मानगो में सुधा गुप्ता ने पहली मेयर बनकर इतिहास रचा, नारी शक्ति का उदाहरण, झारखंड नगर निकाय चुनावों में महिलाओं ने दिखाई ताकत।
झारखंड के हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनावों में महिलाओं का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। 23 फरवरी को हुए मतदान के बाद 27 फरवरी
- रांची में रोशनी खलखो बनीं मेयर, पुरुष दिग्गजों को दी शिकस्त
झारखंड के हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनावों में महिलाओं का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। 23 फरवरी को हुए मतदान के बाद 27 फरवरी को मतगणना में कई महिलाओं ने पहली बार मैदान में उतरकर मजबूत प्रदर्शन किया और कई स्थानों पर पुरुष उम्मीदवारों को हराकर जीत हासिल की। राज्य के 48 नगर निकायों में से 9 नगर निगमों में मेयर पद के लिए चुनाव हुए जहां महिलाओं ने प्रमुख भूमिका निभाई। कुल मिलाकर मेयर और अध्यक्ष पदों के लिए 562 उम्मीदवारों में 235 महिलाएं शामिल थीं जबकि वार्ड पार्षद पदों के लिए 5562 उम्मीदवारों में 2727 महिलाएं मैदान में थीं। मतदान में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही जहां कुल 43 लाख से ज्यादा मतदाताओं में 21 लाख से अधिक महिलाओं ने वोट डाले। यह चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण वाली सीटों के अलावा सामान्य सीटों पर भी उनकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।
रांची नगर निगम में रोशनी खलखो ने भाजपा समर्थन से मेयर पद पर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस समर्थित रमा खलखो को 14363 वोटों के अंतर से हराया। रोशनी को कुल 157669 वोट मिले जबकि रमा को 143306 वोट प्राप्त हुए। यह जीत रोशनी के लिए ऐतिहासिक है क्योंकि उन्होंने कड़े मुकाबले में राजधानी की मेयर की कुर्सी हासिल की। चुनाव प्रचार के दौरान रोशनी ने शहर की स्वच्छता, विकास और जनसेवा पर फोकस किया था। मतगणना के दौरान शुरुआती राउंड्स में बढ़त बनाने के बाद उन्होंने निर्णायक अंतर बनाए रखा। जीत के बाद समर्थकों ने जश्न मनाया और यह रांची के लिए नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है। रोशनी की जीत महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बनी है क्योंकि उन्होंने पुरुष प्रधान राजनीति में अपनी जगह बनाई।
जमशेदपुर के मानगो नगर निगम में सुधा गुप्ता ने पहली मेयर बनकर इतिहास रचा। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा ने कांग्रेस समर्थन से यह जीत हासिल की। मानगो में पहली बार नगर निगम चुनाव हुए थे और सुधा की जीत ने क्षेत्र में कांग्रेस को मजबूत संदेश दिया। उन्होंने औद्योगिक इलाके में विकास, बुनियादी सुविधाओं और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया था। सुधा की जीत भाजपा को झटका मानी गई क्योंकि जमशेदपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कांग्रेस ने कब्जा जमाया। यह जीत महिलाओं की राजनीतिक क्षमता को साबित करती है और कई पहली बार चुनाव लड़ने वाली महिलाओं के लिए मिसाल बनी।
झारखंड के नगर निकाय चुनावों में महिलाओं की कुल भागीदारी और जीत का आंकड़ा बताता है कि 235 महिलाओं ने मेयर/अध्यक्ष पद के लिए और 2727 ने पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ा। हजारीबाग नगर निगम में 36 वार्डों में से 22 में महिलाएं जीतीं जो एक रिकॉर्ड है।
हजारीबाग नगर निगम में महिलाओं का जलवा सबसे ज्यादा दिखा जहां 36 वार्डों में से 22 में महिला पार्षद निर्वाचित हुईं। यह संख्या राज्य में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को दर्शाती है। कई वार्डों में महिलाओं ने पुरुष उम्मीदवारों को हराकर अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। हजारीबाग में अरविंद राणा मेयर बने लेकिन वार्ड स्तर पर महिलाओं की जीत ने चर्चा बटोरी। इसी तरह अन्य निकायों जैसे मेदिनीनगर, देवघर और गिरिडीह में भी युवा और पहली बार चुनाव लड़ने वाली महिलाओं ने जीत दर्ज की। गिरिडीह में 22 साल की कल्पना कुमारी सबसे कम उम्र की विजेता बनीं। ये उदाहरण दिखाते हैं कि महिलाएं अब स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।
झारखंड में कुल 9 नगर निगमों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 5 सीटों पर कब्जा किया जबकि JMM और कांग्रेस ने 2-2 सीटें जीतीं। महिलाओं की जीत राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर नारी शक्ति का प्रतीक बनी। कई महिलाएं पहली बार चुनाव मैदान में उतरीं और अनुभवी पुरुष उम्मीदवारों को मात दी। यह चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण से आगे बढ़कर सामान्य सीटों पर उनकी सफलता को भी दिखाता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित की और परिणाम समय पर घोषित किए। महिलाओं की इस सफलता से भविष्य के चुनावों में उनकी भागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।
यह चुनाव महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। रोशनी खलखो और सुधा गुप्ता जैसी महिलाओं की जीत ने साबित किया कि जब महिलाएं मैदान में उतरती हैं तो वे पुरुष दिग्गजों को चुनौती दे सकती हैं। राज्य में 61.84 प्रतिशत मतदान हुआ जिसमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रही। कई निकायों में महिला उम्मीदवारों ने विकास, स्वच्छता और सामाजिक मुद्दों पर फोकस कर वोटरों का भरोसा जीता। यह नारी शक्ति का जलवा पूरे देश के लिए प्रेरणा है जहां स्थानीय स्तर पर महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं।
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