Air India Flight Turbulence: हवा में 300 फीट नीचे गिरा विमान, पायलट के डोप टेस्ट सैंपल पर बढ़ा विवाद

फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया फ्लाइट में भयानक टर्बुलेंस के बाद कैप्टन के डोप टेस्ट सैंपल पॉजिटिव आने का दावा किया गया है। एयरलाइन ने दावों की पुष्टि नहीं की।

Aug 9, 2026 - 12:55
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Air India Flight Turbulence: हवा में 300 फीट नीचे गिरा विमान, पायलट के डोप टेस्ट सैंपल पर बढ़ा विवाद
Air India Flight Turbulence
  • एयर इंडिया फुकेत-दिल्ली फ्लाइट टर्बुलेंस मामला: कैप्टन के डोप टेस्ट को लेकर बड़ा दावा, जानिए पूरा सच
  • हवा में झूलती फ्लाइट और डोप टेस्ट का दावा: फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में क्या हुआ था?
  • एयर इंडिया हादसा: 300 फीट नीचे गिरी फुकेत-दिल्ली फ्लाइट, पायलट के डोप टेस्ट रिपोर्ट पर सस्पेंस

थाईलैंड के फुकेत से भारत की राजधानी दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI2379 में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद नया मोड़ सामने आया है। हवा में अचानक करीब 300 फीट नीचे गिर जाने के कारण 13 यात्री और 4 क्रू मेंबर घायल हो गए थे। अब इस मामले में विमान के कैप्टन का साइकोएक्टिव सब्सटेंस के लिए किया गया डोप टेस्ट सैंपल पॉजिटिव आने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, एयर इंडिया प्रबंधन ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा मानकों और एविएशन नियमों के तहत पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है।

4 अगस्त 2026 की सुबह थाईलैंड के फुकेत से नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए रवाना हुई एयर इंडिया की फ्लाइट एआई2379 आसमान में भयानक टर्बुलेंस की चपेट में आ गई थी। क्रूज चरण के दौरान हुए इस हादसे में एयरबस ए320 विमान अचानक असंतुलित होकर करीब 300 फीट नीचे आ गिरा। इस जोरदार झटके की वजह से केबिन के भीतर चीख-पुकार मच गई और सीटों से उछलकर कई यात्री और क्रू सदस्य केबिन की छत से जा टकराए। इस घटना के बाद अब विमान के मुख्य पायलट (कैप्टन) के डोप टेस्ट के सैंपल पॉजिटिव आने की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने विमानन क्षेत्र में हलचल मचा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया की उड़ान संख्या AI2379 ने 4 अगस्त को सुबह 8:41 बजे फुकेत से 134 यात्रियों और क्रू मेंबर्स के साथ दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। टेक-ऑफ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब विमान अपने क्रूज चरण में था, तब अचानक तेज हवाओं और मौसम के दबाव के चलते वह टर्बुलेंस का शिकार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों और यात्रियों के मुताबिक, विमान करीब दो से तीन मिनट तक हवा में बुरी तरह डगमगाता रहा। झटके इतने भीषण थे कि केबिन की सीलिंग पैनल टूट गए और सामान रखने वाले रैक को भी नुकसान पहुंचा।

विमान में सवार 13 यात्री और 4 क्रू सदस्य गंभीर रूप से चोटिल हो गए। इसके बावजूद, कॉकपिट क्रू ने सूझबूझ का परिचय देते हुए स्थिति पर नियंत्रण पाया और सुबह करीब 11:00 बजे विमान को दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया। लैंडिंग के तुरंत बाद घायल यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराई गई। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के स्थापित नियमों के तहत घटना के बाद क्रू मेंबर्स का मेडिकल और डोप टेस्ट कराया गया।

पायलट के साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट का सैंपल पॉजिटिव आने के दावों के बीच एयर इंडिया की ओर से प्रतिक्रिया आई है। एयरलाइन के प्रवक्ता ने साफ किया है कि मेडिकल प्रक्रियाओं के नतीजे और प्रशासनिक जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। एयर इंडिया ने डोप टेस्ट पॉजिटिव आने के दावों की सीधी पुष्टि नहीं की है और कहा है कि वे नियामक संस्थाओं के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।

वहीं, एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि पायलटों का नियमित डोप और अल्कोहल टेस्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल का अहम हिस्सा है। यदि किसी जांच में कोई अनियमितता पाई जाती है, तो नियामक संस्था डीजीसीए सख्त दंडात्मक कार्रवाई करती है।

हवा में अचानक घटित होने वाली टर्बुलेंस (Clear Air Turbulence) से विमानों को होने वाले खतरों पर एक बार फिर गंभीर बहस शुरू हो गई है। हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर उड़ानों में टर्बुलेंस की घटनाएं बढ़ी हैं। इसके साथ ही, पायलटों की मानसिक और शारीरिक फिटनेस को लेकर एविएशन इंडस्ट्री की साख और यात्री सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना ने सुरक्षा जांच की प्रभावशीलता और क्रू मेंबर्स के मेडिकल असेसमेंट की प्रक्रिया को और कड़ा करने की जरूरत रेखांकित की है।

इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच डीजीसीए और संबंधित एविएशन अथॉरिटीज द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसियां विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर के आंकड़ों का अध्ययन कर रही हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि टर्बुलेंस के समय कॉकपिट में क्या स्थिति थी। यदि डोप टेस्ट की पुष्टि आधिकारिक रिपोर्ट में होती है, तो संबंधित कैप्टन का लाइसेंस रद्द करने सहित कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। डीजीसीए की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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