मुर्शिदाबाद के नौदा में बमबारी से दहला इलाका: चुनावी रंजिश के बीच देसी बमों से हमला, कई घायल।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले नौदा इलाके में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब कुछ अज्ञात हमलावरों
- पश्चिम बंगाल में हिंसा का तांडव: नौदा में अज्ञात बदमाशों ने बरसाए बम, दहशत के साये में ग्रामीण
- खून-खराबे के बीच पहले चरण का मतदान: मुर्शिदाबाद में देसी बमों के धमाकों से मची अफरा-तफरी, भारी पुलिस बल तैनात
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले नौदा इलाके में गुरुवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब कुछ अज्ञात हमलावरों ने अचानक देसी बमों से हमला कर दिया। इस हिंसक घटना में कई स्थानीय लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें आनन-फानन में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना उस समय की है जब राज्य में विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग प्रक्रिया चल रही थी। धमाकों की गूंज इतनी जोरदार थी कि आसपास के गांवों में भी डर का माहौल बन गया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर बाइकों पर सवार होकर आए थे और भीड़भाड़ वाले इलाके को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ बम फेंकने शुरू कर दिए। धुएं और बारूद की गंध के बीच लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए, जिससे पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई।
मुर्शिदाबाद का यह इलाका लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है, और इस ताजा हमले ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, हमलावरों ने जानबूझकर उन जगहों को चुना जहां लोग मतदान के संबंध में चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे। बमबारी की इस घटना में घायलों की संख्या में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि कुछ लोगों को छर्रे लगने की वजह से काफी गहरी चोटें आई हैं। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक हमलावर फरार होने में सफल हो चुके थे। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और तलाशी अभियान तेज कर दिया है ताकि संदिग्धों को पकड़ा जा सके। इस हमले के पीछे की वजहों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे चुनावी प्रतिद्वंद्विता से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले चरण के मतदान के दौरान इस तरह की घटना का होना मतदाताओं के मनोबल को प्रभावित करने की एक कोशिश मानी जा रही है। जिला प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए नौदा और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात करने का निर्णय लिया है। घायलों में कुछ की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला मुख्यालय स्थित अस्पताल में स्थानांतरित किया गया है। फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से नमूने एकत्र किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि बमों को बनाने में किस तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था।
सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट
मुर्शिदाबाद जिले की भौगोलिक स्थिति अंतरराष्ट्रीय सीमा के करीब होने के कारण प्रशासन ने पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। पुलिस को अंदेशा है कि हमलावर पड़ोसी जिलों या सीमा पार के रास्तों का इस्तेमाल कर छिप सकते हैं। नाकाबंदी के दौरान हर आने-जाने वाले वाहन की सघन तलाशी ली जा रही है और संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज की मदद ली जा रही है। हिंसा की इस वारदात के बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। बाजार बंद कर दिए गए हैं और लोग अपने घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं। चुनाव आयोग ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। विपक्षी दलों और सत्ताधारी खेमे के बीच इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ गया है। मुर्शिदाबाद में पहले भी बम बनाने की अवैध फैक्ट्रियों और हिंसक झड़पों की खबरें आती रही हैं, लेकिन मतदान के दिन इस स्तर की बमबारी ने प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वे कुछ स्थानीय संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाल रहे हैं जो पिछले कुछ दिनों से संदिग्ध गतिविधियों में शामिल थे।
अस्पताल के बाहर घायलों के परिजनों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जो अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, बमों के फटने से निकले लोहे के छर्रों और कांच के टुकड़ों ने पीड़ितों को काफी नुकसान पहुँचाया है। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावरों का चेहरा ढका हुआ था और वे स्थानीय भाषा में चिल्लाते हुए दहशत फैला रहे थे। जिला मजिस्ट्रेट ने शांति की अपील की है और लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न देने को कहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य फिलहाल शांति बहाल करना और यह सुनिश्चित करना है कि बाकी की चुनावी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। मुर्शिदाबाद की इस घटना ने राज्य के अन्य हिस्सों में भी सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है। विशेष रूप से उन जिलों में जहां अगले चरणों में मतदान होना है, वहां पुलिस प्रशासन अब अधिक सतर्कता बरत रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस तरह की हिंसा की आशंका जता रहे थे, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। नौदा के इस कांड ने एक बार फिर से पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में हिंसा के दखल को स्पष्ट कर दिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि भारी सुरक्षा के बावजूद इतनी बड़ी मात्रा में देसी बम वहां कैसे पहुंचे और उन्हें कहां जमा करके रखा गया था।
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