Uttar Pradesh News: मेरठ में कूड़े से कंचन (सोना) - मंत्री धर्मपाल सिंह का 'सोना बनाने' का दावा और सियासी तंज।
उत्तर प्रदेश के पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने मेरठ में कूड़े से "सोना" बनाने वाली मशीन लगाने का दावा किया...
हाईलाइट्स:
- यह मशीन कूड़े का निस्तारण कर खाद, बिजली, और अन्य संसाधन बनाएगी, जिसे "कूड़े से कंचन" के रूप में प्रचारित किया गया।
- मेरठ में कूड़े के पहाड़ की समस्या को हल करने के लिए यह परियोजना शुरू की जा रही है।
- समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इस बयान पर तंज कसते हुए इसे "दूर की फेंकने का कम्पटीशन" करार दिया।
- मेरठ के लोहियानगर कूड़ा प्लांट पर पहले भी करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या बरकरार है।
विपक्ष ने इस दावे को भ्रष्टाचार का छिपा स्वीकारोक्ति और प्रचार स्टंट बताया।
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में कूड़े के निस्तारण की समस्या लंबे समय से एक बड़ा मुद्दा रही है। शहर में प्रवेश करते ही लोहियानगर और अन्य क्षेत्रों में कूड़े के विशाल ढेर नजर आते हैं, जो न केवल पर्यावरणीय समस्याएं पैदा करते हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और जीवनशैली को भी प्रभावित करते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री और मेरठ के प्रभारी मंत्री धर्मपाल सिंह ने 26 मई 2025 को एक सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि मेरठ में जल्द ही ऐसी मशीन स्थापित की जाएगी, जो "कूड़े से सोना" बनाएगी।
- धर्मपाल सिंह का दावा और मशीन की योजना
26 मई 2025 को मेरठ के विकास भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान धर्मपाल सिंह ने कूड़े के निस्तारण को लेकर यह बयान दिया। उन्होंने कहा, "हम कूड़े से कंचन यानी सोना बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिए एक विशेष मशीन तैयार की जा रही है, जो जल्द ही मेरठ में स्थापित होगी।" मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मशीन का उद्देश्य कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना है, जिसमें गीले और सूखे कचरे को अलग कर खाद, बिजली, और अन्य उपयोगी संसाधन बनाए जाएंगे। धर्मपाल सिंह ने बताया कि मेरठ में नालियों से निकलने वाला गीला कचरा अक्सर सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, जो दोबारा नालियों में चला जाता है। इस समस्या को हल करने के लिए एक आधुनिक कचरा निस्तारण प्लांट की योजना बनाई गई है। इस प्लांट में कचरे को मशीनों के जरिए साफ किया जाएगा, और उससे जैविक खाद, बायोगैस, और संभवतः बिजली उत्पादन जैसे संसाधन तैयार किए जाएंगे। मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने बाद में स्पष्ट किया कि "कूड़े से सोना" का तात्पर्य कचरे से उत्पन्न होने वाली आय और संसाधनों से है, जैसे कि एनटीपीसी द्वारा कचरे से कोयला और बिजली उत्पादन।
मेरठ में कूड़े का निस्तारण एक पुरानी और जटिल समस्या है। लोहियानगर में स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन वहां केवल "खाली बेल्ट घुमाने" के आरोप लगे हैं। शहर में प्रवेश करते ही कूड़े के ढेर नजर आते हैं, जो न केवल बदबू और प्रदूषण का कारण बनते हैं, बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ाते हैं। स्थानीय निवासियों ने लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। धर्मपाल सिंह ने इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि नालों की सफाई और कचरे के तत्काल निस्तारण के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति और बरसात से पहले नालों की सफाई पर भी जोर दिया।
इसके अलावा, उन्होंने बिजली आपूर्ति, सड़कों की मरम्मत, और संक्रामक रोगों की रोकथाम जैसे अन्य विकास कार्यों पर भी चर्चा की। धर्मपाल सिंह के इस बयान ने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को तंज कसने का मौका दे दिया। अखिलेश ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा, "उत्तर प्रदेश के दुग्ध मंत्री से आग्रह है कि पहले कन्नौज में बने-बनाए काउ मिल्क प्लांट को चलाकर दुग्ध किसानों के लिए कुछ आमदनी की व्यवस्था करें, फिर कूड़े से सोना बनाने की मशीन की बात करें। लगता है भाजपा में दूर की फेंकने का कम्पटीशन चल रहा है।" अखिलेश ने इस बयान को भ्रष्टाचार का एक छिपा स्वीकारोक्ति बताते हुए कहा, "बेईमानी के लिए इतने शालीन तरीके से बात कहने के लिए मंत्री और उनके मुखिया दोनों को साधुवाद!" सपा की छात्र इकाई, समाजवादी छात्र सभा, ने भी इस बयान पर कटाक्ष करते हुए धर्मपाल सिंह को लोहियानगर आने का न्योता दिया, ताकि वे अपनी "कला का सार्वजनिक प्रदर्शन" कर सकें। विपक्ष के इस तंज ने इस मुद्दे को और भी सियासी रंग दे दिया। कई विपक्षी नेताओं ने इसे भाजपा का प्रचार स्टंट करार दिया, जिसका मकसद आगामी चुनावों से पहले जनता का ध्यान खींचना है। दूसरी ओर, भाजपा समर्थकों ने इस परियोजना को सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
धर्मपाल सिंह के "कूड़े से सोना" वाले बयान का मतलब भले ही रूपकात्मक हो, लेकिन यह कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की ओर इशारा करता है। विश्व भर में कई देश कचरे से बिजली, बायोगैस, और खाद बनाने की तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। भारत में भी, खासकर गुजरात और दिल्ली जैसे राज्यों में, कचरा निस्तारण प्लांट्स के जरिए कचरे से ऊर्जा और खाद उत्पादन के सफल प्रयोग किए गए हैं। मेरठ में प्रस्तावित प्लांट में कचरे को छांटने, रिसाइकिल करने, और जैविक खाद या बायोगैस में बदलने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। एनटीपीसी जैसे संगठन पहले से ही कचरे से कोयला और बिजली उत्पादन की परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, तकनीकी चुनौतियां और लागत इस तरह की परियोजनाओं को लागू करने में बड़ी बाधा रही हैं। धर्मपाल सिंह ने स्वीकार किया कि मशीन को तैयार करने में "थोड़ी समस्या" है, लेकिन इसे जल्द हल कर लिया जाएगा।
मेरठ में कचरा निस्तारण की समस्या को हल करने के लिए पहले भी कई प्रयास किए गए हैं। दिसंबर 2024 में भी धर्मपाल सिंह ने इसी तरह का बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कूड़े से "कंचन" बनाने की बात कही थी। लोहियानगर कूड़ा प्लांट पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्लांट पर केवल दिखावे के लिए मशीनें चलाई जाती हैं, और कचरे का ढेर कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इसके अलावा, नालियों की सफाई और गीले कचरे के निस्तारण में समन्वय की कमी भी एक बड़ी समस्या है। धर्मपाल सिंह ने इस बार जोर देकर कहा कि सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा, ताकि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सके। धर्मपाल सिंह का "कूड़े से सोना" बनाने वाला बयान भले ही सियासी तंज और विवाद का कारण बना हो, लेकिन यह मेरठ की कचरा निस्तारण समस्या की गंभीरता को रेखांकित करता है। अगर प्रस्तावित मशीन और प्लांट वास्तव में कचरे को खाद, बिजली, और अन्य संसाधनों में बदलने में सफल होता है, तो यह मेरठ के लिए एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है।
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