UPI Charge Fact Check: क्या यूपीआई लेनदेन पर आम जनता को देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज? निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश के यूपीआई चार्ज वाले दावे को खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर नहीं।

Aug 7, 2026 - 18:36
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UPI Charge Fact Check: क्या यूपीआई लेनदेन पर आम जनता को देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज? निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब
  • Nirmala Sitharaman Vs Jairam Ramesh: यूपीआई चार्ज पर जयराम रमेश के दावे को वित्त मंत्री ने किया खारिज, जानें सच
  • क्या UPI से भुगतान पर लगेगा चार्ज? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जयराम रमेश के दावे का दिया करारा जवाब
  • UPI MDR Charge News: यूपीआई यूजर्स पर नहीं लगेगा कोई अतिरिक्त शुल्क, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया साफ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के उन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का इस्तेमाल करने पर आम नागरिकों को जेब ढीली करनी पड़ सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की कि डिजिटल लेनदेन पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) केवल व्यापारियों पर लागू होता है, न कि अंतिम ग्राहकों या आम जनता पर। उन्होंने कहा कि एमडीआर का मुख्य उद्देश्य बैंकों और फिनटेक कंपनियों को बुनियादी ढांचे, नवाचार और साइबर सुरक्षा में निवेश के लिए सक्षम बनाना है। इस रुख के साफ होने के बाद डिजिटल लेनदेन से जुड़ी भ्रांतियां दूर होने की उम्मीद है।

देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई पर शुल्क लगाए जाने की अटकलों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया था कि सरकार की नीतियों के कारण यूपीआई के उपयोग पर आम जनता को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। इस दावे पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक मंच से स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि ग्राहकों के लिए यूपीआई से भुगतान की प्रक्रिया पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त बनी रहेगी और किसी भी स्थिति में उनसे अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से यूपीआई के भविष्य और इस पर संभावित शुल्कों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने तर्क दिया था कि डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव के नाम पर अंततः इसका बोझ आम उपयोगकर्ताओं की जेब पर डाला जा सकता है।

इस पर पलटवार करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे जयराम रमेश को टैग करते हुए लिखा कि गलत जानकारी फैलाने से पहले इस तकनीकी और वित्तीय व्यवस्था को समझने की जरूरत है। वित्त मंत्री ने विस्तार से समझाया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) वह शुल्क होता है जो कोई व्यापारी बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल लेनदेन की सुविधा का उपयोग करने के बदले देता है। यह शुल्क किसी भी सूरत में आम उपभोक्ता से नहीं लिया जा सकता।

निर्मला सीतारमण ने यह भी रेखांकित किया कि एमडीआर व्यवस्था के तहत होने वाली आय का उपयोग बैंक और फिनटेक स्टार्टअप्स अपने सर्वर क्षमता को बढ़ाने, सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने और नई तकनीकों के विकास में करते हैं। जब डिजिटल बुनियादी ढांचा अधिक सुरक्षित और मजबूत होता है, तो उसका सीधा लाभ उन करोड़ों यूपीआई उपयोगकर्ताओं को मिलता है जो प्रतिदिन बिना किसी बाधा के लेनदेन करते हैं।

वित्त मंत्री के इस स्पष्टीकरण पर बैंकिंग और फिनटेक जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है। डिजिटल भुगतान क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आधिकारिक बयानों से बाजार में फैली किसी भी अनिश्चितता पर विराम लगता है। वित्तीय विश्लेषकों ने कहा कि एमडीआर व्यवस्था से फिनटेक प्लेटफॉर्म्स को अपने परिचालन खर्च निकालने और सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में मदद मिलती है, जिससे साइबर फ्रॉड का खतरा कम होता है।

दूसरी ओर, विपक्षी खेमे की ओर से जयराम रमेश ने कहा था कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एमडीआर का अप्रत्यक्ष बोझ भी छोटे व्यापारियों और अंततः उपभोक्ताओं तक न पहुंचे। हालांकि, वित्त मंत्रालय के स्पष्ट रुख के बाद यह साफ हो गया है कि रिटेल या व्यक्तिगत स्तर पर यूपीआई का उपयोग पूरी तरह निशुल्क और निर्बाध रहेगा।

भारत में वर्तमान समय में रोजाना करोड़ों की संख्या में यूपीआई लेनदेन होते हैं। सब्जी विक्रेता से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक हर जगह यूपीआई प्राथमिक भुगतान माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क लगने से जुड़ी कोई भी खबर आम जनता के बीच भ्रम और चिंता पैदा कर सकती थी। वित्त मंत्री द्वारा किए गए इस स्पष्टीकरण ने देश के करोड़ों आम उपयोगकर्ताओं को बड़ी राहत दी है। इससे डिजिटल इंडिया पहल को मजबूती मिलेगी और कैशलेस इकोनॉमी की ओर देश का कदम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ता रहेगा। साथ ही, फिनटेक सेक्टर में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए होने वाले निवेश को लेकर भी निवेशकों का भरोसा बना रहेगा।

इस बयान के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और वित्त मंत्रालय यूपीआई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नीतियों पर काम जारी रखेंगे। डिजिटल लेनदेन को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए बैंकों द्वारा सर्वर क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि आम जनता को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान सुविधा मिलती रहे, जबकि व्यापारी और बैंक आपसी व्यवस्था के तहत इस बुनियादी ढांचे के खर्चों को संचालित करते रहें।

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