Punjab Congress Crisis: अंदरूनी कलह के बीच अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने की इस्तीफे की पेशकश, विजय इंदर सिंगला रेस में आगे
Punjab Congress Crisis: पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी में गुटबाजी के बीच अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस्तीफे की पेशकश की है। पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला नए अध्यक्ष की दौड़ में सबसे आगे हैं।

- पंजाब कांग्रेस में बड़ा सियासी फेरबदल: राजा वडिंग ने पद छोड़ने की जताई इच्छा, 2027 चुनाव से पहले नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश तेज
- Punjab Politics: राजा वडिंग के इस्तीफे की पेशकश से गरमाई पंजाब की राजनीति, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला बन सकते हैं नए पीसीसी चीफ
- पंजाब कांग्रेस में घमासान: गुटबाजी और कलह के चलते अध्यक्ष पद छोड़ना चाहते हैं अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, हाईकमान के पाले में गेंद
पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) में पिछले कई हफ्तों से चल रही गुटबाजी और खींचतान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। राज्य इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने बुधवार (30 सितंबर) को पार्टी हाईकमान के समक्ष अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल की कमी और संगठन के भीतर लगातार उठ रहे असंतोष के सुरों के बाद वडिंग ने यह कदम उठाया है।
इस घटनाक्रम के साथ ही वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को पुनर्गठित करने की कवायद तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों और पार्टी के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ सांसद विजय इंदर सिंगला नए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं।
- हफ्तों से सुलग रही थी असंतोष की आग
पंजाब कांग्रेस में आंतरिक कलह कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से राज्य नेतृत्व और कई वरिष्ठ विधायकों तथा पूर्व सांसदों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे। कई प्रमुख नेता संगठन के कामकाज, नियुक्तियों और जमीनी कार्यक्रमों को लेकर प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे थे।
पार्टी के भीतर असंतुष्ट खेमे का तर्क था कि सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दलों के खिलाफ आक्रामक रणनीति बनाने के बजाय संगठन आपसी बयानबाजी में उलझा हुआ है। ऐसे में राजा वडिंग ने हाईकमान को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि उनके नेतृत्व को लेकर किसी भी स्तर पर असहमति है, तो वे संगठन के हित में पद छोड़ने और एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
- विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे क्यों?
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की इस पेशकश के बाद पार्टी हाईकमान ने पंजाब के समीकरणों को साधने के लिए मंथन शुरू कर दिया है। इस कड़ी में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। सिंगला को संगठन का व्यापक अनुभव है और वे केंद्रीय नेतृत्व के भी काफी करीबी माने जाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में हिंदू और सिख समीकरणों का संतुलन हमेशा से कांग्रेस की राजनीति की धुरी रहा है। यदि पार्टी किसी गैर-सिख चेहरे को कमान सौंपने का निर्णय लेती है, तो शहरी और व्यापारी वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए सिंगला एक सर्वमान्य विकल्प साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, उनका विभिन्न गुटों के साथ टकराव न होना भी उनके पक्ष में जा रहा है।
- 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में अहम फैसला
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के लिए यह बदलाव रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पार्टी अब तक राज्य में पूरी तरह एकजुट होकर खड़ी नहीं हो पाई है। आगामी आम चुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच संगठन का स्थिर होना कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई जैसा है।
यदि पार्टी नेतृत्व अध्यक्ष पद पर बदलाव की मुहर लगाता है, तो नए अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरे हुए नेताओं को एक मंच पर लाना और पार्टी का कैडर दोबारा सक्रिय करना होगा।
- हाईकमान के अंतिम फैसले पर टिकी निगाहें
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस कदम के बाद गेंद अब सीधे कांग्रेस आलाकमान के पाले में है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस पर वरिष्ठ नेताओं और पंजाब प्रभारी से मंत्रणा कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला नहीं लेना चाहता जिससे गुटबाजी और अधिक भड़क जाए। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि हाईकमान वडिंग का इस्तीफा स्वीकार कर नए अध्यक्ष की घोषणा करता है या फिर उन्हें ही आगामी चुनावों तक पद पर बने रहने के लिए मनाता है।
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