनियादी ढांचे पर अचानक बढ़े अत्यधिक लोड और घटिया क्वालिटी के एक्सटेंशन बोर्ड के इस्तेमाल की वजह से तार पिघलने और लिथियम-आयन बैटरी के फटने की घटनाएं हो रही हैं। बिजली विभाग और दमकल अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश उपभोक्ता बिना स्वीकृत लोड बढ़ाए और बिना उचित अर्थिंग (Earthing) के ही रात भर वाहनों को चार्जिंग पर छोड़ देते हैं, जो एक बड़े हादसे का कारण बन रहा है।

दिल्ली-एनसीआर में ई-वाहनों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण लोग इसे अपना तो रहे हैं, लेकिन चार्जिंग से जुड़े तकनीकी नियमों को लेकर जागरूकता की भारी कमी है।

अग्निशमन विभाग की जांच रिपोर्टों के मुताबिक, ज्यादातर हादसे रात के वक्त होते हैं। वाहन मालिक अपनी गाड़ियों को अमूमन 5 या 15 एम्पीयर के साधारण घरेलू प्लग में लगाकर सो जाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को लगातार कई घंटों तक उच्च बिजली प्रवाह की आवश्यकता होती है। जब घरेलू वायरिंग इस निरंतर लोड को सहन नहीं कर पाती, तो तार गर्म होकर आपस में चिपक जाते हैं, जिससे शॉर्ट सर्किट होता है।

इसके अलावा, संकरी गलियों या बेसमेंट में जहां वेंटिलेशन यानी हवा के आने-जाने की सही व्यवस्था नहीं होती, वहां चार्जिंग के दौरान उत्पन्न होने वाली गर्मी (थर्मल रनअवे) लिथियम-आयन बैटरी के भीतर रासायनिक असंतुलन पैदा कर देती है। इससे बैटरी फूल जाती है और अंततः वह एक बड़े ब्लास्ट का रूप ले लेती है। कई मामलों में तो आग इतनी तेजी से फैलती है कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिलता।

इस विषय पर विभिन्न जिम्मेदार संस्थाओं और विशेषज्ञों ने अपनी राय साझा की है:

अग्निशमन विभाग (Fire Department): मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रिहायशी सोसायटियों और घरों में बिना प्रमाणित ईवी चार्जर के वाहनों को चार्ज करना बेहद खतरनाक है। उन्होंने सोसायटियों को एक समर्पित और खुले स्थान पर ही चार्जिंग स्टेशन बनाने की सलाह दी है।

विद्युत वितरण कंपनियां (DISCOMs): बिजली कंपनियों का कहना है कि ई-वाहन चार्ज करने के लिए उपभोक्ताओं को अपने घर का स्वीकृत लोड (Sanctioned Load) बढ़वाना चाहिए। बिना सूचना दिए हैवी लोड वाले चार्जर का उपयोग करने पर ग्रिड और घरेलू मीटर पर दबाव बढ़ता है।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ: विशेषज्ञों के अनुसार, ग्राहकों को केवल कंपनी द्वारा प्रमाणित ओरिजिनल चार्जर और केबल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। लोकल मार्केट से खरीदे गए सस्ते एडेप्टर और एक्सटेंशन कॉर्ड इस तरह के हादसों के लिए सीधे जिम्मेदार होते हैं।

घर में ई-वाहन चार्ज करने के जरूरी सुरक्षा उपाय

यदि आप भी अपने घर या गैराज में इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करते हैं, तो दुर्घटनाओं से बचने के लिए निम्न तकनीकी और व्यावहारिक उपायों का पालन अनिवार्य रूप से करें:

1. समर्पित सर्किट और उचित वायरिंग

ईवी चार्जिंग के लिए आपके घर में एक अलग से बिजली का सर्किट होना चाहिए। इसके लिए कम से कम 4 या 6 एमएम (mm) के मोटे और अच्छी गुणवत्ता वाले फायर-रिटार्डेंट (आग प्रतिरोधी) तारों का उपयोग करें।

2. ओरिजिनल चार्जर का ही इस्तेमाल

हमेशा वाहन निर्माता कंपनी द्वारा दिए गए आधिकारिक चार्जर का ही उपयोग करें। किसी भी स्थिति में लोकल या अनधिकृत ब्रांड के चार्जर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि वे वोल्टेज के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर पाते।

3. ओवरचार्जिंग से बचें

वाहन की बैटरी पूरी तरह चार्ज (100%) हो जाने के बाद चार्जर को प्लग से अलग कर दें। रात भर गाड़ी को चार्जिंग मोड पर छोड़कर सो जाना बैटरी लाइफ और सुरक्षा दोनों के लिहाज से सही नहीं है।

4. खुले और हवादार स्थान का चयन

गाड़ी को कभी भी बंद कमरे, संकरी बेसमेंट पार्किंग या ज्वलनशील पदार्थों (जैसे पेट्रोल, पेंट या गैस सिलेंडर) के पास चार्ज न करें। चार्जिंग पॉइंट हमेशा खुले और पर्याप्त वेंटिलेशन वाले स्थान पर होना चाहिए।

5. एक्सटेंशन कोड को कहें 'ना'

घरेलू एक्सटेंशन बोर्ड का उपयोग कभी भी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर या कार को चार्ज करने के लिए न करें। यह सीधे तौर पर शॉर्ट सर्किट को आमंत्रण देना है।

बढ़ते हादसों को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर के विकास प्राधिकरण और आरडब्ल्यूए (RWA) अब रिहायशी सोसायटियों के लिए एक सख्त 'ईवी चार्जिंग पॉलिसी' तैयार कर रहे हैं। इसके तहत हर सोसाइटी में फायर फाइटिंग सिस्टम से लैस कॉमन ईवी चार्जिंग जोन बनाना अनिवार्य किया जा सकता है। बिजली विभाग भी स्मार्ट मीटरिंग के जरिए अवैध रूप से हो रही हैवी लोडिंग पर नजर रखने की योजना बना रहा है। उपभोक्ताओं के बीच सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए आरटीओ (RTO) और वाहन डीलरशिप के माध्यम से विशेष ओरिएंटेशन प्रोग्राम भी शुरू किए जाएंगे ताकि इस हरित क्रांति को सुरक्षित बनाया जा सके।

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